नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने हाल ही में अपनी 1300 बैंक ब्रांच के नाम और उनके आईएफएससी (IFSC) में बदलाव किया है। ऐसे में अगर आपका अकाउंट भी एसबीआई की किसी ब्रांच में है तो आपको भी जरा अलर्ट हो जाना चाहिए क्योंकि आईएफएससी और ब्रांच का नाम गलत लिख देने से आपको वित्तीय लेन-देन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हम अपनी इस खबर में आपको आईएफएससी की अहमियत बताने जा रहे हैं कि आखिर यह इतना जरूरी क्यों है?

क्या होता है IFSC कोड: यह इंडियन फाइनेंस सिस्टम कोड (भारतीय वित्तीय प्रणाली संहिता) होता है। 11 अंकों का यह कोड बैंक के हिसाब से अलग-अलग (यूनिक) होता है। ऑनलाइन पेमेंट करने या पैसे मंगवाने के लिए इस कोड की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम की एप्लीकेशन के लिए किया जाता है, जैसे आरटीजीएस (रिअल टाइम ग्रास सेटलमेंट), एनईएफटी(नेशनल इल्ट्रोनिक फंड ट्रांसफर) आदि।

किस काम आता है IFSC: इस कोड की आवश्यकता उस स्थिति में होती है जहां किसी अन्य व्यक्ति को फंड ट्रांस्फर करना होता है। पैसे भेजने या मंगवाने के दौरान आईएफएससी की मांग की जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी को तीन लाख रुपये भेजना चाहते हैं तो आपसे ब्रांच IFSC की मांग की जाएगी। यदि आप नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो किसी नए बेनिफिशयरी को जोड़ने के लिए IFSC की जरूरत होती है।

11 अंक के IFSC में किस अंक का क्या है मतलब: इस 11 अंक के कोड में पहले चार अंक बैंक के नाम को बताते हैं। पांचवा अंक शून्य होता है। अगले 6 अंक बैंक का ब्रांच कोड होते हैं। यह ब्रांच लोकेशन को दर्शाता है। चेक बुक में IFSC होता है इससे पता चलता है कि यह चेक किस बैंक का है और इसकी कौन सी ब्रांच है।

कैसे करें IFSC पता:

  • इसे पता करने के लिए https://bankifsccode.com पर जाएं।
  • यहां पर बैंक का नाम, राज्य, जिला और ब्रांच को सेलेक्ट करें।
  • यह चारों कॉलम भरने के बाद आपके सामने बैंक और उसकी ब्रांच की जानकारी सामने आ जाएगी। इसमें बैंक का नाम, पता, राज्य, जिला, संपर्क करने के लिए नंबर, IFSC, ब्रांच कोड और एमआईसीआर कोड दिया होता है।

क्या होता MICR:
इसका मतलब Magnetic Ink Corrector Recognition होता है। यह चेक में लिखे 23 अंकों में से एक होता है। सीरीज में चेक नंबर के बाद के अगले नौ डिजिट्स MICR होते हैं। यह नंबर यह दर्शाता है कि चेक किस बैंक से जारी हुआ है। इसे चेक रीडिंग मशीन पढ़ती है। यह तीन भागों में बंटा होता है।

  • पहला भाग सिटी कोड होता है। मसलन, सीरीज की पहली तीन डिजिट आपके शहर का पिन कोड होती हैं जिसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि चेक किस शहर से है।
  • दूसरा भाग बैंक कोड होता है। अगली तीन डिजिट यूनीक कोड होता है। हर बैंक का अलग यूनीक कोड होता है। उदाहरण के तौर पर ICICI बैंक का 229 आदि।
  • तीसरा भाग ब्रांच कोड होता है। हर बैंक का ब्रांच कोड अलग होता है। यह कोड बैंक से जुड़े हर ट्रांजैक्शन में इस्तेमाल किया जाता है।

By Surbhi Jain