नई दिल्ली (नितेश तिवारी)। दिवाली के मौके पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। कुछ लोग इसे शगुन के तौर पर खरीदते हैं तो कुछ निवेश के लिहाज से। इक्विटी बाजार ने पिछले कुछ महीनों के दौरान जिस तरह से गोता लगाया है, वैसी स्थिति में निवेशकों की नजर अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प पर जाकर टिक गई है। आम तौर पर शेयर बाजार में जब अनिश्चितता की स्थिति गहराने लगती है तब निवेशक गोल्ड समेत अन्य बुलियन में निवेश का सुरक्षित रास्ता तलाशने लगते हैं।

निवेश के लिहाज से देखा जाए तो शेयर बाजार में जोखिम गहराने लगा है। इस साल सेंसेक्स अभी तक 6 फीसद से अधिक टूट चुका है। ऐसी स्थिति में निवेशकों के लिए गोल्ड क्या सुरक्षित विकल्प हो सकता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की कीमतों को लेकर आगे आउटलुक बेहतर है और आने वाले समय में इसकी कीमतों में 12 से 15 फीसद का इजाफा हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मौजूदा समय सोने में निवेश के लिहाज से बेहतर दिख रहा है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया की माने तो गोल्ड में लंबे समय के लिए निवेश करना ज्यादा अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

दिवाली के दौरान क्या करें निवेशक?

अजय केडिया ने कहा कि जिस ढंग से महंगाई बढ़ रही है ऐसे में निवेशकों को गोल्ड में निवेश करने से डबल डिजिट में रिटर्न मिलेगा। अगर कोई निवेशक कम समय के लिए इसमें निवेश करता है तो उसे नेगेटिव इम्पैक्ट दिख सकता है।

उन्होंने कहा, 'निवेशक अगर निवेश करना चाहता है तो लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करे। निवेशक कम से कम 5 साल, 10 साल, 15 साल या फिर 20 साल का टारगेट लेकर चले। फिर उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा।'

केडिया ने कहा कि गोल्ड में निवेश को लेकर रिटर्न के मोर्चे पर कुछ कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इक्विटी मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है और लोगों का रुझान भी इस और बढ़ रहा है लेकिन अगर '2000 या 2008 की तरह कोई बड़ा करेक्शन आ जाता है तो फिर गोल्ड में निवेश सबसे बेहतर साबित होगा और यह सेफ भी रहेगा।'

क्या हो निवेश का विकल्प?

तो निवेशकों को सीधे गोल्ड या फिर ईटीएफ फार्म में निवेश करना चाहिए? केडिया ने कहा, 'मैं निवेशकों को फिजिकल इन्वेस्टमेंट की सलाह नहीं दूंगा।'

ईटीएफ NSE और BSE के प्लेटफार्म पर मौजूद है। म्युचुअल फंड के जरिए भी गोल्ड में निवेश किया जा सकता है। इसलिए मेरी सलाह ईटीएफ में निवेश को लेकर होगी।

गोल्ड में निवेश का फैसला करने के बाद सबसे अहम फैसला लॉक इन पीरियड को लेकर होता है। मतलब किसी निवेशक को कितने समय के लिए गोल्ड में पैसा लगाना चाहिए?

केडिया कहते हैं कि यहां भी निवेश का वहीं फॉर्मूला काम करता है। लंबा समय। उन्होंने कहा कि अगर हम कम समय के लिए निवेश करें तो हो सकता है कि उम्मीद के मुताबिक रिटर्न न मिले या फिर स्टेबल रहे। 'लेकिन अगर हम लंबे समय के लिए सोने में निवेश करते हैं तो यह अच्छा रिटर्न देगा और यह महंगाई को मात दे सकता है। इसलिए जो निवेशक इसमें निवेश करना चाहते हैं वह कम से कम 5 साल का टारगेट लेकर चलें। फिर उन्हें सालाना 12 से 14 फीसद के हिसाब से रिटर्न मिल जाएगा।'

गोल्ड के अलावा और क्या हो विकल्प?

इक्विटी बाजार में बढ़ते जोखिम के बाद बुलियन निवेशकों के लिए ज्यादा सुरक्षित विकल्प के तौर पर सामने आता है। तो क्या निवेशकों के पास गोल्ड के अलावा किसी और धातु में पैसा लगाने का अवसर है? केडिया बताते हैं कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए गोल्ड ही ज्यादा मुफीद विकल्प है। हाल ही में सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत की है, जिसे गोल्ड में निवेश की चाह रखने वालों के लिए शानदार अवसर माना जा रहा है। केडिया ने बताया, 'यह स्कीम अच्छी है। इसमें बेहतर रिटर्न भी मिल जाएगा।'

उन्होंने कहा कि फिजिकल निवेश में कुछ निश्चित नहीं है, जबकि यह स्कीम फिक्स्ड इनकम के लिहाज से ज्यादा अच्छी मालूम पड़ती है। इसके साथ ही फिजिकल गोल्ड में निवेश का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और चालू खाता घाटा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए गोल्ड बॉन्ड ज्यादा बेहतर है।

वहीं, कमोडिटी के जानकार नवनीत दमानी का कहना है, 'पिछले कुछ महीनों में अन्य संपत्तियों की तुलना में गोल्ड का प्रदर्शन खराब रहा है लेकिन, हाल के दिनों में गोल्ड में सुधार आया है और ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में और उछाल आएगा।

Posted By: Nitesh

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