नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। वित्त वर्ष 2017-18 खत्म होने में अब सिर्फ एक महीना बचा हुआ हैं। वित्त वर्ष के आखिर में हर कोई चाहता है कि उसे कम कर का भुगतान करना पड़े। लेकिन हर साल टैक्स बचाने के लिए आपको व्यवस्थित तरीके से और समय पूर्व तैयारी करनी होती है। अगर अब आप अगले वित्त वर्ष के लिहाज से टैक्स की बचत शुरू करना चाहते हैं तो आपको बचत से जुड़ी कम से कम चार बातें पता होनी चाहिए जिनकी मदद से आप इनकम टैक्स बचा सकते हैं। दैनिक जागरण की टीम इस खबर के माध्यम से आपको यही बताने की कोशिश करेगी।

मकान का किराया देते हैं तो बचा सकते हैं टैक्स: अगर आप किराए के मकान में रहते हैं तो भी आप टैक्स बचा सकते हैं। मकान किराया भत्ता (एचआरए) टैक्स बचत का एक प्रमुख माध्यम होता है। इसे आपके वेतन से काटा जाता है।

नीचे दिए गए तीन में से जो सबसे कम होता है उस पर कटौती लागू होती है:

  • मूल एचआरए आपके नियोक्ता की ओर से दिया जाता है।
  • अगर आप दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों में रहते हैं तो आपको बेसिक सैलरी का 50 फीसद और महंगाई भत्ता, नहीं तो अगर आप अन्य शहरों में हैं तो बेसिक सैलरी का 40 फीसद और महंगाई भत्ता।
  • घर का मूल किराया, बेसिक सैलरी का 10 फीसद इसमें से घटाया जाता है और फिर इसमें महंगाई भत्ता शामिल किया जाता है।

सुनिश्चित करें: अगर आप किराए के मकान में रह रहे हैं तो आप मकान मालिक से किराए की रसीद अवश्य लें, अगर सालाना किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा का होता है तो आपको पंजीकृत पट्टा समझौते की कॉपियां और मकान मालिक का पैन कार्ड भी जमा कराना होगा।

एक ही समय में टैक्स की बचत और संपत्ति में इजाफा: कुछ टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड जैसे की ईएलएसएस फंड, ईपीएफ, पीपीएफ, एनएससी इत्यादि आयकर अधिनियम की धारा 80सी के अंतर्गत कर छूट योग्य होते हैं। इस तरह के विकल्पों में निवेशस कमाई और विमोचन(redemption) के दौरान किसी भी तरह के कर का भुगतान नहीं करना होता है, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा आयकर अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित है। इसलिए आप ऐसे विकल्पों में ज्यादा से ज्यादा निवेश कर टैक्स बचा सकते हैं।

कुछ खर्चे भी कटौती के योग्य: आपके नियोक्ता की ओर से कुछ व्यक्तिगत खर्च भत्ते भी उपलब्ध करवाए जाते हैं, जिनके जरिए आप टैक्स में छूट प्राप्त कर सकते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल होते हैं।

  • स्वास्थ्य जांच समेत मेडिकल खर्चे
  • चिकित्सा बीमा का प्रीमियम
  • एजुकेशन लोन का ब्याज
  • आवास ऋण (होम लोन) का ब्याज और मूलधन
  • जीवन बीमा प्रीमियम
  • आश्रित की स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च
  • आपको बता दें कि इन मदों में किए जाने वाले खर्चों की कटौती योग्य राशि अलग-अलग होती है।

दान देकर भी बचा सकते हैं टैक्स: धर्मार्थ कार्यों के लिए चैरिटी कर आप टैक्स की बचत कर सकते हैं। आयकर की धारा 80जी के अंतर्गत दान करने पर आपकी सकल आय में से 10 फीसदी की कटौती कर दी जाती है उसके बाद आपकी करयोग्य आय निकाली जाती है। यानी आप चैरिटी कर भी टैक्स बचा सकते हैं।

Posted By: Praveen Dwivedi

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