नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। दुनियाभर में ईरान से हो रही कच्चे तेल की आपूर्ति के संबंध में अमेरिका के हालिया बयान ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। सोमवार को लिए गए अमेरिका के इस फैसले ने दोनों तरह के क्रूड की कीमतों में उबाल ला दिया। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर ईरान से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति भारत में ठप पड़ती है तो भारत इस संकट के लिए कितना और किस तरह से तैयार है। हमने इस बारे में केडिया कमोडिटीज के प्रमुख अजय केडिया से विस्तार से बात की है।

ईरान से भारत को क्यों रुक सकती है तेल आपूर्ति?

भारत अब ईरान से कच्चा तेल (क्रूड) नहीं खरीद सकेगा। पिछले वर्ष ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिका ने कुछ देशों को वहां से तेल खरीदने के लिए छह महीनों की जो छूट दी थी वह छूट की अवधि पहली मई को खत्म हो रही है और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी देश के लिए यह अवधि बढ़ाने से इन्कार कर दिया है। इसमें भारत, चीन और जापान समेत आठ देश शामिल हैं। छूट का लाभ उठा रहे कई देशों ने अमेरिका के इस फैसले की आलोचना की है। हालांकि अमेरिका ने कहा है कि वह और उसके सहयोगी देश अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कमी नहीं होने देंगे।

ईरान से कितना तेल मंगाता है हिंदुस्तान और ईरान से ही तेल मंगाने की वजह?

अजय केडिया ने बताया कि भारत की ओर से ईरान से तेल मंगाए जाने की प्रमुख वजह भारत और ईरान के बीच मजबूत रिश्ते हैं और दूसरी प्रमुख वजह यह है कि ईरान भारत से तेल आपूर्ति पर रुपये में भी पेमेंट ले लेता है। वहीं अगर वित्त वर्ष 2017-18 की बात करें तो ईरान से भारत को इस साल 18.4 मिलियन प्रति टन की आपूर्ति हुई है। वहीं भारत ईरान से तेल मंगाने के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत से पहले चीन और साउथ कोरिया का नंबर आता है। इसके अलावा ईरान का तेल सबसे सस्ता है, ऐसे में अगर कोई देश ईरान के अलावा किसी अन्य देश से तेल खरीदेगा तो जाहिर तौर पर वहां से तेल मंगाने की लागत बढ़ जाएगी। यानी वहां से तेल मंगाना ईरान से महंगा पड़ेगा।

ईरान के अलावा भारत के पास क्या है विकल्प?

केडिया ने बताया कि देखिए भारत ईराक, सऊदी अरब के बाद ईरान से सबसे ज्यादा तेल मंगाता है। वहीं अमेरिका ने भी अब तेल की आपूर्ति शुरू कर दी है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में कहा था कि वो लैटिन अमेरिका और ब्रुनेई से तेल खरीदता है और जब अमेरिका तेल आपूर्तिकर्ता बन जाएगा तो हम पहले खरीदार होंगे।

ईरान की तेल आपूर्ति ठप होने से भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या पड़ेगा असर?

अजय केडिया ने बताया कि लॉन्ग टर्म में तो इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन शार्ट टर्म में जाहिर तौर पर इसका असर पेट्रोल डीजल की कीमतों पर देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इसका सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ेगा, क्योंकि ईराक के अलावा किसी और देश से तेल मंगाने पर वहां की बढ़ी हुई लागत भारत को महंगा तेल खरीदने पर मजबूर करेगी। ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर भारत ईरान से तेल नहीं मंगा पाया तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 से 5 रुपये तक बढ़ सकती हैं।

Posted By: Praveen Dwivedi

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