'पति-पत्नी को एक-दूसरे की कमाई पर सवाल पूछने का अधिकार', गुजारा भत्ता पर छत्तीसगढ़ HC की बड़ी टिप्पणी
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अब पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे की आय और ...और पढ़ें

पति-पत्नी को एक-दूसरे की कमाई पर सवाल पूछने का अधिकार।
HighLights
हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता पर अहम टिप्पणी की।
पति-पत्नी को आय, संपत्ति पर जिरह का अधिकार।
BNS की धारा 144 के तहत यह व्यवस्था।
डिजिटल डेस्क, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भरण-पोषण भत्ता के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि गुजारा भत्ता के मामले में अब पति और पत्नी, दोनों को एक-दूसरे की आय व संपत्ति से जुड़े शपथ पत्र पर जिरह करने का पूरा अधिकार है। हाई कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने यह अहम व्यवस्था दी है।
दरअसल, रायपुर निवासी एक महिला ने अपने पति के खिलाफ दुर्ग फैमिली कोर्ट में BNS की धारा 144 के तरह भरण-पोषण का आवेदन लगाया। सुप्रीम कोर्ट के चर्चित 'रजनेश विरुद्ध नेहा' फैसले के निर्देशों के तहत महिला ने अपनी आय और संपत्ति का शपथ पत्र कोर्ट में पेश किया था।
जब पति के वकील ने इस शपथ पत्र में दी गई जानकारी और आय के स्रोतों पर जिरह शुरू की, तो 3 अगस्त को फैमिली कोर्ट द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने उन्हें सवाल पूछने से रोक दिया।
मासिक गुजारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकते
सीआरपीसी और बीएनएस में पत्ती, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण का प्रविधान है। नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद इसने सीआरपीसी की धारा 125 की जगह ली। पर्याप्त साधन होने के बावजूद आश्रितों की उपेक्षा करने या उनका खर्च उठाने से इनकार करने पर कोर्ट मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दे सकती है।
इससे दायरे में अपना खर्च उठाने में असमर्थ पत्नी, अवयस्क या शारीरिक-मानसिक रूप से अक्षम बच्चे और माता-पिता आते हैं।
