'पति ही क्यों, बहू और उसके रिश्तेदार भी हो सकते हैं घरेलू हिंसा के आरोपित'; छत्तीसगढ़ HC की सख्त टिप्पणी
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि केवल पति ही नहीं, बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदार भी आरोपित हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम फैसला (फाइल फोटो)
HighLights
घरेलू हिंसा में बहू व मायके पक्ष के रिश्तेदार भी आरोपित।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की, सुनवाई जारी रहेगी।
साझा घर में न रहने मात्र से आरोप से मुक्ति नहीं।
डिजिटल डेस्क, बिलासपुर । घरेलू हिंसा के मामलों में हर बार आरोपित सिर्फ पति ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। बहू और मायके पक्ष के रिश्तेदारों को भी आरोपित बनाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।
हाई कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने कहा कि किसी व्यक्ति को घरेलू हिंसा के मामले से शुरुआती स्तर पर केवल इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता कि, वह शिकायतकर्ता के साथ एक ही घर में नहीं रहता है।
साझा घर में रहने और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े विवादों में आरोपों की वास्तविकता साक्ष्यों और गवाहों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए इस स्तर पर कार्यवाही खत्म करना उचित नहीं है।
मामला रायपुर की निर्मला अग्निवंशी (सास) और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी (ननद) की शिकायत से जुड़ा है। दोनों ने बहू अनीशा अग्निवंशी और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों सुषमा सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत शिकायत की थी।
आरोपित पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उनके खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोप टिकाऊ नहीं हैं।
हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में साझा घर, पारिवारिक संबंध और कथित घरेलू हिंसा से जुड़े तथ्य साक्ष्य के आधार पर तय होने हैं। इस स्तर पर आरोपों की विश्वसनीयता का अंतिम आकलन करना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों की याचिका निरस्त कर दी। अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
