नई दिल्‍ली, पीटीआइ। Coal Crisis को लेकर हर तरफ बिजली संकट का शोर सुनाई पड़ रहा है। हालांकि सरकार का साफ कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। बिजली की मांग के हिसाब से भरपूर सप्‍लाई की Electricity देने के लिए कोयले का बंदोबस्‍त है। इस बीच एक स्‍टडी में य‍ह बात भी सामने आई है कि Rooftop Solar Energy Project के जरिए कोई भी अपने घर में जरूरत की बिजली पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक इसकी लागत देश में 66 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है, जबकि चीन में यह 68 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है और वह दूसरा सबसे सस्ता देश है। एक वैश्विक अध्ययन में यह कहा गया है। कम लागत के कारण घरों और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक भवनों में इस्तेमाल किए जाने वाले छत पर लगे सौर पैनल जैसी रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक (RTSPV) तकनीक, वर्तमान में सबसे तेजी से लगायी जाने वाली ऊर्जा उत्पादन तकनीक है। इस अध्ययन के अनुसार, आरटीएसपीवी से 2050 तक वैश्विक बिजली की मांग का 49 प्रतिशत तक पूरा होने का अनुमान है।

पिछले एक दशक में, नीति केंद्रित पहल के साथ-साथ परियोजना स्थापित करने की लागत में भारी गिरावट से वैश्विक स्तर पर आरटीएसपीवी के इस्तेमाल में काफी तेजी आई है। 2006 और 2018 के बीच, आरटीएसपीवी की स्थापित क्षमता 2,500 मेगावाट से बढ़कर 2,13,000 मेगावाट पहुंच गई है।

यह अध्ययन रिपोर्ट अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के पर्यावरण और ऊर्जा के लिए वैश्विक केंद्र के निदेशक प्रियदर्शी शुक्ल, लंदन स्थित इम्पीरियल कॉलेज की शिविका मित्तल और कोलंबिया विश्वविद्यालय से जेम्स ग्लिन ने तैयार किया है। टीम का नेतृत्व आयरलैंड स्थित ऊर्जा, पर्यावरण और समुद्र के लिये प्रमुख शोध केंद्र एमएआरईआई के शोधकर्ता सिद्धार्थ जोशी ने किया।

छतों पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए जहां भारत और चीन में लागत क्रमश: 66 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा, 68 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है। वहीं अमेरिका और ब्रिटेन में यह क्रमश: 238 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा एवं 251 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है। अध्ययन के अनुसार वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता में छतों पर लगाई जाने वाली सौर परियोजनाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है।

Edited By: Ashish Deep