नई दिल्‍ली, बिजनेस डेस्‍क। सरकारी बाबुओं के लिए जरूरी खबर है। अगर आपने किसी प्रॉपर्टी में निवेश किया है और उसकी जानकारी अपने डिपार्टमेंट को नहीं दी है तो आप पर कार्रवाई हो सकती है। सरकारी आदेश के मुताबिक ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिसमें कर्मचारी ने अपने दफ्तर को प्रॉपर्टी में निवेश से पहले बताया नहीं। उन्‍होंने बिना मंजूरी के प्रॉपर्टी खरीद या बुक भी करा ली है। यह Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964 के नियम (18) के अनुसार गलत है।

सरकारी आदेश के मुताबिक Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964 के नियम (18) के अनुसार, सभी केंद्रीय कर्मचारियों को चल/अचल संपत्ति से संबंधित डील (transactions related to movable/immovable Property) को अपने दफ्तर में बतानी होती है और पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य है। इस मामले में मुख्य कार्यालय द्वारा यह पाया गया है कि इस नियम का सभी अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है। कई मामलों में प्रॉपर्टी डील की ना पूर्व में सूचना गई है और ना ही पूर्व मंजूरी ली गई है।

कुछ कर्मचारियों ने डील की सूचना/मंजूरी के लिए जो आवेदन दिए हैं, उनमें भी कई खामियां मिली हैं। इससे विभाग का समय बेकार में खराब हो रहा है। इससे संपत्ति नोटिंग का काम तय समय-सीमा में पूरा नहीं हो पाता है। सरकार की ओर से अब कोई कर्मचारी गड़बड़ी न करे, इसके लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

ये हैं दिशा निर्देश

AG ऑफिस ब्रदरहुड के पूर्व अध्‍यक्ष एचएस तिवारी ने Jagran.com को बताया कि WATER Transaction की सूचना या मंजूरी के लिए दिए जाने वाले आवेदन, नियमानुसार तय फॉर्मेट में होने चाहिए। अचल संपत्ति के लिए फॉर्म सं.1 और चल सम्पति के लिए फॉर्म सं.2 दी गई है।

अचल संपत्ति (Immovable property) के संबंध में, जब अधिकारी को किसी ऐसे व्यक्ति से डील करना है जो कि उनसे किसी प्रकार के आधिकारिक व्यवहार (Official dealing) में हैं, तब डील करने वाले अधिकारी को इसकी पूर्व में सूचना देना अथवा उनसे मंजूरी लेना अनिवार्य है।

भूखंड/फ्लैट आदि कि बुकिंग करना भी, C.C.S. (Conduct Rules), 1964 के नियम (18) के अनुसार एक प्रकार की डील या ट्रांजैक्‍शन ही है, अत: इसकी भी अधिकारी द्वारा पूर्व में ही मंजूरी ली जानी है/सूचना दी जानी है।

चल संपत्ति (movable property) के संबंध में, ट्रांजैक्‍शन पूरा होने की तारीख के एक माह के भीतर ही अधिकारी/कर्मचारी द्वारा उसकी सूचना दी जानी है जबकि, अगर ऐसा सौदा किसी आधिकारिक संबंध (Official dealing) रखने वाले व्यक्ति से हो रहा है तब उसकी कार्यालय में पूर्व सूचना देना / मंजूरी लेना अनिवार्य है।

अधिकारी/कर्मचारी द्वारा ट्रांजैक्‍शन में खर्च होने वाली रकम के स्रोत का स्‍पष्‍ट ब्यौरा देना अनिवार्य है।

फंडिंग सोर्स

फंडिंग सोर्स में निम्न दस्तावेज़ों को प्रस्तुत किया जा सकता है:

बैंक लोन के संबंध में : बैंक लोन के Sanction Letter की फोटो कॉपी, जिसमें लोन की रकम और उसे वापस चुकाने के निबन्धन (terms of repayment) स्पष्‍टत: छपे हों।

रिश्तेदार से कर्ज के संबंध में : रिश्तेदार द्वारा लोन के संबंध में प्राप्त सहमति पत्र जिसमें यह स्पष्ट हो कि कर्ज ब्याज सहित है या ब्याज मुक्त और उसमें Loan को चुकाने के निबन्धन व रिश्तेदार (जिस से ऋण लिया गया है) की कमाई का स्रोत भी स्पष्ट होने चाहिए।

Spouce/परिवार के सदस्य का योगदान: योगदानकर्ता के रोजगार अगर आवश्यक सूचनाओं का पूर्ण ब्यौरा।

दूसरे स्रोत से फंडिंग का ब्यौरा:

किसी भी स्थिति में गृह निर्माण हेतु GPF में से दूसरी बार पैसा निकलवाना permissible नहीं है। इसी क्रम में आवेदक (कर्मचारी/अधिकारी) द्वारा एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है, जिसमें कि 677 को धन का एक स्रोत दर्शाया गया हो एवं यह भी स्पष्ट किया गया हो कि उन्होनें पूर्व में कभी भी मकान-निर्माण (प्लॉट या बने-बनाए फ्लैट की खरीद आदि) के लिए GPF withdrawal सुविधा का उपयोग नहीं किया है। आवेदक के द्वारा प्रमाण पत्र में दिये गए तथ्‍य को संबंधित अधिकारी द्वारा उनके रिकॉर्ड जांच के उपरांत ही सत्यापित कर मंजूर करना है।

अगर किसी अधिकारी/कर्मचारी के spouse या घर के किसी अन्य सदस्य द्वारा उनकी निजी रकम (जिसमें उपहार, विरासत आदि शामिल हैं) में से कोई लेन-देन किया जाता है, जिस पर की खुद अधिकारी/कर्मचारी का कोई अधिकार ना हो और न ही जो अधिकारी/कर्मचारी की निधि से किया गया हो तो ऐसा ट्रांजैक्‍शन CCS Conduct Rule 18 (2) और (3) के प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आएगा।

अगर कोई अधिकारी/कर्मचारी अपनी किसी अचल या चल संपत्ति (जो कि निर्धारित मौद्रिक सीमा से अधिक हो) को अपने घर के किसी अन्य सदस्य के नाम पर ट्रांसफर करता है तो उनके द्वारा Rule 18 (2) & (3) के प्रावधानों के अनुसार सक्षम अधिकारी को ऐसे संव्यवहार की सूचना देना या उनसे इसकी पूर्व में मंजूरी लेना अनिवार्य है।

वाहनों की खरीद आदि के संबंध में Registration Certificate, HR invoice और invoice की फोटोकॉपी लगाना अनिवार्य है।

Edited By: Ashish Deep