नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। समय पर टैक्स भरने का फायदा आपको लॉन्ग टर्म तक मिलता रहता है, बशर्ते आपको इसकी सही जानकारी हो और आप टैक्स को लेकर ईमानदार हों। वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में टैक्स भरकर आप उचित टैक्स छूट का लाभ ले सकते है, इसके लिए आपको सही निवेश की तलाश करनी होगी। हम इस खबर में आपको कुछ कॉमन टैक्स कटौती के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिनसे आप आने वाले वित्त वर्ष में भी फायदा ले सकते हैं।

होम लोन के बेसिस पर कटौती: होम लोन में अन्य लोन की तुलना में ज्यादा टैक्स बचत का फायदा मिलता है। होम लोन के मूलधन और ब्याज दोनों के रीपेमेंट पर टैक्स छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। आयकर की धारा सेक्शन 80C के तहत हर साल मूलधन के रीपेमेंट पर 1.5 लाख रुपये की राशि तक की टैक्स छूट मिलती है। यदि आपने होम लोन घर खरीदने के उदेश्य से लिया है तो ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा घर के पजेशन मिलने पर निर्भर करता है। अगर लोन सेल्फ-ऑक्यूपाइड हाउस के लिए लिया है तो इसके लिए दो लाख रुपए तक की लिमिट तय है। घर किराए पर देने की स्थिति में ब्याज पर टैक्स कटौती क्लेम के लिए कोई लिमिट नहीं है।

एक बात का ध्यान रखें कि टैक्स बेनेफिट प्रॉपर्टी के पूरे होने पर ही क्लेम किया जा सकता है। निर्माणाधीन प्रॉपर्टी या अंडर डेवेलप्मेंट प्रॉपर्टी खरीदने पर तब तक डिडक्शन की मांग नहीं की जा सकती जब तक की प्रॉपर्टी पूर्ण रूप से निर्मित नहीं हो जाती है और आपको उसका पजेशन नहीं मिलता। होम लोन की किसी भी ईएमआई देने से चूकने पर भुगतान किए गए ब्याज पर टैक्स बेनेफिट्स क्लेम किया जा सकता है। किसी भी वित्त वर्ष में यदि आप कुछ ईएमआई भरने से चूक जाते हैं तो पूरे साल के लिए उस ईएमआई पर भुगतान किए गए ब्याज पर टैक्स में छूट पा सकते हैं।

पर्सनल लोन: यदि आप घर खरीदने के लिए पर्सनल लोन लेते हैं तो टैक्स बेनेफिट के लिए क्लेम कर सकते हैं। टैक्स कानून केवल लोन के उद्देश्य और किस काम के लिए खर्च किया जा रहा उस पर गौर करता है। मसलन, जो टैक्स कानून होम लोन पर लागू होते हैं वहीं कानून पर्सनल लोन पर भी लागू होगा, जो घर खरीदने के लिए लिया जाएगा। इसमें डाउन पेमेंट की राशि शामिल होती है। होम लोन की ही तरह इसमें भी धारा 80 सी के तहत प्रिंसिपल रिपेमेंट पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं और धारा 24 बी के तहत ब्याज रिपेमेंट राशि पर। प्रमाण पत्र के रुप में इंटरेस्ट पेमेंट सर्टिफिकेट और बैंक स्टेटमेंट जरूरी होता है।

एजुकेशन लोन के आधार पर कटौती: आयकर की धारा 80ई के तहत उच्च शिक्षा के लिए अगर लोन लिया है तो ब्याज के रिपेमेंट पर टैक्स कटौती की मांग की जा सकती है। लोन स्वयं, पत्नी और बच्चों के लिए लिया जा सकता है। यह बैंक, वित्तीय संस्थान या किसी मान्यता प्राप्त चैरिटेबल संस्थान से लिया जा सकता है। एक बात का ध्यान रखें कि होम लोन या पर्सनल लोन घर खरीदने के लिए लिया है तो इस पर टैक्स कटौती की मांग की जा सकती है, मगर एजुकेशन लोन की स्थिति में प्रिंसिपल रिपेमेंट पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता है। मगर एजुकेशन लोन पर आप जो ब्याज देना होता है उसपर टैक्स बेनेफिट प्राप्त कर सकते हैं, ये टैक्स बेनेफिट लोन शुरू होने के पहले आठ वर्ष या फिर ब्याज अदायगी पूरी होने पर, जो भी दोनों में से पहले हो, उसपर दिया जाता है।

बचत एवं निवेश के आधार पर कटौती: वैकल्पिक रूप से लाइफ इंश्योरेंस पीपीएफ, एफडी, सुकन्या समृद्धि योजना, और एनएससी जैसे तरह-तरह के ऑप्शन में 1.5 लाख रुपये तक के अपने सभी निवेश पर आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत छूट के लिए क्लेम कर सकते हैं।

Posted By: Nitesh

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