नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। वित्त वर्ष के खत्म होते ही करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करना होता है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2018 है। आमतौर पर काफी सारे करदाता आखिरी समय में अपना आईटीआर फाइल करने की भूल करते हैं। ऐसे में गलतियों की गुंजाइश बढ़ जाती है जो कि टैक्सपेयर्स पर भारी पड़ सकती है। हम अपनी इस खबर में आपको 8 ऐसी गलतियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिन्हें करने से आपको बचना चाहिए।

सैलरी को कम करके दिखाने की भूल न करें: आमतौर पर कुछ नौकरीपेशा टैक्स बचाने के लिए आईटीआर में अपनी सैलरी को कम करके दिखाने की भूल कर बैठते हैं। ऐसा करना आयकर नियमों का सीधा उल्लंघन है और आप ऐसा करने से आसानी से पकड़ में आ सकते हैं। ऐसा करने की भूल कतई न करें क्योंकि ऐसा करने से आप पर कार्यवाही भी की जा सकती है। अमूमन फॉर्म 16 में आपकी सही सही सैलरी का उल्लेख होता है, लेकिन जो लोग नौकरी नहीं करते हैं वो ऐसा करने (सैलरी कम करके दिखाने) की कोशिश करते हैं।

अगर कमाई 50 लाख से ज्यादा है तो सभी एसेट्स का खुलासा करें: ऐसे करदाता जिनकी कमाई 50 लाख रुपए से ज्यादा की होती है। उसे उन वित्तीय संपत्तियों (चल और अचल संपत्तियों सहित) के विवरण का खुलासा करना आवश्यक होता है, जिसे उन्हें उस तिथि तक अर्जित किया हुआ होता है। ऐसा करना इस तरह के करदाताओं का कर्तव्य होता है।

विदेशी परिसंपत्तियों और आय का खुलासा जरूर करें: कर चोरी रोकने के लिहाज से, करदाता के लिए यह जरूरी है कि वह अपने विदेशी खातों की जानकारी भी आयकर विभाग को दे, साथ ही यह भी बताए कि उस वित्त वर्ष के दौरान उसने उस पर कितना ब्याज हासिल किया है। आपकी विदेशी संपत्तियों के संबंध में कोई भी गलत जानकारी आपको मुश्किल में ला सकती है।

पूर्व नियोक्ता की ओर से हुई कमाई को बताना न भूलें: नौकरी छोड़ने के बाद आमतौर पर कर्मचारी अपने पूर्व नियोक्ता से हुई कमाई के बारे में अपने मौजूदा नियोक्ता को जानकारी नहीं देते हैं। आमतौर पर नए नियोक्ता भी पिछली नौकरी से अर्जित आय के बारे में ध्यान नहीं देते हैं। टैक्स की कटौती तब इस अवधारणा पर की जाती है कि बाकी बचे महीनों के लिए होने वाली कमाई सिर्फ इस साल की ही आय है। लेकिन यह उस वक्त मुश्किल खड़ी कर देता है जब टैक्सपेयर्स साल के आखिर में रिटर्न फाइल करते हैं। उस वक्त दोनों नियोक्ताओं की ओर से हुई कमाई को जोड़ा जाता है और कटौती एवं कर छूट आधी रह जाती है और कर देयता की स्थिति बन जाती है।

सभी तरह की कमाई का जिक्र करें: आमतौर पर आधे से ज्यादा करदाता टैक्स सेविंग एफडी और अन्य एफडी से हुई कमाई का खुलासा करना भूल जाते हैं। कुछ करदाताओं को लगता है कि ये टैक्स फ्री है, यह एक मिथ है। उन्हें नहीं पता होता है कि हालांकि ये आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स बचाने में मददगार होते हैं। हालांकि इनसे होने वाली ब्याज योग्य आय पर टैक्स देना होता है। इसलिए बतौर करदाता अपनी इस तरह की आय का खुलासा आईटीआर में जरूर करें।

HRA क्लेम में न करें गड़बड़ी: आमतौर पर लोग एचआरए क्लेम के दौरान फर्जी डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल कर लेते हैं। ऐसा करना आयकर नियमों के मुताबिक आपको मुश्किलों में डाल सकता है। यह भी हो सकता है कि ऐसा करने से आपको जेल की हवा खानी पड़ जाए।

पैन नंबर और बैंक अकाउंट की सही डिटेल दें: आईटीआर फाइलिंग के दौरान करदाताओं को पैन नंबर और बैंक अकाउंट नंबर की जानकारी देनी होती है। आमतौर पर इन्हीं डिटेल को भरते हुए करदाता गलतियां कर देते हैं। ऐसे में इन जानकारियों को सावधानी से भरना चाहिए। ऐसा करने से न सिर्फ आपका आईटीआर रिजेक्ट हो सकता है बल्कि आप पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

बंद पड़े खातों की जानकारी देना भी जरूरी: आईटीआर में बंद पड़े खातों की जानकारी देना भी जरूरी होता है। ऐसे में कोशिश करें कि आईटीआर फाइलिंग के दौरान आप अपने सभी बैंक खातों फिर वो चाहे बंद ही क्यों न हों। आमतौर पर लोग अपने सभी बैंक खातों की जानकारी नहीं देते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए।

Posted By: Praveen Dwivedi

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