नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। आज के समय का युवा पैसों से जुड़ी चीजों को खुद ही सुलझाने की कोशिश करता है। फिर वो चाहे बात टैक्स सेविंग की हो या बैंकिंग की। कई बार टैक्स सेविंग के लिए लोग अंतिम समय का इंतजार करते हैं और फिर निवेश में गलती कर जाते हैं। इसलिए टैक्स बचत के लिए सही निवेश विकल्प का चुनाव करें। हम इस खबर में कुछ ऐसे कॉमन मिस्टेक के बारे में बता रहे हैं जिसे टैक्सपेयर अक्सर कर जाता है। जानिए वो कॉमन मिस्टेक और इनसे बचिए।

गैर जरूरी इंश्योरेंस पॉलिसी

टैक्स बचत की चाह रखने वाले कई बार टैक्स सेविंग के लिए गैरजरूरी इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लेते हैं। केवल टैक्स बचाने के लिए खरीदारी न करें, सोचिये कि क्या निवेश वास्तव में लंबे समय के लिए आपके उपयोग का है। अन्यथा, आप पैसा खर्च कर रहे हैं, निवेश या कुछ उपयोगी नहीं खरीद रहे हैं।

टैक्स-सेविंग के लिए आखिरी मिनट तक इंतजार करना: टैक्स सेविंग स्कीम के लिए ELSS जैसे म्युचुअल फंड्स में निवेश के लिए आखिरी मिनट का इंतजार न करें। एफडी और पीपीएफ के लिए भी वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अपने रेकरिंग डेबिट सेट करना बेहतर है। यह पूरे साल चलने वाली प्रक्रिया है और अगर आप आखिरी मिनट तक इंतजार करेंगे तो इससे जल्दबाजी में गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ सकती है। अधिकतर कर बचत निवेश लंबी अवधि के होते हैं इसलिए इस स्थिति में गुमराह होना या एजेंटों के चक्कर में नहीं फंसना चाहिए।

टैक्स सेविंग को देखते हुए निवेश: टैक्स सेविंग को कभी भी निवेश के फायदों से बढ़कर न देखने से नुकसान होता है। इसलिए अपनी आवश्यकताओं के आधार पर अपने जोखिम लक्ष्यों और कार्यकाल का आकलन करें और फिर निवेश उत्पाद को चुनें और उसमें एक अतिरिक्त लाभ के रूप में कर बचत का विकल्प का चयन करें।

धारा 80-ई के तहत दावा न करना: धारा 80-ई के तहत एजुकेशन लोन पर ब्याज भुगतान में कटौती की जा सकती है। अगर आप इस कर्ज के भुगतान में देरी कर रहे हैं तो आप अपने ब्याज के बोझ को बढ़ाने के अलावा आयकर से राहत में भी देरी कर रहे हैं। समय पर भुगतान से बकाया राशि कम होगी और क्रेडिट स्कोर में भी सुधार होगा। 

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