मुंबई, पीटीआई। RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) ने कहा है कि सुस्त होती इकोनॉमी और निजी निवेश में नरमी के चलते उसने रेपो रेट में कटौती करने का फैसला किया था। इसी महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक हुई थी, जिसके मिनट्स शुक्रवार को जारी किए गए। आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर (रेपो रेट) में 25 आधार अंकों यानी 0.25 परसेंट की कटौती की थी। इस वर्ष जनवरी से अब तक यह पांचवीं कटौती थी। 

चालू वर्ष में आरबीआइ रेपो रेट में 135 आधार अंकों यानी 1.35 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। मिनट्स के मुताबिक दास ने बैठक में कहा कि घरेलू मांग और निजी खपत में कमी देखी गई है। इस वजह से कुल मांग में गिरावट हुई है। यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। बैठक में दास ने घटते निजी निवेश और कॉरपोरेट सेक्टर की हिचक को लेकर भी चिंता जताई थी। हालांकि, हाल के समय में मैन्युफैक्चिरिंग के क्षेत्र में क्षमता का लगभग औसत प्रयोग हुआ है।

दास ने कहा कि इकोनॉमी को गति देने के लिए सरकार ने भी हाल में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस समय इकोनॉमी को गति देने के लिए हर तरह से प्रयास किए जाने की जरूरत है। आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट को लेकर अपना मत जाहिर करते हुए कहा था कि बीते कुछ समय में मंहगाई भी निर्धारित लक्ष्य के भीतर ही रही है, इसलिए मैं रेपो रेट घटाने के विचार पर सहमत हूं। इसके बाद एमपीसी के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट को 0.25 परसेंट कम करने को लेकर सहमति जताई। 

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय के दौरान दास ने कई मौकों पर कहा है कि आगामी बैठक में भी आरबीआइ नीतिगत ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर सकता है।

Posted By: Manish Mishra

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