झरना, पहाड़, गुफाएं और प्रकृति का अनुपम उजास... गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की मैकल पर्वत शृंखला की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की मैकल पर्वत शृंखला में प्रकृति, रोमांच और आस्था से भरी यात्रा का प्लान बनाएं।

पेंड्रा से अमरकंटक रोड पर स्थित दुर्गा धारा।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धीरेंद्र सिन्हा, बिलासपुर। चलिए, इसबार छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की मैकल पर्वत शृंखला की खूबसूरती देखने को यात्रा का प्लान बनाते हैं। हरियाली से लकदक जंगल, पहाड़ों से उतरती जलधाराएं और हर मोड़ पर बदलते नजारे यहां के सफर को खास बना देते हैं। बिलासपुर के समुदलाई कुंड से लक्ष्मणधारा तक का रास्ता प्रकृति, रोमांच, आस्था और सुकून से भरा है, जहां हर मोड़ नई उत्सुकता जगाता है।
यात्रा की शुरुआत बिलासपुर से करें। जल, जंगल और सुकून से भरे इस सफर का पहला पड़ाव समुदलाई कुंड रखें। यहां से लखन घाट और सोन नदी किनारे बसे शिवघाट पहुंचें। यहां का शांत वातावरण कुछ देर ठहरने को मजबूर कर देगा। आगे तारा खारा जलप्रपात की जलधारा और बेनीबाई की अद्भुत प्रतिमा देखने के बाद धनपुर स्थित आदि शक्ति मंदिर में दर्शन करें।
इसके बाद परेवा पाट की प्राकृतिक बनावट से गुजरते हुए शाम तक गगनई नेचर कैंप पहुंचें। झील किनारे सूर्यास्त, स्थानीय भोजन और रात का ठहराव यात्रा को यादगार बना देगा। अगले सुबह गगनई में सूर्योदय और बोटिंग का आनंद लें। इसके बाद झोझा जलप्रपात की ओर निकलें। वर्षाऋतु में इसकी जलधारा अपने सबसे जीवंत रूप में नजर आती है।
रास्ते में जोगी गुफा, घाघरा डैम और सोनकुंड का आकर्षण भी देखने लायक है। रात ठहरने के लिए पेंड्रारोड अच्छा विकल्प है। सफर यहीं खत्म नहीं होता। आगे मलनिया डैम, हवा पत्थर और बिल्लमगढ़ गुफा होते हुए जलेश्वर महादेव के दर्शन अगले दिन करें। फिर राजमेरगढ़ की पहाड़ियों से धरम पानी हिल व्यू, दुर्गा धारा और माई का मंडप होते हुए लक्ष्मण धारा पहुंचें। यहां का मनोहारी प्राकृतिक दृश्य सफर की खूबसूरत याद बनकर रह जाएगा।
सिर्फ झरने नहीं, पानी की पूरी कहानी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की खूबसूरती का असली आकर्षण यह है कि यहां पानी हर जगह एक जैसा दिखाई नहीं देता। कहीं वह चट्टानों से फिसलता है, कहीं नदी के रूप में साथ चलता है और कहीं विशाल जलाशय बनकर आसमान को प्रतिबिंबित करता है।
तारा खारा, झोझा, दुर्गा धारा और लक्ष्मणधारा जैसे पड़ाव बारिश में तो अपना अलग रूप दिखाते हैं। कैमरा साथ हो तो हर पड़ाव एक अलग फ्रेम बन सकता है।

बेनीबाई की प्रतिमा अपने आप में रहस्य
यहां 25 फीट ऊंची एक मूर्ति है, जो बलुआ पत्थर से बनी हुई लगती है। स्थानीय लोग इसे वन देवी के रूप में पूजते हैं। उनका मानना है कि बरसात के पानी के कटाव के कारण पत्थर ने देवी का रूप और आकार ले लिया है।
यहां हर्रा और बहेड़ा के वृक्ष भी एक साथ हैं। स्थानीय मान्यता है कि यह तांत्रिक साधना का केंद्र है। पर्यटन विवरण इसे जैन तीर्थंकर की कायोत्सर्ग मुद्रा से जोड़ता है।

समुदलाई के बारे में जानें
यहां एक बड़ा प्राकृतिक तालाब है। यह काफी गहरा है और इसका पानी खारा है। लोगों का मानना है कि यह तालाब समुद्र से जुड़ा है और इसमें समुद्र का पानी आता है।
कुछ स्थानीय लोगों के अनुसार, इसे भीम ने अपने वनवास के दौरान खोदा था। कुछ अन्य लोगों का मानना है कि यह तालाब उल्कापिंड गिरने से बना था। लोगों का ऐसा विश्वास है कि इस पानी में नहाने से त्वचा संबंधित बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

गगनई में रात, यात्रा में अलग अनुभव
गगनई नेचर कैंप को केवल रात गुजारने की जगह मानना इस यात्रा के साथ न्याय नहीं होगा। जलाशय, जंगल और खुला आसमान इसे यात्रा का विश्राम-बिंदु बनाते हैं। यहां बोटिंग और सूर्यास्त का अनुभव यात्रा की थकान उतार देता है।
जिला प्रशासन के पर्यटन प्रयासों के तहत यहां स्थानीय युवाओं को पर्यटन गतिविधियों, ट्रेकिंग और हास्पिटैलिटी से जोड़ा गया है। यानी पर्यटक का आनंद स्थानीय रोजगार से भी जुड़ता है। यहां खान-पान की उचित व्यवस्था है।
पेंड्रा में रुकें, सफर को स्थानीय रंग दें
यात्रा के पड़ाव में पेंड्रारोड को केवल रात ठहरने का पड़ाव न बनाएं। बाजार और आसपास की स्थानीय जिंदगी को महसूस करें। भोजन में स्थानीय चावल आधारित व्यंजन, मौसमी सब्जियां और छत्तीसगढ़ी स्वाद तलाशना यात्रा को अलग अनुभव देता है।
होटल चुनते समय पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन के आसपास रहना सुविधाजनक रहेगा। आनलाइन उपलब्ध विकल्पों में स्टेशन के पास होटल भी मिलते हैं, इसलिए पहले बुकिंग करना बेहतर है।

समय व सावधानी भी जरूरी
ट्रेवल संचालक शरद पांडेय बताते हैं कि यह यात्रा जल्दबाजी में पूरी करने के लिए नहीं है। जलप्रपातों पर तेज बहाव के किनारे जाने, चट्टानों पर चढ़ने और गुफाओं में बिना स्थानीय मार्गदर्शन उतरने से बचें। बरसात में सड़क और जंगल की पगडंडियां जोखिम भरी हो सकती हैं, इसलिए सुबह जल्दी निकलना सबसे उपयोगी रणनीति होता है।
मोबाइल नेटवर्क की समस्या होगी। हर जगह समान मिले, यह जरूरी नहीं। पानी, प्राथमिक उपचार सामग्री, पावर बैंक और जरूरी दवाएं साथ रखें।
बजट जरूर बनाएं, नकदी साथ रखें
पहाड़ी क्षेत्र, इंटरनेट की दिक्कतों के बीच यात्रा में नकदी जरूर रखें। बजट की पूरी प्लानिंग कर लें। दिल्ली से बिलासपुर सीधे ट्रेन से पहुंच सकते हैं। विमान से भी बिलासपुर चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंचा जा सकता है।
यात्रा की शुरुआत बिलासपुर से ही करना उचित रहेगा। स्वंय कार चलाएं तो ज्यादा अच्छा। ट्रेवल ऐजेंसी की भी मदद ले सकते हैं। ट्रेवलर्स कृष्णा यादव के मुताबिक कार से यात्रा ज्यादा अच्छा है।
नेचर कैंप में कपल के ठहरने व अलग-अलग रेस्तरां में खाना-पीना घूमना सब मिलाकर कम से कम 15 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है।
