नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार Investment in Gold भारतीय निवेशक पारंपरिक तौर पर Gold में Investment को लेकर बहुत आशावादी रहे हैं। लेकिन रिटर्न के हिसाब से इसमें निवेश करना बेहतर विकल्प नहीं है। गोल्ड अर्थात Gold के साथ दिक्कत यह है कि वह किसी तरह के उत्पादन में हिस्सेदारी नहीं रखता और धारकों के लिए किसी तरह की वैल्यू भी जनरेट नहीं करता। जबकि दूसरी तरह के निवेश पूंजी निर्माण करते हैं। Gold की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी पूरी तरह से इस मान्यता पर आधारित है कि जब हम इसे बेचेंगे तो कोई खरीदार इसकी अधिक कीमत देगा। लेकिन असल में हमेशा शर्तिया तौर पर ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है।

जिस तरह से फ्लाइट अटेंडेंट विमान की उड़ान से पहले यात्रियों को जरूरी सावधानियों से अवगत कराते हैं, उसी तरह निवेश सलाहकारों को भी चाहिए कि वे समय-समय पर निवेशकों को दो सेक्टर में निवेश से संबंधित जरूरी सुरक्षा उपाय बताते रहें। इसमें एक सेक्टर है सोना और दूसरा रियल एस्टेट। खैर, पिछले कुछ वर्षो के दौरान रियल एस्टेट में निवेश की हालत तो ऐसी रही है, जैसे आप किसी बिना पेंदी के बर्तन में अपनी गाढ़ी कमाई डाल रहे हों। दूसरी ओर सोने में निवेश से कुछ लाभ जरूर मिला है, क्योंकि सोने की कीमत में इजाफा होता रहा है।इस वर्ष की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब 20 परसेंट का उछाल दर्ज किया गया है। दूसरी ओर अन्य तरह के निवेश में खासी अस्थिरता रही है। यह बात कुछ निवेशकों को उत्साहित कर सकती है।

अगर सोने में निवेश की बात करें तो इस समय पिछले 10 वर्षो में किए गएनिवेश का रिटर्न 8.3 परसेंट ही रहा है। ऐसे में दूसरे निवेश पूरी तरह से नकारे नहीं जा सकते। सोने में निवेश करने या नहीं करने का सवाल सिर्फ रिटर्न से जुड़ा नहीं है, बल्कि यहां सवाल यह भी बनता है कि यह रिटर्न आता कहां से है?जहां तक भारतीय निवेशकों का सवाल है, वे सोने में निवेश के पारंपरिक विचारों से जकड़े हुए हैं। इन विचारों के मुताबिक सोने में निवेश आसान, सुरक्षित और बुरे समय में साथ देने वाला है। हमारे यहां पुरानी मान्यता यह है कि हर परिवार को सोने में निवेश करना चाहिए।

आधुनिक मान्यता कहती है कि सोने में निवेश किसी दूसरी कमोडिटी में निवेश के जैसा ही है। जबकि मेरा मानना है कि सोने में निवेश पूरी तरह से अलग मामला है। सोने के कुछ अलग गुणों के चलते बचत करने वाले इसे निवेश के रूप में चुन सकते हैं। लेकिन निवेश के लिए यह बेहतर विकल्प नहीं है। आपकी बचत के लिए इससे अच्छे निवेश विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। दूसरे निवेशों की तरह इसमें निवेश करने से पहले रिटर्न, लिक्विडिटी, स्थायित्व और अन्य संबंधित बातों को ध्यान में रखने की जरूरत होती है।

अगर इन सब बातों पर गौर किया जाए तो निश्चित तौर पर सोना निवेश के लिए अच्छा साबित नहीं होगा। इतने ही जोखिम और उतार-चढ़ाव वाले दूसरे निवेशों के मुकाबले सोने से मिलने वाला रिटर्न सबसे खराब हो सकता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि सोना सीधे तौर पर किसी तरह के उत्पादन में हिस्सा नहीं लेता और न ही यह किसी तरह की वैल्यू जनरेट करता है। इस तरह से सोने में किया गया निवेश की इकोनॉमिक ग्रोथ में किसी तरह की हिस्सेदारी नहीं है। इसकी कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी पूरी तरह से इस मान्यता पर आधारित है कि जब हम इसे बेचेंगे तो कोई खरीदार इसकी अधिक कीमत देगा। इसके विपरीत इक्विटी, बांड या बैंक डिपॉजिट्स उत्पादन में सीधी भूमिका निभाते हैं।

सोने के बजाय आप यही बचत कहीं और निवेश करते हैं, तो वह उत्पादन गतिविधियों में उसका इस्तेमाल होता है, जिससे पूंजी निर्माण होता है। भौतिक रुप में रखे गए सोने की मात्रा या गुणवत्ता में कोई इजाफा नहीं होता है।मेरे कहने का यह मतलब कतई नहीं है कि मैं किसी निवेशक को सोने में निवेश करने से रोक रहा हूं। हां, सावधान जरूर कर रहा हूं। वैसे भी, जो यह लेख पढ़ रहे हैं उनकी पहुंच आधुनिक फाइनेंशियल सिस्टम तक है। वे जानते हैं कि सोने में पैसा लगाने का कोई विशेष मतलब नहीं है। यह सिर्फ उनके लिए महत्व रखता है, जो या तो फाइनेंशियल सिस्टम में भरोसा नहीं रखते या इस तक उनकी पहुंच नहीं है। आमतौर पर सोना करेंसी का विकल्प कहा जा सकता है। अगर आप भौतिक सोने की जगह पेपर गोल्ड में निवेश करें तो बेहतर है। सोने पर आधारित म्युचुअल फंड सोने की कीमत पर नजदीकी नजर रखते हैं। यह ओपन-एंडेड फंड होते हैं और किसी भी समय भुनाए जा सकते हैं।

अगर आप लंबे समय तक निवेश करने की क्षमता रखते हैं तो आपके लिए भारत सरकार द्वारा जारी गोल्ड बांड सही विकल्प साबित हो सकते हैं। यह समय-समय पर जारी होते रहते हैं और बैंकों द्वारा बेचे जाते हैं। इनकी कीमत में सोने की कीमत के साथ ही इजाफा होता है, साथ ही इन पर 2.5 परसेंट सालाना का ब्याज अलग से मिलता है। इस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होता है, लेकिन कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता।हालांकि ज्यादातर लोग इस बात पर भरोसा नहीं करेंगे कि सोना निवेश के लिए बेहतर विकल्प नहीं है। इसके पीछे वाजिब कारण हैं, जैसे सोना एक स्थाई धन है, यह एक ऐसी करेंसी है जिसने हर तरह के संकट में धारक का बचाव किया है। लेकिन क्या इतने भर से आधुनिक फाइनेंशियल सिस्टम में सोने में निवेश करना ठीक है? मेरे हिसाब से इसका जवाब है - नहीं।

(धीरेंद्र कुमार वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं)  

Posted By: Nitesh

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