Sugar stocks crash: चीनी इंपोर्ट के फैसले से शेयर बाजार में शुगर स्टॉक्स हुए धड़ाम, इस शेयर ने कराया ज्यादा नुकसान!
सरकार ने त्योहारों से पहले घरेलू सप्लाई बढ़ाने और कीमतें कम करने के लिए 1 मिलियन टन कच्ची चीनी के ...और पढ़ें

गिरावट में डालमिया भारत शुगर सबसे आगे रही, जिसके शेयर 5.47% गिरकर ₹480.30 पर आ गए।
HighLights
सरकार ने 1 मिलियन टन कच्ची चीनी के इंपोर्ट की अनुमति दी।
घरेलू सप्लाई बढ़ाने और चीनी कीमतें कम करने का लक्ष्य।
इस फैसले से चीनी कंपनियों के शेयर में गिरावट आई।
नई दिल्ली। सरकार ने त्योहारों के मौसम से पहले घरेलू सप्लाई बढ़ाने और रिकॉर्ड-हाई कीमतों को कम करने के लिए 1 मिलियन मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की इजाज़त दी। इसके बाद 21 अगस्त को शुरुआती कारोबार में चीनी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई।
इस गिरावट में डालमिया भारत शुगर सबसे आगे रही, जिसके शेयर 5.47% गिरकर ₹480.30 पर आ गए, जबकि द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर 4.32% गिरकर ₹52.99 पर बंद हुए। बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर 4.15% गिरकर ₹735.25 और त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज के शेयर 3.82% गिरकर ₹288.60 पर आ गए।
उत्तम शुगर मिल्स के शेयर 3.07% गिरकर ₹325.90 पर, EID पैरी के शेयर 2.22% गिरकर ₹792.30 पर और धामपुर शुगर मिल्स के शेयर 1.99% गिरकर ₹185.99 पर आ गए। अवध शुगर एंड एनर्जी के शेयर 1.53% गिरकर ₹802.20 पर, बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर 1.41% गिरकर ₹23 पर और श्री रेणुका शुगर्स के शेयर 1.03% गिरकर ₹25.86 पर आ गए। सिम्भावली शुगर्स के शेयर ₹7.89 पर स्थिर रहे।
किस शेयर में दिखी कितनी गिरावट
| कंपनी का नाम | शेयर की कीमत (₹ में) | गिरावट (%) |
| डालमिया भारत शुगर (Dalmia Bharat Sugar) | 480.3 | -5.47% |
| द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज (Dwarikesh Sugar) | 52.99 | -4.32% |
| बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini Mills) | 735.25 | -4.15% |
| त्रिवेणी इंजीनियरिंग (Triveni Engineering) | 288.6 | -3.82% |
| उत्तम शुगर मिल्स (Uttam Sugar Mills) | 325.9 | -3.07% |
| ईआईडी पैरी (EID Parry) | 792.3 | -2.22% |
| धामपुर शुगर मिल्स (Dhampur Sugar Mills) | 185.99 | -1.99% |
| अवध शुगर एंड एनर्जी (Avadh Sugar & Energy) | 802.2 | -1.53% |
| बजाज हिंदुस्तान शुगर (Bajaj Hindusthan Sugar) | 23 | -1.41% |
| श्री रेणुका शुगर्स (Shree Renuka Sugars) | 25.86 | -1.03% |
पिछले दो सेशन में चीनी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी, क्योंकि घरेलू सप्लाई में कमी और रिकॉर्ड कीमतों की वजह से बेहतर कमाई की उम्मीदें बढ़ गई थीं। गुरुवार को यह तेजी और बढ़ गई, जब बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में 18 परसेंट, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग 14 परसेंट की बढ़ोतरी हुई और कई अन्य चीनी कंपनियों के शेयरों में 7-10 परसेंट की बढ़त देखी गई।
सरकार ने गुरुवार को 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की इजाज़त दे दी है। इसका मकसद सप्लाई बढ़ाना और घरेलू बाज़ार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतों को काबू में करना है। आम तौर पर भारत चीनी के इंपोर्ट पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगाता है।
यह कदम लगभग एक दशक में भारत द्वारा चीनी के इंपोर्ट का पहला बड़ा मामला है। सप्लाई में कमी के कारण घरेलू कीमतें तेज़ी से बढ़ने के बाद यह फ़ैसला लिया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, कम उत्पादन के चलते पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इंपोर्ट की इस समय-सीमा का काफ़ी महत्व है क्योंकि त्योहारों के मौसम में चीनी की खपत आम तौर पर बढ़ जाती है। इस दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की मांग बढ़ती है और बड़े उपभोक्ता स्टॉक जमा करते हैं। 31 अक्टूबर की समय-सीमा का मकसद मांग बढ़ने के इस दौर में घरेलू बाज़ार में अतिरिक्त सप्लाई लाना है।
बंदरगाह के पास स्थित चीनी रिफाइनरियां, जो आमतौर पर रिफाइनिंग और बाद में एक्सपोर्ट करने के लिए बिना किसी ड्यूटी के कच्ची चीनी (raw sugar) इम्पोर्ट करती हैं, वे 10 लाख टन (1-million-tonne) के कोटे के तहत आवंटन के लिए अप्लाई कर सकती हैं। सरकार इन रिफाइनरों द्वारा पहले से इम्पोर्ट की गई कच्ची चीनी से बनी रिफाइंड चीनी को अक्टूबर के आखिर तक घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत भी देगी।
इम्पोर्ट का यह फैसला चीनी की कीमतों को काबू में रखने की सरकार की कोशिशों में एक बड़ी बढ़ोतरी है। इस हफ्ते की शुरुआत में, सरकार ने बड़े कंज्यूमर्स के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया था। सरकार ने आदेश दिया कि जो डीलर महीने में 10 मीट्रिक टन से ज़्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिन की खपत के बराबर ही स्टॉक रख सकते हैं। यह नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा।
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