जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गिग वर्कर्स से जुड़े काम के लिए सरकार नियम बनाने जा रही है। संगठित सेक्टर की तरह उन्हें भी इलाज, पेड छुट्टी, सीमित काम के घंटे, पेंशन जैसी सुविधाएं देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इन विषयों पर सभी राज्यों के श्रम मंत्रियों की बैठक में चर्चा की गई और सभी राज्यों ने इन मुद्दों पर सकारात्मक रुख जाहिर किया। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में देश में 77 लाख गिग वर्कर्स थे जो वर्ष 2029-30 तक 2.35 करोड़ हो जाएंगे।

गिग वर्कर्स के लिए काम के घंटे की जाएगी तय 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को श्रम मंत्रियों के सम्मेलन में गिग वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की बात कही। श्रम मंत्रालय के विजन 2047 के मुताबिक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार के गिग वर्कर्स के लिए काम के घंटे और उनकी कार्य स्थिति तय की जाएगी। उनकी आय को लेकर भी नियम बनाए जाएंगे। इन वर्कर्स की व्यावसायिक सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा की सुविधा बहाल करनी होगी।

इन वर्कर्स का नियोक्ता के साथ विवाद को सुलटाने के लिए मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा। इन सबके अलावा गिग वर्कर्स को सभी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा भी दी जाएगी। इनमें इलाज के साथ पेंशन की सुविधा होगी।

गिग वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सामाजिक सुरक्षा फंड का सृजन किया जाएगा और इस फंड में केंद्र व राज्य दोनों का योगदान होगा। कारपोरेट कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व के तहत फंड में योगदान दे सकती है। गिग वर्कर्स की भलाई के लिए केंद्रीय श्रम सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में कई ऑनलाइन एग्रीगेटर्स को भी शामिल किया गया है। अब तक इस कमेटी की पांच बैठक हो चुकी है।

जानें कौन होते हैं गिग वर्कर्स 

रिटेल स्टोर, मैन्यूफैक्चरिंग एवं अन्य गैर पारंपरिक सेक्टर में कैजुअल रूप से काम करने वाले श्रमिक ऑफलाइन गिग वर्कर्स होते हैं। वहीं, ओला, उबर, जोमैटो जैसे प्लेटफार्म के लिए काम करने वाले श्रमिक ऑनलाइन गिग वर्कर्स की श्रेणी में आते हैं। अधिकतर गिग वर्कर्स नौजवान होते हैं और ये अपनी सुविधा के मुताबिक फ्लेक्सिबल तरीके से काम करना चाहते हैं।

अभी इनके कामकाज को लेकर कोई नियम नहीं हैं जबकि इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी कई ऐसे डिजिटल प्लेटफार्म हैं, जिनके लिए काम करने वाले गिग वर्कर्स को दुर्घटना बीमा कवर तक नहीं दिया गया है। ग्राहकों की तरफ से डिलीवरी के बाद की रेटिंग के हिसाब से उन्हें अगला काम दिया जाता है। डिजिटल प्लेटफार्म की तरफ से उन्हें दी जाने वाली कमीशन एग्रीगेटर्स अपनी सुविधा के मुताबिक बढ़ा-घटा देती है।-

Edited By: Piyush Kumar