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रियल एस्टेट में सिर्फ ₹500 से करें निवेश! FD, SIP और लमसम से कितना अलग होता है REIT? एक्सपर्ट से 6 सवालों में समझें

Published: Wed, 07 Oct 2026 02:53 PM (IST)Updated: Wed, 07 Oct 2026 03:33 PM (IST)

What is REIT: यह लेख रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) में निवेश के बारे में बताता है, जहां आप कम ...और पढ़ें

रियल एस्टेट में सिर्फ ₹500 से करें निवेश! FD, SIP और लमसम से कितना अलग होता है REIT? एक्सपर्ट से 6 सवालों में समझें

रियल एस्टेट में सिर्फ ₹500 से करें निवेश! FD, SIP और लमसम से कितना अलग होता है REIT? एक्सपर्ट से 6 सवालों में समझें 

HighLights

  1. रीट में ₹500 से निवेश की शुरुआत संभव है।

  2. FD से बेहतर रिटर्न और टैक्स बचत का मौका।

  3. रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए नियमित आय का स्रोत।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| क्या आप जानते हैं कि बिना लाखों रुपए इन्वेस्ट किए भी आप देश की सबसे बड़ी कमर्शियल बिल्डिंग्स और मॉल के हिस्सेदार बन सकते हैं? दरअसल, अभी तक पारंपरिक रूप से रियल एस्टेट में निवेश करने का मतलब था- मोटी रकम लगाना, किराएदारों के नखरे उठाना और झंझटों में उलझना। लेकिन अब रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) ने इस खेल को पूरी तरह बदल दिया है।

पहली बार निवेश करने वालों से लेकर रिटायरमेंट की योजना बना रहे लोगों तक, यह नया वित्तीय साधन (Financial instruments) छोटे बजट में भी शानदार कमाई के रास्ते खोल रहा है। फिक्स डिपॉजिट यानी एफडी और फ्लैट खरीदने की पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए, रीट् किस तरह आपको बिना किसी झंझट के नियमित तिमाही कमाई और शानदार टैक्स बचत का मौका दे रहा है?

ऐसे ही तमाम बातों को समझने के लिए जागरण बिजनेस ने एंबेसी ऑफिस पार्क्स रीट के सीएफओ और इंडियन रीट एसोसिएशन के एग्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर अभिषेक अग्रवाल से खास बातचीत की। जिसमें उन्होने सिर्फ 6 पॉइंट्स में रीट्स को आसान भाषा में समझाया।

सवाल 1: क्या पहली बार निवेश करने वाले लोग REIT में छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं?

जवाब: हां, बिल्कुल। REIT का एक बड़ा फायदा इसकी आसान पहुंच है। कोई भी नया निवेशक अपने डीमैट अकाउंट के जरिए बहुत ही मामूली रकम से इसमें निवेश की शुरुआत कर सकता है, क्योंकि इसमें आप केवल एक यूनिट भी खरीद सकते हैं।

भारत के 6 लिस्टेड REIT की यूनिट कीमतें 100 रुपए से 500 रुपए के बीच हैं। अगर आप रेंटल इनकम के लिए फ्लैट या कोई दुकान खरीदते हैं, तो आपको प्रॉपर्टी मैनेजमेंट की बड़ी झंझटों, बिचौलियों से तालमेल, टेनेंट मैनेजमेंट, सोसाइटी चार्ज, कानूनी प्रक्रियाओं, सीमित लिक्विडिटी, खाली रहने का जोखिम, कम रिटर्न और हाई ट्रांजैक्शन कॉस्ट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, फ्लैट या दुकान बेचकर तुरंत पैसे निकालना बहुत ही मुश्किल होता है। इसके विपरीत, REIT आपको ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस और प्रीमियम शॉपिंग सेंटर जैसे उच्च गुणवत्ता वाले कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश करने का मौका देते हैं। इन्हें पेशेवर तरीके से मैनेज किया जाता है, ये बेहतरीन लिक्विडिटी प्रदान करते हैं और आपको नियमित त्रैमासिक (quarterly) डिस्ट्रीब्यूशन के साथ कैपिटल अप्रिसिएशन का लाभ भी मिलता है।"

सवाल 2: भारत में REIT पर टैक्स कैसे लगता है?

जवाबः भारतीय REIT एक पास-थ्रू टैक्सेशन फ्रेमवर्क के तहत काम करते हैं। यूनिटहोल्डर्स को मिलने वाला रिटर्न चार घटकों में बंटा होता है।

- डिविडेंड
- ब्याज
- स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) से मिलने वाला कर्ज का अमोर्टाइजेशन
- अन्य आय।

लाभांश और अन्य आय: यूनिटहोल्डर्स के हाथ में आमतौर पर पूरी तरह टैक्स-फ्री होती हैं।
ब्याज आय: निवेशक के लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।
डेट का एमॉर्टाइजेशन: मिलने के समय गैर-टैक्सेबल होता है, लेकिन जब आप यूनिट्स बेचते हैं, तो कैपिटल गेन निकालते समय इसे एक्विजिशन कॉस्ट से एडजस्ट किया जाता है।

कैपिटल गेन टैक्स-

  • यूनिट्स बेचने से जो मुनाफा होता है, उस पर टैक्स इक्विटी शेयर के जैसे लगता है। मतलब 12 महीने से ज्यादा समय तक रखी गई यूनिट्स को लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है और इन पर एलटीसीजी (LTCG) टैक्स लगता है।
  • 12 महीने के भीतर बेची गई यूनिट्स शॉर्ट-टर्म मानी जाती हैं और इन पर एसटीसीजी (STCG) टैक्स लगता है।

इस तरह, रेंटल इनकम, फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) और बॉंड्स की तुलना में REIT कहीं अधिक टैक्स-एफिशिएंट साबित होते हैं।

सवाल 3: क्या रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में REIT को शामिल किया जा सकता है?

जवाबः रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए REIT बेहद शानदार विकल्प हैं। रिटायरमेंट के बाद लोगों को एक अनुमानित और नियमित इनकम की जरूरत होती है, और REIT इस मामले में एकदम फिट बैठते हैं।

सेबी के नियमों के अनुसार, REIT को अपने नेट डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो (Net Distributable Cash Flow) का कम से कम 90% हिस्सा निवेशकों में बांटना अनिवार्य होता है, वो भी साल में दो बार। व्यवहार में, सभी भारतीय REIT तिमाही आधार पर इनकम बांटते हैं, जो रिटायरमेंट इनकम प्लानिंग के साथ सटीक बैठता है। हालांकि, ये बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़े होते हैं, फिर भी ये सीधे इक्विटी शेयरों की तुलना में कम अस्थिर होते हैं। फिक्स्ड-इन्कम इंस्ट्रूमेंट्स के मुकाबले इन्होंने ऐतिहासिक रूप से बेहतर यील्ड और कैपिटल ग्रोथ दी है। हालांकि, किसी भी निवेश की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं, इसलिए संतुलित पोर्टफोलियो के लिए इसे कंजर्वेटिव एसेट्स के साथ मिला कर रखना चाहिए।"

सवाल 4: क्या REIT में SIP की तरह निवेश करना बेहतर है या फिर लमसम?

जवाबः भले ही SIP शब्द मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड्स के साथ जोड़ा जाता है, लेकिन आप डीमैट अकाउंट के जरिए REIT के यूनिट्स को समय-समय पर थोड़े-थोड़े करके खरीद सकते हैं। यह तरीका एक तरह से सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) जैसा ही काम करता है। इससे निवेशकों को अपनी खरीद लागत (cost) को एवरेज करने और निवेश अनुशासन बनाने में मदद मिलती है। वहीं दूसरी ओर, जब REIT का वैल्यूएशन आकर्षक हो या आपके पास निवेश के लिए बड़ा फंड हो, तो लम्पसम यानी एकमुश्त निवेश करना भी काफी फायदेमंद हो सकता है। आप बाजार की स्थिति और अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार दोनों में से कोई भी तरीका चुन सकते हैं।

सवाल 5: REIT के परफॉर्मेंस की निगरानी कैसे करें और किन संकेतों पर नजर रखें?

जवाबः केवल यूनिट की कीमत देखकर फैसला न करें। भारतीय REIT के प्रदर्शन को परखने के लिए आपको कुछ प्रमुख वित्तीय और परिचालन संकेतकों (indicators) पर ध्यान देना चाहिए:

डिस्ट्रीब्यूशन यील्ड: यूनिट मूल्य के मुकाबले मिलने वाली इनकम को मापता है, जिससे संभावित रिटर्न का अंदाजा लगता है।
नेट एसेट वैल्यू (NAV): यह REIT के पास मौजूद संपत्तियों के उचित मूल्य को दर्शाता है।
ऑक्यूपेंसी रेट और टेनेंट क्वालिटी: इमारतें कितनी भरी हैं और किराएदार कितने भरोसेमंद हैं, यह कैश फ्लो की स्थिरता तय करता है। लंबी लीज एग्रीमेंट वाले REIT ज्यादा स्थिर राजस्व देते हैं।
कर्ज का स्तर (Debt Levels): REIT के पास कितना उधार है, इसकी जांच करना जरूरी है, क्योंकि बदलती ब्याज दरों के दौर में ज्यादा कर्ज जोखिम पैदा कर सकता है।

चूंकि भारतीय REIT शेयर बाजार में लिस्टेड होते हैं, इसलिए उन्हें त्रैमासिक और वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट, संपत्ति मूल्यांकन और रणनीतियों की जानकारी सार्वजनिक करनी पड़ती है। ये रिपोर्ट्स स्टॉक एक्सचेंज और वित्तीय मंचों पर आसानी से मिल जाती हैं।

सवाल 6: क्या FDs पर निर्भर निवेशकों के लिए REIT एक अच्छा विकल्प है?

जवाबः निश्चित रूप से, जो निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट और बॉन्डस के भरोसे हैं, लेकिन बेहतर रिटर्न और कैपिटल ग्रोथ चाहते हैं, उनके लिए REIT एक आकर्षक विकल्प हैं।

FDs की तुलना में REIT टैक्स के मामले में ज्यादा स्मार्ट हैं। साथ ही, डीमैट अकाउंट के जरिए इन्हें कभी भी स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा या बेचा जा सकता है, जिससे इनकी लिक्विडिटी (तरलता) FDs से बेहतर होती है। जहां एफडी एक निश्चित अवधि में गारंटीड रिटर्न देती है तो वहीं REIT मार्केट रिस्क के साथ रियल एस्टेट का फायदा उठाते हैं और बेहतर इनकम व ग्रोथ की संभावना देते हैं। यह कंजर्वेटिव निवेशकों के पोर्टफोलियो को विविधता यानी डाइवर्सिफिकेशन देने के लिए एक बेहतरीन जरिया है।"

जो निवेशक टैक्स चुकाने के बाद ज्यादा मुनाफे के साथ कैपिटल ग्रोथ भी चाहते हैं, उनके लिए REIT एक बढ़िया विकल्प साबित हो सकता है। खास तौर पर एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के भीतर।

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