नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अक्सर यह सिखाया जाता है कि आप जब भी कमाई शुरू करें तो साथ में निवेश भी शुरू करें। क्योंकि आपको भी नहीं पता कि कब आपकी ओर से जमा पैसा आपके काम आ जाएगा। फाइनेंशियल तौर पर मजबूत रहने के लिए आप कोई प्लानिंग तो कर सकते हैं, कड़ी मेहनत कर सकते हैं। लेकिन ऐसे समय में क्या होगा जब आपके पास पैसे को लेकर कोई इमरजेंसी आ जाए।

ऐसी ही इमरजेंसी के लिए वित्तीय सुरक्षा की बात की जाती है। इसके लिए 6-12 महीने के खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड की जरूरत पड़ती है। इमरजेंसी फंड शार्ट टर्म की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। मान लीजिए कभी नौकरी चली जाए, कारोबार में नुकसान हो जाए, बीमारी की हालत में दवाओं की खर्चें हों, फिर आपको इसी फंड का सहारा लेना पड़ता है। हम चार ऐसे वित्तीय संकटों का जिक्र कर रहे हैं जब आपको इमरजेंसी फंड की जरूरत पड़ेगी।

नौकरी खोना: फर्ज कीजिए कंपनी नीति में बदलाव को लेकर, आर्थिक मंदी के चलते या किसी अप्रत्याशित कारण से आपकी नौकरी चली जाती है तो आप क्या करेंगे। यह कभी भी किसी भी समय किसी के भी साथ हो सकता है। जाहिर है नौकरी खोने के बाद आप एक दूसरी नौकरी की तलाश में लगेंगे। इसमें समय भी लग सकता है। इस बीच, आपको किसी बिल या किराए का भुगतान करना हो फिर आप क्या करेंगे। ऐसे वक्त में ही इमरजेंसी फंड की दरकार होती है। इसके लिए आप रेकरिंग डिपॉजिट या म्युचुअल फंड में जमा पैसा निकाल सकते हैं।

हेल्थ इमरजेंसी: हो सकता है आप युवा हों और आपको कोई बीमारी न हो। आप बिलकुल फिट हों। लेकिन इसके बावजूद आपको अचानक बीमारी हो सकती है। यदि आप इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हैं, तो फिर आपको बेहद मुश्किलात का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आप स्वास्थ्य बीमा कराकर रखें। यदि आपके पास पहले से ही एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है तो यह अच्छी बात है। बीमा पॉलिसी आपको कैंसर, स्ट्रोक या किडनी फेल जैसी गंभीर बीमारी के निदान के वक्त काम आएगी। बीमा पॉलिसी की राशि बीमारियों के कारण आपके नुकसान को कवर करने में काम आएगी।

कमाई करने वाले सदस्य की मौत होने पर: अगर परिवार में किसी कमाने वाले की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे समय में वित्तीय चुनौतियों को टर्म पॉलिसी के साथ निपटाया जा सकता है। बीमा राशि उस व्यक्ति की आय की जगह पर काम आ सकता है जब वह अपने परिवार की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। बीमा पॉलिसी लोन रीपेमेंट, किराया, बच्चों की शिक्षा और अन्य मासिक खर्चों के आधार पर लेनी चाहिए।

प्राकृतिक आपदा: बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं आपके घर और सामान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके मरम्मत या नवीनीकरण के लिए आपको अपनी जेब ढीली करनी होगी। अगर आपके घर का बीमा है तो आप इस खर्च से निपट सकते हैं। इसलिए प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए घर का भी बीमा कराकर रखें।

Posted By: Nitesh