रायपुर/जगदलपुर नक्सलियों के खिलाफ बस्तर में फिर से अब एक नए अभियान का आगाज हुआ है। शनिवार को नक्सलियों को ललकारने हजारों लोग ललकार रैली में शामिल हुए। माहौल कुछ ऐसा बना कि लोगों की भीड़ ने अब तक की सभी सभाओं और रैलियों का रिकार्ड तोड़ दिया। जिसने भी इस रैली को देखा, कहा कि इतनी भीड़ तो बस्तर के एेहतिहासिक दशहरे में ही नजर आती रही है।

एक्शन ग्रुप फार नेशनल इंटीग्रिटी (अग्नि) संस्था के नेतृत्व में बस्तर के हजारों लोगों ने नक्सलियों को ललकारते हुए कहा कि नक्सलियों के दिन खत्म हो गए हैं, समय रहते वे बस्तर छोड़ दें तो बेहतर होगा, बस्तर के लोग अब अमन-चैन चाहते हैं न कि नक्सली हिंसा।

वक्ता बोले-नक्सलियों से जुड़े फैसले दिल्ली या रायपुर में न हों और कहा-गांव में नक्सली घुसें तो मिलकर पीटेंगे। रैली और सभा में आईजी एसआरपी कल्लूरी, एसपी आरएन दाश सहित कई अन्य जिलों के एसपी भी शामिल हुए पर पुलिस विभाग की ओर से किसी भी अफसर ने लोगों को संबोधित नहीं किया।

सभा में बस्तर के गांव-गांव से लोग पहुंचे थे ही साथ ही बस्तर संभाग के सातों जिले से लोग इस रैली के लिए जुटे। शहर से 65 समाज के लोग महिलाओं और बच्चों के साथ और करीब 50 से ज्यादा स्कूलों के हजारों बच्चे सभा और रैली में शामिल हुए।

भीड़ इतनी ज्यादा थी कि जितने लोग हाता ग्राउंड में नजर आ रहे थे उससे दो गुने लोग शहर की सड़काें पर थे। लोगाें ने प्रण लिया कि अब नक्सली उनके गांव में आएंगे तो उन्हें गांवों से भगाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो नक्सलियों की पिटाई कर उन्हें पुलिस के हवाले किया जाएगा। रैली में शामिल लोगों ने प्रण लिया कि अब वे नक्सलियों का आंतक और बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बेला का मोबाइल छीना
सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया का मोबाइल भी किसी ने सभा में छीन लिया, बेला भाटिया मोबाइल से वीडियो बनाती रहीं और लोग उनके पीछे खड़े होकर नक्सलवाद मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे।

संजीत की मौत के बाद उद्वेलित हुए लोग
सभा के बाद आईजी एसआरपी कल्लूरी ने कहा कि सुकमा जिले के मुकरम में संजीत राठौर उर्फ नब्बे को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद नेशनल मीडिया ने इसे सही ठहराना शुरु किया इस घटना से बस्तर के लोग आक्रोशित थे इसके नतीजे के तौर पर लोग इस रैली के रुप में सड़क पर नजर आए।

छोटे बच्चों को लेकर आई थीं महिलाएं
ललकार रैली में शामिल होने कुछ महिलाएं छोटे बच्चों को लेकर साथ आई थीं। तेज धूप व उमस की तकलीफ के बावजूद छतरी ओढ़े या बच्चों के सिर पर कपड़ा ढंककर चलती दिखीं। हाता ग्राउंड में बारिश या धूप से बचाने के लिए छाया का इंतजाम नहीं था, लिहाजा असहनीय धूप को सहन करती महिलाएं अपनी जगह पर बैठी रहीं।

ड्रोन से भी निगरानी
एहतियात के तौर पर फोर्स ने सभा स्थल के आस-पास की ऊंची इमारतों पर जवानों को तैनात किया हुआ था, जो पूरे समय कार्यक्रम स्थल पर नजर रख रहे थे। ड्रोन से हवाई निगरानी भी चलती रही।

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