नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) देश में निवेश के लिहाज से सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। खासकर के नौकरीपेशा लोगों के लिए यह पसंदीदा विकल्प होता है। लोगों के बीच इसके पापुलर होने का कारण इस पर लगातार बढ़ती ब्याज दर और टैक्स फ्री रिटर्न है। साल 2018 में इस पर 7.6 फीसद की दर से ब्याज दिया जा रहा है जो कि बाजार में उपलब्ध अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में काफी ज्यादा है।

जैसा कि यह एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट कैटेगरी में आता है लिहाजा इसमें निवेश पर आपको कोई कर नहीं देना होता है। हालांकि पीपीएफ से जुड़े ऐसे काफी सारे नियम होते हैं जिनसे निवेशक आमतौर पर अनजान होते हैं। हम अपनी इस खबर में आपको इन्हीं नियमों की जानकारी दे रहे हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि आप कुछ निश्चित स्थितियों में अपने खाते को मैच्योरिटी से पहले बंद भी करवा सकते हैं।

अधिकतम और न्यूनतम योगदान: पीपीएफ के नियमों के मुताबिक इस विकल्प में सालाना न्यूनतम निवेश की सीमा 500 रुपये है। वहीं इसकी अधिकतम सीमा 1.5 लाख तक जाती है। यह देश की सबसे सस्ती फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम है। ध्यान रहे सालाना आधार पर आप इसमें 1.5 लाख से ज्यादा का निवेश नहीं कर सकते हैं। आप इस स्कीम में सालाना आधार पर पूरे टेन्योर के दौरान 16 बार योगदान कर सकते हैं।

मैच्योरिटी अवधि का निर्धारण: अधिकांश निवेशक पीपीएफ की मैच्योरिटी डेट को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं। जैसा कि ये 15 साल के लॉक इन पीरियड के लिए किया जाने वाला निवेश होता है, लिहाजा इसकी मैच्योरिटी डेट की गणना खाता खुलवाने वाले वर्ष या महीने से नहीं की जा सकती है। पीपीएफ के नियमों के मुताबिक उस वित्त वर्ष के आखिर में तय होती है जिसमें शुरुआती निवेश किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने 18 मार्च 2012 को अपना पीपीएफ अकाउंट खुलवाया है तो आपकी मैच्योरिटी अवधि 1 अप्रैल 2028 होगी। यहां पर मैच्योरिटी की अवधि 31 मार्च 2013 से गिनी जाएगी।

टेन्योर के दौरान लोन एवं आंशिक निकासी की सुविधा: जैसा कि पीपीएफ अकाउंट 15 साल के लॉक इन पीरियड के साथ आता है। लेकिन फिर भी यह फंड से आंशिक निकासी की सुविधा देता है। हालांकि यहां पर यह बात ध्यान रहे कि लोन की उपलब्धता और निकासी कुछ शर्तों पर टिकी होती है, जैसा कि पीपीएफ बैलेंस और आपके खाते ने कितने साल पूरे कर लिए हैं इत्यादि।

पीपीएफ ओनरशिप: निवेशक इस बात को लेकर भी कन्फ्यूज रहते हैं कि पीपीएफ खाते की ओनरशिप कैसे निर्धारित होती है। यहां ध्यान रहे कि कि बच्चे के नाबालिग होने की स्थिति में उसके अभिभावक/पिता इसे उसके नाम पर खुलवा सकते हैं और यहां पर उस खाते की ओनरशिप दो लोगों के पास होगी। ध्यान रहे कि दादा या दादी को अभिभावक नहीं माना जा सकता है और वो बच्चे के नाम पर खाता नहीं खुलवा सकते हैं। हालांक बच्चे के माता एवं पिता दोनों की मौत की स्थिति में ऐसा किया जा सकता है।

टैक्सेशन (कराधान): जैसा कि पीपीएफ अकाउंट एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट कैटेगरी में आता है, लिहाजा इसमें लॉक इन पीरियड से पहले की जाने वाली कोई भी निकासी कर के दायरे से बाहर होती है। हालांकि आईटीआर फाइलिंग के दौरान आपको इसका उल्लेख करना होता है कि आपने पीपीएफ खाते से निकासी की है।

Posted By: Praveen Dwivedi