नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। हम में से ज्यादातर लोग फिक्स डिपॉजिट या पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में निवेश करते हैं। इसका मकसद हमारे धन में ग्रोथ लाना होता है। लेकिन कम रिस्क के साथ निवेश का कोई ऐसा विकल्प हमें मिले, जो इन योजनाओं से बेहतर विकल्प दे, तो कितना अच्छा हो। आज हम आपको इन्हीं विकल्पों के बारे में बताने वाले हैं। Jagran Dialogues की इसी कड़ी में जागरण न्यू मीडिया के डिप्टी एडिटर मनीश कुमार मिश्र और जागरण न्यू मीडिया के सोशल मीडिया हेड वरुण शर्मा ने एलआईसी म्युचुअल फंड के सीईओ (डेट) मर्जबान इरानी व ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के सीईओ पंकज मठपाल से 'बैंक और पोस्ट ऑफिस की योजनाएं ही नहीं, डेट म्युचुअल फंड्स भी दे सकते हैं बेहतर रिटर्न' विषय पर चर्चा की। इस बातचीत के संपादित अंश इस प्रकार हैंः

सवाल: डेट फंड क्या है?

मर्जबान इरानी: डेट फंड एक ऐसा उत्पाद है, जहां पर ब्याज दर फिक्स्ड होती है। ये उत्पाद शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए होते हैं। शॉर्ट टर्म तीन महीने से एक साल के बीच का होता है। इनमें कंपनी कमर्शियल पेपर जारी करती है, बैंक सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी करते हैं और सरकार ट्रेजरी बिल के रूप में पैसा उठाती है। वहीं, लॉन्ग टर्म के लिए कारोबार कॉर्पोरेट बॉन्ड इश्यू करते हैं, केंद्र सरकार सरकारी प्रतिभूतियां जारी करती हैं और राज्य SDL जारी करते हैं। लॉन्ग टर्म फंड 10 से 15 वर्षों के लिए होता है।

सवाल: तीन महीने के लिए कौन-सा डेट फंड एफडी से अधिक रिटर्न देता है।

पंकज मठपाल: कभी भी आप डेट फंड में पैसा लगाएं तो देख लें कि किस प्रकार कि सिक्युरिटीज हैं। ट्रिपल ए और डबल ए वाली सिक्युरिटीज में पैसा लगाएं तो बेहतर होगा। डेट फंड में 16 सब कैटेगरी होती हैं। तीन महीने के हिसाब से लिक्विड फंड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड बेहतर रहेंगे, क्योंकि यहां ब्याज दर बदलने का अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। लिक्विड फंड और ओवरनाइट फंड में जोखिम भी बहुत कम है।

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सवाल: क्या डेट फंड में निवेश भी बैंक एफडी की तरह ही सुरक्षित है।

मर्जबान इरानी: अगर आप तीन साल की एफडी लेते हैं, तो इसकी तुलना रिटर्न के आधार पर शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड, बैंकिंग पीएसयू श्रेणी या गिल्ट फंड से की जा सकती है। ये सारे फंड तीन से पांच साल की अवधि में बैंक एफडी से अधिक रिटर्न देते हैं। बता दें कि एफडी में भी एक बैंक में निवेशक की केवल पांच लाख तक की रकम ही सुरक्षित है। इससे अधिक रकम की एफडी में भी कोई गारंटी नहीं है। आप अगर पांच साल की कोई एफडी करते हो और छह महीने बाद आपको इमरजेंसी में जरूरत पड़ जाती है, तो बैंक आपसे पेनल्टी लेगा। वहीं, म्युचुअल फंड में ऐसा नहीं है। यहां आप कभी भी अपने धन की निकासी कर सकते हैं। इसके अलावा एफडी में आपका टैक्स भार भी अधिक होगा।

Edited By: Pawan Jayaswal