नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। कोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन से अब भी कई सेक्टर उबर नहीं पाए हैं। जिसके चलते इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी/उद्यमी अभी भी नकदी की समस्या से जूझ रहे हैं। आमतौर पर लोग ऐसी स्थिति में अपनी बचत/निवेश को उधार या नकद करने का सहारा लेते हैं। लेकिन बाजार के खराब हालत को देखते हुए बैंक पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं और बहुत चुनिंदा तौर पर लोन दे रहे हैं। इन हालातों में उन्हें ज्यादा मुश्किल हो गया है जिनकी नौकरी चली गई है या नौकरी नहीं है।

हालांकि, वित्तीय योजनाकारों की सलाह है कि इस महामारी के दौरान अतिरिक्त बोझ लेने के बजाये आप अपने निवेश को अलग करें, क्योंकि यदि मौजूदा समय में स्थिति में सुधार नहीं होता है तो आप अपने क्रेडिट प्रोफाइल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन आपको निवेश को लेकर भी जल्दबाजी नहीं दिखानी है। अगर आप नकदी की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपके पास कुछ विकल्प हैं जिनसे आपको नकदी की कमी से राहत मिलेगी। जानिए, ऐसे ही कुछ फंड्स के बारे में

लिक्विड फंड्स: अगर आपके पास किसी भी लिक्विड फंड्स में निवेश है तो पहले उसे लिक्विडेट कर देना चाहिए क्योंकि इन्हें बेचना आसान होता है। अगर आप निवेश के तीन साल के भीतर नकद फंड बेचते हैं तो आपकी आय में लाभ जुड़ जाता है और आपके स्लैब के अनुसार कर लगाया जाता है। अगर आप उन्हें तीन साल के बाद बेचते हैं, तो 20% की दर से कर लगता है।

बैंक एफडी: यदि आप अपने बैंक एफडी को तोड़ते हैं तो कम नुकसान होगा। बैंक एफडी पर प्रीक्लोजर चार्ज के रूप में बैंक 1% तक का शुल्क लेते हैं। इसके साथ ही आपको उस अवधि के लिए ब्याज दर मिलती है जिसके लिए आपने अपना पैसा बैंक में जमा किया था। आपके पास अपने एफडी के बदले लोन लेने का विकल्प है, यदि आपको लगता है कि आपके कैश फ्लो में जल्द ही सुधार होगा। 

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कंपनी डिपॉजिट: लिक्विड फंड्स और बैंक डिपॉजिट के बाद यह तीसरा विकल्प है। ये डिपॉजिट बैंक डिपॉजिट के मुकाबले जोखिम भरे होते हैं। कंपनी एफडी के मामले में बैंक एफडी की तुलना में समय से पहले जुर्माना अधिक है।

डेट फंड/इक्विटी फंड: ये दोनों भी नकदी के लिए विकल्प हैं। चूंकि इन दोनों विकल्पों के रिटर्न बाजार से जुड़े हुए हैं इसलिए आपको इन निवेशों को नकदी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि आप अपने निवेश में भारी नुकसान उठा रहे हैं तो बेहतर है कि आप इन फंडों को न बेचें।

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