भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप घोटाला: सीबीआई करेगी 10 हजार करोड़ की चोरी की जांच
भिलाई इस्पात संयंत्र में कथित 10 हजार करोड़ रुपये के स्क्रैप घोटाले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है।

भिलाई इस्पात संयंत्र से 10 हजार करोड़ का स्क्रैप गायब।
HighLights
भिलाई इस्पात संयंत्र स्क्रैप घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
भाजपा विधायक ने 10 हजार करोड़ रुपये की चोरी का दावा किया।
सीबीआई पुलिस की केस डायरी और तकनीकी साक्ष्यों की समीक्षा करेगी।
डिजिटल डेस्क, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में स्क्रैप घोटाले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है।
राज्य सरकार ने जांच के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। स्थानीय पुलिस की जांच के बीच भाजपा विधायक रिकेश सेन ने बीएसपी में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी का दावा किया है। हालांकि, चोरी की वास्तविक मात्रा और आर्थिक नुकसान जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगा।
अब तक करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किया गया है और 21 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अनुमान है कि 3,000 से अधिक टन लोहा चोरी हुआ है।
सीबीआई सबसे पहले पुलिस की केस डायरी, आरोपितों के बयान, जब्ती पंचनामा और तकनीकी साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। इसके बाद बीएसपी के स्क्रैप स्टॉक, वजन पर्ची, गेट पास, डिस्पैच रिकॉर्ड, वाहनों की आवाजाही और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाएगी।
जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि संयंत्र से स्क्रैप बाहर निकालने की प्रक्रिया में किसकी भूमिका थी। पुलिस की जांच में यह सामने आया था कि फ्ल्यू डस्ट (धातु गलाने की प्रक्रिया में निकलने वाला तत्व) जैसी सामग्री के परिवहन के दौरान लौह के स्क्रैप को बाहर भेजा गया।
जांच के दायरे में 21 आरोपित
अब तक गिरफ्तार 21 आरोपित सीबीआई की जांच के दायरे में हैं। जरूरत पड़ने पर एजेंसी उनसे दोबारा पूछताछ कर सकती है। जांच में कॉल डिटेल, डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेनदेन, परिवहन दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं।
बीएसपी के संबंधित अधिकारी, ठेका एजेंसियां, ट्रांसपोर्टर, वाहन मालिक, ड्राइवर, स्क्रैप कारोबारी और चोरी का माल खरीदने वाली इकाइयां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं। सीबीआई यह पता लगाएगी कि चोरी का माल किसके निर्देश पर बाहर निकाला गया और आगे किसे बेचा गया।
वैशाली नगर के भाजपा विधायक रिकेश सेन लंबे समय से इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। सीबीआई के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बरामद स्क्रैप पूरे मामले की सीमा है या यह बड़े नेटवर्क का केवल एक हिस्सा है।
