8th Pay Commission: मीटिंग के बाद OPS बहाली पर आई बड़ी खबर, अब फंस सकता है कानूनी पेंच; एक्सपर्ट ने किया क्लियर
8th Pay Commision Latest News: चेन्नई में 8वें वेतन आयोग की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने OPS बहाली ...और पढ़ें
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8वें वेतन आयोग: OPS बहाली और कानूनी पेंच पर विशेषज्ञों की राय, चेन्नई बैठक के बाद बड़ी खबर
HighLights
चेन्नई बैठक में OPS बहाली, न्यूनतम वेतन ₹68000 की मांग।
2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों पर कानूनी सवाल उठे।
विशेषज्ञों ने OROP और पेंशन लाभों की कानूनी पेचीदगियां समझाईं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| आठवें वेतन आयोग की चेन्नई में बैठकों का दौर समाप्त हो गया है, जहां केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगे सामने आईं। चेन्नई जीपीओ पेंशनर्स फोरम ने सबसे आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार के सामने कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं, जिससे प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। फोरम ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए अब बड़े कदम उठाने की जरूरत है।
चेन्नई मीटिंग में इन पांच मांगों पर जोर
- पहली मांग- ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली: देश भर के पेंशनभोगी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (ops restoration) को दोबारा लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसे चेन्नई फोरम ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है।
- दूसरी मांग- पेंशन और पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी: रिटायर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
- तीसरी मांग- कम्यूटेशन रिकवरी में स्पष्टताः पेंशन के एक हिस्से के बदले मिलने वाली एकमुश्त राशि की रिकवरी के नियमों को स्पष्ट और सरल बनाने की मांग उठी है।
- चौथी मांग- MACP लाभों का संशोधनः मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेस योजना में सुधार कर विशेष रूप से डाक कर्मचारियों के वेतनमान और करियर ग्रोथ को बेहतर बनाने की बात कही गई है।
- पांचवीं और आखिरी मांग- बेहतर भत्ते और सामाजिक सुरक्षाः सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों वर्गों के लिए भत्तों, छुट्टियों के नियमों और सामाजिक सुरक्षा कवर को मजबूत करने की मांग की गई है।
बेसिक सैलरी ₹68000 करने की मांग
पेंशन के अलावा बैठक में न्यूनतम वेतन ₹68,000 करने की (8th pay commission salary hike) पुरजोर मांग उठी। प्रतिनिधियों ने मांग की है कि वेतन संशोधन के लिए एक स्थायी मैकेनिज्म बनाया जाए ताकि हर दशक में आयोग का इंतजार न करना पड़े। इसके साथ ही, मौजूदा पे मैट्रिक्स के साथ रनिंग स्केल्स लागू करने की बात भी कही गई है।
रिपोर्ट सौंपने के लिए बचे हैं सिर्फ 8 महीने
जस्टिस रंजन प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है। अब तक 10 महीने बीत चुके हैं और यह उम्मीद जताई जा रही है कि मई-जून 2027 तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। आयोग का अगला पड़ाव 16, 17 और 18 सितंबर को चंडीगढ़ में तय है।
पेंशनभोगियों की मांगों पर उठे सवाल
इस बीच, पेंशनभोगियों की मांगों से जुड़े दो सबसे बड़े मुद्दों पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला- 2026 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सुरक्षा और दूसरा- असैनिक कर्मचारियों के लिए वन रैंक, वन पेंशन (OROP) की तर्ज पर लाभ देना। इस संबंध में एक्सपर्ट्स ने अपनी स्पष्ट राय रखी है। मौजूदा पेंशनभोगियों के अधिकारों पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि,
पेंशन और ग्रेच्युटी पहले की गई सेवाओं के एवज में अर्जित लाभांश की तरह हैं। इसलिए ऐसी कोई भी सिफारिश जो 2026 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाभों को कम करे या रोके, वह कानूनी रूप से सही नहीं मानी जाएगी। यह पूर्व में अर्जित अधिकारों में एकतरफा बदलाव के समान होगा।"
वहीं सिविल कर्मचारियों के लिए OROP पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सशस्त्र बलों के विपरीत सिविल सेवाओं में कैडर और विभाग अलग-अलग होते हैं, इसलिए एक जैसी OROP फार्मूला लागू करने से पुरानी विसंगतियां दूर होने के बजाय नई असमानताएं पैदा हो सकती हैं। बहरहाल, वार्षिक वेतन वृद्धि को उन्होंने आसान और भविष्योमुखी बताया है जो बिना किसी पुराने बकाए को छेड़े लागू किया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों और कट-ऑफ तिथियों को स्पष्ट नहीं किया गया, तो आने वाले समय में अदालती मुकदमों और कर्मचारी यूनियनों के विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
कानूनी पेंच क्या है? मंजीत पटेल ने समझाया
ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने इन स्टेटमेंट्स का समर्थन करते हुए कहा है कि ये बात बिल्कुल सही है, लेकिन उसमें थोड़ी अस्पष्टता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि,
2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मचारी दो तरह के हैं। पहले वे जो ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आते हैं (जो कि 'अनफंडेड' है), और दूसरे वे जिन्होंने एनपीएस के तहत गारंटेड पेंशन यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को चुना है (जो कि 'फंडेड' पॉलिसी है)। अगर सरकार 2026 से पहले के पुराने पेंशनभोगियों के लाभ रोकती है, तो यह उनके अधिकारों और 'वन रैंक वन पेंशन' जैसे हक का सीधा हनन होगा। फिटमेंट फैक्टर लागू होने से नए और पुराने कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा अंतर आ जाएगा, जो पुराने रिटायरीज़ के साथ सरासर अन्याय होगा।"
डॉ. पटेल ने आगे कहा कि भले ही कर्मचारी एनपीएस/यूपीएस यानी फंडेड पॉलिसी के तहत रिटायर हुआ हो, लेकिन यूपीएस भी तो सर्विस की लंबाई और आखिरी बेसिक सैलरी के आधार पर एक 'गारंटेड पेआउट सिस्टम' ही है। इसलिए, नियम के मुताबिक जो फायदा ओपीएस वालों को मिलना चाहिए, वही एनपीएस और यूपीएस वाले कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए।
मंजीत पटेल ने मांग की है कि सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति बिल्कुल साफ करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 2026 से पहले रिटायर होने वाले सभी तरह के कर्मचारियों को पे कमीशन का पूरा लाभ मिले।
