नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। नेशनल सेविंग्‍स सर्टिफिकेट (NSC) टैक्स सेविंग्‍स निवेश के लिहाज से अच्छा विकल्प माना जाता है। भारत में बहुत से लोग निवेश के साथ-साथ टैक्स सेविंग्‍स को देखते हुए एनएससी में निवेश करते हैं। कोई भी व्यक्ति नेशनल सेविंग्‍स स्कीम में निवेश कर आयकर की धारा 80सी के तहत इनकम टैक्स में छूट के लिए दावा कर सकता है। नेशनल सेविंग्‍स स्कीम दो प्रकार की होती है- 1. NSC issue VIII 2. NSC issue IX

NSC issue VIII की मैच्योरिटी 5 साल की होती है जबकि NSC issue IX की मैच्योरिटी 10 साल की होती है। एनएससी पर जो ब्याज मिलता है वह वार्षिक स्तर पर तय होता है, लेकिन मैच्योरिटी पूरी होने पर मिलता है। अगर आप एनएससी सर्टिफिकेट को ट्रांसफर करना चाहते हैं तो इसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम पर सिर्फ इसके कार्यकाल के दौरान ही ट्रांसफर किया जा सकता है। आइए जानते हैं एनएससी ट्रांसफर करने की पूरी प्रक्रिया।

एनएससी ट्रांसफर करने के नियम:

  • नेशनल सेविंग्‍स सर्टिफिकेट जारी होने के एक साल बाद एक व्यक्ति के नाम से दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर किया जा सकता है।
  • नेशनल सेविंग्‍स सर्टिफिकेट ट्रांसफर करने के लिए फॉर्म एनसी 34 की जरूरत होगी। फॉर्म एनसी 34 में जिसके व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करना है उसका नाम, ट्रांसफर करने वाले का नाम, सर्टिफिकेट का सीरियल नंबर, डीनॉमिनेशन ऑफ सर्टिफिकेट, जारी करने की तारीख और एनएससी होल्डर के हस्ताक्षर की आवश्यकता है।
  • जिसके व्यक्ति के नाम पर एनएससी ट्रांसफर की जा रही है उसके केवाईसी दस्तावेज जैसे फोटो, एड्रेस प्रूफ, वेलिड आइडेंटिटी प्रूफ और साथ में हस्ताक्षर किया हुआ घोषणा पत्र चाहिए।
  • एनएससी ट्रांसफर की सफल प्रक्रिया के बाद पुराने सर्टिफिकेट पर नए होल्डर का नाम लिखा जाएगा। क्योंकि पुराने सर्टिफिकेट को खत्म नहीं किया जाता है और पुराने अकाउंट होल्डर का नाम राउंडेड कर दिया जाता है।
  • उसके बाद पुराने सर्टिफिकेट पर पोस्टमास्टर के साथ डाकघर के अधिकृत व्यक्ति के जरिए हस्ताक्षर किए जाते हैं। इसके अलावा पोस्ट ऑफिस सर्टिफिकेट के ट्रांसफर के लिए चार्ज ले सकता है।

1: नाबालिगों के मामले में उनके अभिभावक की तरफ से फॉर्म पर साइन करने की जरूरत होती है।

2: एनएससी ट्रांसफर में अमाउंट को अलग-अलग पार्ट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है बल्कि सारा अमाउंट एक साथ ट्रांसफर किया जा सकता है।

3: एनएससी को मैच्योरिटी से पहले किसी रिश्तेदार के नाम पर ट्रांसफर किया जा सकता है। अगर पॉलिसी होल्डर की मृत्यु हो जाती है तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी के नाम पर ट्रांसफर किया जाता है। अगर ज्वाइंट पॉलिसी में किसी एक की मृत्यु हो जाती है तो दूसरे होल्डर के नाम पर पॉलिसी ट्रांसफर हो जाती है और कोर्ट के आदेशों पर भी पॉलिसी ट्रांसफर होती है।

4: जिस व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर किया जा रहा है उसके नाम पर ट्रांसफर होने से पहले उसे सर्टिफिकेट को खरीदने योग्य होना चाहिए।

5: NSC issue VIII और NSC issue IX के लिए अलग-अलग एप्लिकेशन फॉर्म की जरूरत है। 

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