नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोरी के साथ कारोबार कर बंद हुआ है। एक डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे कमजोर होकर 72.69 के निम्नतम स्तर पर बंद हुआ है। दिन के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपये ने 28 पैसे की गिरावट के साथ 72.73 का रिकॉर्ड लो का स्तर छूआ था।

पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों का 80% कच्चा तेल आयात करता है। जानकारों का मानना है कि रुपये में हो रही गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार में निवेश को लेकर कम दिलचस्पी दिखाना भी है। रुपये में गिरावट का असर आपकी जेब पर भी पड़ेगा। हम आपको बता रहे हैं कि रुपये में गिरावट आपके पर्सनल फाइनेंस पर कैसे असर डालेगा।

केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि रुपये की स्थिति अभी भी चिंताजनक है। अगर सितंबर तिमाही की बात करें तो रुपया 73.67 से 74 की रेंज में कारोबार करता नजर आ सकता है। वहीं अगर साल 2018 की बात करें तो रुपया 75 का स्तर भी छू सकता है।

तेल की कीमतों में वृद्धि

अगर, आप दफ्तर जाने के लिए खुद की कार का इस्तेमाल करते हैं, तो हो सकता है पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह से आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरफ स्विच करना पड़े। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में आपका मंथली फ्यूल बजट बढ़ जाएगा और आपकी ओर से किये जाने वाले बचत- निवेश पर प्रभाव पड़ेगा।

विदेश यात्रा

अगर आप विदेश में किसी काम से जा रहे हैं, बिजनेस के सिलसिले में या फिर घूमने जा रहे हैं, तो आपको अपने बजट से ज्यादा खर्च करना होगा। आपके ठहरने की व्यवस्था से लेकर, यात्रा और खाने के पैसों का खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में आपका मंथली बजट भी बिगड़ सकता है।

इलाज का खर्च

बहुत सारे चिकित्सा उपकरण और औजार आयात किए जाते हैं। रुपये में गिरावट की वजह से उपकरण की लागत बढ़ जाएगी, इससे उपचार लागत भी बढ़ेगी। यदि आप विदेश में इलाज करने की सोच रहे हैं तो आपको अपना बजट बढ़ाना पड़ सकता है, क्योंकि आपको अब और अधिक भुगतान करना होगा।

शिक्षा

रुपये में गिरावट का असर आपकी शिक्षा पर भी पड़ेगा। अगर आप पढ़ाई के लिए विदेश जाने की सोच रहे हैं, तो आपको मिलने वाले लोन की राशि बढ़ जाएगी। साथ ही आपको ट्यूशन फीस, हॉस्टल और मेस फीस के लिए अधिक रकम चुकानी होगी।

वेतन कटौती या नौकरी की कमी

अगर, आप ऐसी कंपनी में काम कर रहे हैं जो अपने व्यवसाय के लिए सामान आयात करती है, तो हो सकता है कि आपके सैलरी में कटौती हो जाए या अगर नौकरी चली जाए तो आपको वित्तीय तौर पर परेशान होना पड़ सकता है। 

डॉलर में होने वाले सभी पेमेंट महंगे हो जाएंगे

वहीं, अगर डॉलर कमजोर होता है तो डॉलर के मुकाबले भारत जिन भी मदों में पेमेंट करता है वह भी महंगा हो जाएगा। यानी उपभोक्ताओं के लिहाज से भी यह राहत भरी खबर नहीं है। यानी आसान शब्दों में भारत का इंपोर्ट बिल (आयात बिल) बढ़ जाएगा।

Posted By: Nitesh