नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। लोगों में गोल्ड, बेचना और खरीदना आम बात है। जब लोगों को पैसे की जरूरत होती है तो वे गोल्ड का एक्सचेंज करके नकदी हासिल करते हैं। गोल्ड को सबसे अच्छा निवेश विकल्प माना जाता है। यहां तक की बैंक भी गोल्ड बार या सिक्के बेचते हैं। जब गोल्ड का एक्सचेंज किया जाता है तो इसके पिघलने के चार्ज आदि के नाम पर एक बड़ी राशि काट ली जाती है। इसलिए हम आपको इस खबर में बता रहे हैं कि जब आप गोल्ड की बिक्री करें तो किन बातों का ख्याल रखें।

1. जब आप अपना गोल्ड बेचते हैं, तो विक्रेता ओरिजिनल बिल मांगता है। बिल में गोल्ड से जुड़ी सारी जानकारी होती है। वह कितना शुद्ध है इसका जिक्र भी होता है। खरीदे गए गोल्ड के बारे में विक्रेता बिल में बताई गई किसी भी बात से इनकार नहीं कर सकते।

2. जब आप गोल्ड बेचने का फैसला करें, अलग-अलग ज्वैलर्स से कुछ कोट्स इकट्ठा करना बेहतर है। इससे आपको गोल्ड को एक्सचेंज करने का सही रेट पता चल पाएगा।

3. यह जरूरी है कि जब आप गोल्ड बेचें तो उसपर हॉलमार्क होना जरूरी है। हॉलमार्क नहीं होने पर दुकानदार इसकी क्वालिटी को कम करके बता सकता है। जिन आभूषणों पर हॉलमार्क बीआईएस लोगो होता है उसे माना जाता है कि इसकी शुद्धता की जांच किसी लाइसेंस प्राप्त प्रयोगशाला से की गई है। BIS भारत की एकमात्र एजेंसी है जिसे आभूषणों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की ओर से मंजूरी मिली होती है।

4. ज्वैलर्स सोने की शुद्धता की जांच करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ जौहरी आभूषणों को पिघलाते हैं और शुद्धता और वजन को निर्धारित करने के लिए गोल्ड को छानते हैं। हालांकि, कुछ करने के लिए मशीन का इस्तेमाल करते हैं और वे सभी पत्थरों को अलग करके सोने के वास्तविक वजन का निर्धारण करते हैं।

सोने की शुद्धता की जांच करने के लिए हॉलमार्क वाली ज्वैलरी पर चार प्रमुख कंपोनेंट्स यानी बीआईएस मार्क, करात में शुद्धता, परखने और हॉलमार्किंग सेंटर्स की पहचान संख्या और ज्वैलर की पहचान के निशान को देखना चाहिए।  

Posted By: Nitesh

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