नई दिल्ली, एजेंसी। पहली जुलाई से देश में वित्तीय लेनदेन के कई नियमों में बदलाव हो चुके हैं। इनका ग्राहकों के जीवन पर सीधा असर देखने को मिलेगा। इन बदलावों में पीएफ, एटीएम निकासी चार्ज और म्युचुअल फंड से जु़ड़े कई नियम शामिल हैं।

कोरोना के कारण उपजे हालात में केंद्र सरकार ने कर्मचारी पेंशन फंड (EPF‍) से निकासी के नियमों में ढील दी थी। नए नियमों के साथ निकासी का आवेदन देने के लिए 30 जून आखिरी तारीख थी। इसमें खाताधारक को कुल जमा राशि के 75 फीसद या तीन महीने के बेसिक व डीए के बराबर की राशि (जो कम हो) निकालने की सुविधा दी गई थी। 

इसी तरह एटीएम से निकासी के नियमों में दी गई ढील भी 1 जुलाई से खत्म हो गई है। एसबीआइ के ग्राहकों के लिए एटीएम से निकासी महंगी हो गई है।

1 जुलाई से बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता भी खत्म हो गई है। हालांकि अगर खाते में शून्य बैलेंस हुआ तो बैंक पेनाल्टी ले सकते हैं। अभी अलग--अलग बैंकों में शहरों, कस्बों व गांवों में न्यूनतम बैलेंस की सीमा 1,000 रपये से 10,000 रुपये तक है।

ये बदलाव भी हुए प्रभावी

अटल पेंशन योजना के लिए मंथली ऑटो डेबिट शुरू हो गया है। ऑटो डेबिट की प्रक्रिया को 30 जून तक के लिए रोक दिया गया था। सर्विस टैक्स और सेंट्रल एक्साइज से जु़ड़े पुराने विवादों को सुलझाने के लिए घोषित सबका विश्‍वास योजना की अंतिम तारीख भी 30 जून थी।

पहली जुलाई से म्युचुअल फंड की खरीद पर स्टांप ड्यूटी भी लगनी शुरू हो गई है। एसआइपी या एसटीपी दोनों तरीके से म्युचुअल फंड निवेश पर स्टांप ड्यूटी का भुगतान करना होगा। निकासी पर स्टांप ड्यूटी नहीं लगेगी।

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