नई दिल्ली (जेएनएन)। इस दशहरे आपको रावण जलाने के साथ ही अपनी कुछ खराब वित्तीय आदतें छोड़ने के बारे में भी सोचना चाहिए। ये कुछ ऐसी आदतें हो सकती हैं जो आपको कभी न कभी नुकसान ही पहुंचाती हैं। ऐसे में यह बेहतर होगा कि आप उन्हें जल्द से जल्द छोड़ दें। हम अपनी इस रिपोर्ट के माध्यम से आपको बताने की कोशिश करेंगे कि आप किन किन खराब वित्तीय आदतों को इस दशहरे से छोड़ सकते हैं।

जानिए ऐसी 10 वित्तीय आदतों के बारे में जिन्हें आपको तुरंत प्रभाव से छोड़ देना चाहिए

छोटी उम्र में बचत शुरू न करना:
भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से जीवन में बचत और निवेश बेहद जरूरी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जैसे ही आप कमाना शुरू करते हैं उसी समय से बचत शुरू कर देनी चाहिए। साथ छोटी उम्र में बचत और निवेश ज्यादा मुश्किल नहीं होता है क्योंकि इस दौरान आपके ऊपर जीवन की जिम्मेदारियां कम होती हैं।

अपनी आय से ज्यादा खर्च करना:
आमतौर पर लोगों में अपनी आय से ज्यादा खर्च करने की आदत होती है। अपने खर्चों पर लगाम न लगा पाने के कारण उन्हें एक दिन क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना पड़ जाता है जिसकी देयता वो ईएमआई से चुकाने लग जाते हैं।

बजट न बनाना
अपने खर्चों की आदतों को मॉनिटर करने के लिए एक तय बजट जरूर होना चाहिए, जबकि आमतौर पर लोग ऐसा नहीं करते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो बजट बनाने के दौरान तय कर सकते हैं कि कहां ज्यादा और फिजूल खर्च किया जा रहा है। कोशिश करें कि अपनी आय के साथ बजट जरूर बनाएं।

इमरजेंसी फंड का अभाव
बढ़ती महंगाई के साथ हमारी अन्य जरूरतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में बीमारी, नौकरी छूटने या अन्य वजह से अचानक सामने आने वाले बड़े खर्चों से हमारा सारा बजट खराब हो जाता है। ऐसी ही समस्याओं से निपटने के लिए इमरजेंसी फंड का होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन लोग इस पर ध्यान कम ही देते हैं।

क्रेडिट स्कोर को नजर अंदाज करना:
क्रेडिट स्कोर तीन अंको की एक संख्या होती है, जो कि 300 से 900 के बीच होती है। क्रेडिट स्कोर जितना अधिक होता है, उसे उतना ही बेहतर माना जाता है। एक डिफॉल्ट करने पर भी क्रेडिट स्कोर कमजोर हो सकता है और आपको लोन लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

हेल्थ इंश्योसरेंस न करवाना:
किसी भी अनिश्चितता से सुरक्षा के लिए अपने और परिवार के लिए एक हेल्थ इंश्योररेंस पॉलिसी होना बहुत जरूरी है। हेल्थ पॉलिसी की मदद से अस्पताल और इलाज के खर्च से बच जाते हैं। कैशलैस प्लान की स्थिति में इलाज के दौरान कोई भी धन राशि देने की जरूरत नहीं होती। इस पर भी लोग आमतौर पर ध्यान नहीं देते हैं।

बिना जानकारी के निवेश करना:
90 फीसदी निवेशक ऐसे होते हैं जिन्हें खरीदे गए प्रोडक्ट के बारे कोई जानकारी नहीं होती है। लोग टैक्स बचाने के लिए निवेश तो कर देते हैं, लेकिन उसके बारे में सारी जानकारी प्राप्त नहीं करते। यह निवेश का एक गलत तरीका है इससे बचने की कोशिश करें।

जीवन बीमा पॉलिसी न खरीदना:
जीवन बीमा जरूरी होता है। परिवार में मुश्किल समय कभी आ सकता है। इसके लिए हम अगर पहले से तैयार रहें तो बेहतर है। जीवन बीमा मुश्किल वक्त में परिवार की आर्थिक संकट से रक्षा करता है। इस पर भी लोगों का ध्यान कम ही जाता है।

रिटायरमेंट के लिए कोई प्लानिंग न करना:
करियर के दौरान लोग अक्सर अपने बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के बारे में नहीं सोचते हैं। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद उन्हें आर्थिक संकट के जूझना पड़ता है। बेहतर होगा कि आप अपने करियर के दौरान ही खास प्लानिंग कर अपने बुढ़ापे को वित्तीय रूप से मजबूत बना लें।

जीवन की शुरुआत में कर्ज ले लेना:
अपनी पहली नौकरी की शुरुआत में ही लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना शुरु कर देते हैं। इससे धीरे-धीरे इसमें देय राशि बढ़ती चली जाती है। इसके बाद फिर लोग मिनिमम अमाउंट का भुगतान करना शुरु करते हैं। जीवन में जल्दी निवेश की शुरुआत करने वाले लोग भी अक्सर अपने खर्चों पर ध्यान नहीं देते।

फाइनेंशियल प्लानर पूनम रुंगटा का कहना है कि लाइफ इंश्योरेंस को निवेश की गिनती में न रखें। निवेश आपके धन को बढ़ाने के लिए होता है ताकि आपके जीवन के आर्थिक लक्ष्य पूरे हो सकें। बीमा एक रिस्क कवर है। आपका निवेश पोर्टफोलियो बैलेंस्ड होना चाहिए। उसमें डेट और इक्विटी दोनों का होना जरूरी है। साथ ही हमेशा अपने जोखिम लेने की क्षमता और उम्र के अनुसार इसका चयन करें। उन्होंने यह भी कहा कि हमेशा बचत करने के बाद खर्च करना चाहिए। अपनी आय का कम से कम 20 फीसद हिस्सा निवेश करना ही चाहिए।

क्या करें क्या न करें:
ई-मुंशी (emunshe. Com) के टैक्स एक्सपर्ट और चार्टेड अकाउंटेंट अंकित गुप्ता बताते हैं कि ऐसी छोटी सेविंग स्कीम का चयन करना चाहिए जो कि आपको टैक्स बेनिफिट दें जैसे कि एलआईसी, म्युचुअल फंड, पोस्ट ऑफिस टर्म डिपॉजिट, एलिजबिल फिक्स्ड डिपॉजिट इत्यादि। उन्होंने कहा कि इस बार से आप निश्चित करें कि अनुपालन में देरी नहीं करेंगे। आप अनुपालन समय से करें ताकि किसी भी जुर्माने से बच पाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार आप जीएसटी का फायदा उठा सकते हैं। आप जीएसटी नंबर ले लें और इनपुट क्रेडिट का फायदा उठाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आप अगर इंश्योरेंस ले रहे हैं तो सोच समझकर लें अगर आप लाइफ सेविंग इक्युपमेंट के लिहाज से इंश्योरेंस ले रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसका बेसिक रेट ऑफ इंटरेस्ट कम हो और वहीं अगर आप निवेश के लिहाज से इंश्योरेंस ले रहे हैं तो देखें आपको मिलने वाले ब्याज की दर ज्यादा हो।

Posted By: Surbhi Jain

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