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हफ्तों बाद भारत में विदेशी निवेश की वापसी, बाजार को मिला सहारा; सोमवार को मार्केट में दिखेगा असर?

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Sat, 25 Apr 2026 04:31 PM (GMT+05:30)

भारत में सात हफ्तों के बाद विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक हुआ है, जिसमें $106 मिलियन का शुद्ध निवेश दर्ज ...और पढ़ें

भारत में 7 हफ्तों में पहली बार 106 मिलियन डॉलर का आया निवेश

भारत में 7 हफ्तों में पहली बार 106 मिलियन डॉलर का आया निवेश

HighLights

  1. सात हफ्तों बाद भारत में $106 मिलियन विदेशी निवेश।

  2. ETF ने निवेश प्रवाह में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  3. सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर दिखेगा सकारात्मक असर।

IANS, नई दिल्ली। भारत में पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों का रुख थोड़ा सकारात्मक रहा। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 106 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया। यह पिछले 7 हफ्तों में पहली बार है जब निवेश सकारात्मक रहा है। अब इसका असर सोमवार को भारत के शेयर बाजार में दिख सकता है।

Elara Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले लगातार 6 हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी (आउटफ्लो) हुई थी। अब यह संकेत मिल रहा है कि भारत से निवेशकों की बिकवाली धीरे-धीरे कम हो रही है।

ETF ने किया सपोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया कि साप्ताहिक आउटफ्लो पहले 1.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो अब घटकर करीब 180 मिलियन डॉलर रह गया है।

इस सुधार में ETF (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) का बड़ा योगदान रहा। ETF में इस हफ्ते 220 मिलियन डॉलर का निवेश आया। लेकिन लॉन्ग-ओनली फंड्स में अभी भी करीब 400 मिलियन डॉलर की निकासी हुई

अमेरिकी फंड्स का बदला रुख

अमेरिकी इक्विटी फंड्स में पिछले एक महीने में हर हफ्ते 10 अरब से 22 अरब डॉलर तक का निवेश आया, जबकि ग्लोबल फंड्स में 16 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया।

ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (जीईएम) फंड्स में हर हफ्ते करीब 2 अरब डॉलर तक का निवेश जारी रहा, जबकि इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का निवेश आया।

इसके विपरीत, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेश निकल रहा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रुझान दिखाता है।

कमोडिटी से जुड़े इक्विटी फंड्स में हाल के समय में तेजी के बाद अब निवेश की रफ्तार धीमी हो गई है।

साथ ही, ऊर्जा सेक्टर के फंड्स में निकासी कम हुई है, सोने में निवेश की गति धीमी गति से स्थिर हुई है, जबकि चांदी से जुड़े फंड्स में निवेश कमजोर बना हुआ है।