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'पति सरकारी नौकरी में तो बहन को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति',छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Mon, 14 Sep 2026 02:00 AM (IST)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि यदि मृत कर्मचारी के ...और पढ़ें

पति सरकारी नौकरी में तो बहन को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति।

पति सरकारी नौकरी में तो बहन को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों पर दिया अहम फैसला।

  2. मृत कर्मचारी के परिवार में सरकारी नौकरी होने पर नियुक्ति नहीं।

  3. सहानुभूति के आधार पर नियमों में छूट नहीं दी जा सकती।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि मृत कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। केवल सहानुभूति के आधार पर नियमों में ढील नहीं दी जा सकती। यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने दिया।

मामला उत्तर बस्तर कांकेर (चारामा) की कृतिलता भेंडिया और उनकी मां बिमला बाई से जुड़ा है। कृतिलता के भाई रूरल हेल्थ ऑफिसर थे। 27 सितंबर 2025 को ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया था। इसके बाद बहन कृतिलता ने अनुकंपा नियुक्ति मांगी थी।

स्वास्थ्य विभाग ने 27 मार्च 2026 को उनका आवेदन खारिज कर दिया। विभाग का तर्क था कि कृतिलता के पति पहले से सरकारी कर्मचारी हैं। इस फैसले को याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा नीति के तहत यह आवेदन अपात्र है। कोर्ट ने सभी पक्षों और रिकार्ड को देखने के बाद याचिका खारिज कर दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आए आर्थिक संकट से तुरंत उबारना है।

चूंकि याचिकाकर्ता के पति पहले से सरकारी सेवा में हैं इसलिए परिवार के पास आय का स्रोत मौजूद है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सिर्फ सहानुभूति के आधार पर नीति में छूट देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। तत्कालीन नियमों के तहत ही आवेदन पर विचार होगा।