8th Pay Commission: सैलरी बढ़ाने का नया फॉर्मूला ला सकती है सरकार? OPS बहाली और फिटमेंट फैक्टर पर आया बड़ा अपडेट!
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फिटमेंट फैक्टर, OPS और DA पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अहम जानकारी

समय कम है?
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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| क्या आठवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा झटका लगने वाला है या फिर उनकी सैलरी में बंपर इजाफा होने वाला है? क्या फिटमेंट फैक्टर 3.83 की जगह महज 2.1 ही रहेगा? क्या पुरानी पेंशन योजना (8th pay commission OPS) वापस आएगी और फैमिली यूनिट में पैरेंट्स को शामिल कर सैलरी का गणित बदला जाएगा? अगर आप केंद्रीय कर्मचारी या पेंशनर हैं, तो आपके मन में भी ये सवाल जरूर उठ रहे होंगे।
आठवें वेतन आयोग की आगामी मीटिंग्स और रिपोर्ट आने से पहले ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बड़े खुलासे किए। साथ ही, जमीनी हकीकत से भी रूबरू कराया। आइए, 12 आसान सवालों में समझते हैं अगली सैलरी का पूरा गणित।
सवाल 1: आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.83 की जगह 2.1 मिल सकता है, आपकी इस बात में कितनी सच्चाई है?
मंजीत पटेल: देखिए, हमने 30 अप्रैल को पे कमीशन के साथ हुई बैठक में सीधे तौर पर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की ही मांग रखी है। 2.1 फिटमेंट फैक्टर की बात मैंने सिर्फ उन लोगों को समझाने के लिए की थी, जो बहुत निगेटिव हो रहे थे और कह रहे थे कि सरकार 1.8 से ज्यादा कुछ नहीं देगी। मैंने सिर्फ एक तुलना की थी कि अगर सरकार सबसे खराब स्थिति में (बिना फायदे-नुकसान के) 2.1 भी देती है, तो भी वह सातवें वेतन आयोग के 2.57 से ज्यादा फायदेमंद होगा।
सवाल 2: अगर फिटमेंट फैक्टर सातवें वेतन आयोग (2.57) से कम होकर 2.1 भी रहता है, तो यह कर्मचारियों के लिए ज्यादा फायदेमंद कैसे होगा, इसका गणित क्या है?
मंजीत पटेल: इसे एक आसान से गणित से समझिए। जब सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मिला था, तब 125% महंगाई भत्ता (DA) पहले से था। उस वक्त 7,000 की बेसिक सैलरी वालों को करीब 15,500 रुपए मिल रहे थे। नया वेतनमान लागू होने पर सैलरी 18,000 हुई। यानी असल बढ़ोतरी सिर्फ 2,250 रुपए (करीब 32%) की हुई थी।
अब अगर आठवें वेतन आयोग में 2.1 का सबसे कम फिटमेंट फैक्टर भी मान लें तो यह दिसंबर 2025 की आपकी बेसिक सैलरी और उस वक्त के DA (मान लीजिए 58% या 60%) को मिलाकर लगेगा। ऐसे में 18,000 की बेसिक सैलरी सीधे 38,000 के पार पहुंच जाएगी। यानी आपको ग्रॉस सैलरी में 9,000 रुपये का फायदा होगा, जो कि 18 हजार का करीब 53% बैठता है। तो न्यूनतम स्तर पर भी यह पिछली बार से ज्यादा मुनाफा देगा।"
2.1 फिटमेंट फैक्टर मिला तो कितनी हो जाएगी सैलरी?
| ग्रेड | वर्तमान बेसिक पे | अनुमानित बेसिक पे |
| Level 1 | 18,000 | 37800 |
| Level 2 | 19,900 | 41790 |
| Level 3 | 21,700 | 45570 |
| Level 4 | 25,500 | 53550 |
| Level 5 | 29,200 | 61320 |
| Level 6 | 35,400 | 74340 |
| Level 7 | 44,900 | 94290 |
| Level 8 | 47,600 | 99960 |
| Level 9 | 53,100 | 111510 |
| Level 10 | 56,100 | 117810 |
| Level 11 | 67,700 | 142170 |
| Level 12 | 78,800 | 165480 |
| Level 13 | 118,500 | 248850 |
| Level 13 | 131,100 | 275310 |
| Level 14 | 144,200 | 302820 |
| Level 15 | 182,200 | 382620 |
| Level 16 | 205,400 | 431340 |
| Level 17 | 225,000 | 472500 |
| Level 18 | 250,000 | 525000 |
सवाल 3: क्या आठवें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ाने का पैमाना सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही होगा या सरकार कोई नया फॉर्मूला ला सकती है?
मंजीत पटेल: यह जरूरी नहीं है कि पे कमीशन फिटमेंट फैक्टर ही लागू करे। छठे वेतन आयोग से पे-मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर (8th pay commission fitment factor) की शुरुआत हुई थी, जिसे 7वें वेतन आयोग में पूरी तरह लागू किया गया। लेकिन, 8वें वेतन आयोग में बैठे ब्यूरोक्रेट्स और पॉलिसी मेकर्स बेहद बुद्धिमान लोग हैं। हो सकता है कि वे इस बार फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल ही न करें और सैलरी डिजाइन करने का कोई बिल्कुल नया फॉर्मूला ले आएं। हमने मांग की है कि 18 लेवल को कम किया जाए और शुरुआती लेवल्स को मर्ज किया जाए। हो सकता है वो प्रमोशन के मौके बढ़ाने के लिए लेवल बढ़ा दें। इसलिए केवल फिटमेंट फैक्टर पर अड़े रहना सही नहीं है।
सवाल 4: आपने फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग की है। इसका सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर कैसे पड़ेगा?
मंजीत पटेल: भारत अब बुजुर्गों का देश बनता जा रहा है। आज हर घर में माता-पिता अपने बच्चों पर आश्रित हैं। बुढ़ापे में इलाज और देखभाल के लिए पैसा चाहिए होता है। अभी तक फैमिली यूनिट में पति-पत्नी और दो बच्चों को मिलाकर 3 यूनिट माना जाता है। हमारी सबसे बड़ी मांग है कि इसमें माता-पिता को शामिल कर इसे 5 यूनिट किया जाए। इसका फायदा यह होगा कि अगर सरकार सीधे तौर पर कोई और आर्थिक लाभ नहीं भी देती है, तो केवल 'फैमिली यूनिट' बढ़ने से ही कर्मचारियों की सैलरी का कैलकुलेशन बदल जाएगा और बेसिक सैलरी में ऑटोमैटिकली 66% का उछाल आ जाएगा।
सवाल 5: कुछ पेंशनर्स संगठन वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) में बदलाव की मांग कर रहे हैं। क्या अब ऐसा होना मुमकिन है?
मंजीत पटेल: बिल्कुल नहीं। यह कुछ संगठनों द्वारा कर्मचारियों को गुमराह करने और अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का तरीका है। पे कमीशन अपनी 75% से ज्यादा बैठकें कर चुका है। 10 महीने बीत चुके हैं। बीच में ही कमीशन ने स्पष्ट कर दिया था कि टर्म ऑफ रेफरेंस (8th pay commission tor) अब फाइनल हो चुके हैं। जब सब कुछ तय हो चुका है, तो अब 10 महीने बाद इसमें बदलाव कैसे हो सकता है? जो संगठन आज यह मांग उठा रहे हैं, वे तब कहां थे जब इसका ड्राफ्ट बन रहा था? इसलिए इस भुलावे में न रहें।
सवाल 6: टर्म ऑफ रेफरेंस में फंडेड कॉस्ट और अनफंडेड कॉस्ट का जिक्र है। इसका क्या मतलब है और इससे OPS-UPS वालों को क्या दिक्कत है?
मंजीत पटेल: यही आठवें वेतन आयोग का सबसे बड़ा और छिपा हुआ मुद्दा है, जिसे कोई नहीं समझ रहा। फंडेड कॉस्ट का मतलब है NPS या UPS (यूनिफाइड पेंशन स्कीम), जहां कर्मचारी की सैलरी से पैसा कटता है और सरकार भी 14% या 18.5% अपना हिस्सा डालती है। अनफंडेड कॉस्ट का मतलब है पुरानी पेंशन (OPS), जिसमें कर्मचारी को अपनी जेब से कुछ नहीं देना होता।
खतरा यह है कि मान लीजिए कोई कर्मचारी 2025 में NPS या UPS के तहत रिटायर होता है और उसकी पेंशन 40 हजार तय होती है। 2026 में जब आठवां वेतन आयोग लागू होगा, तो OPS वाले की पेंशन तो डबल (मल्टीप्लायर लगकर) हो जाएगी, लेकिन क्या UPS वाले की पेंशन पर वह मल्टीप्लायर लगेगा? टर्म ऑफ रेफरेंस में दोनों की कॉस्टिंग अलग रखने का मतलब ही यह है कि सरकार UPS वालों को पे कमीशन के दायरे से बाहर रखना चाहती है। हम इसी बात की लड़ाई लड़ रहे हैं कि जिंदा रहते हुए हर कर्मचारी/पेंशनर को नए पे कमीशन का लाभ मिलना चाहिए।"
सवाल 7: ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली को लेकर क्या अड़चन है? क्या UPS कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है?
मंजीत पटेल: ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) का असली मतलब सिर्फ एक शब्द नहीं है, इसका मतलब है- सेवाओं के बदले गारंटीड पेंशन और कर्मचारी के अंशदान (कटे हुए पैसे) की वापसी। आज राज्य सरकारों ने OPS के नाम पर मजाक बना दिया है। छत्तीसगढ़ में OPS लागू है, लेकिन शर्त रख दी 33 साल की सेवा। अब वहां जो 15 साल में रिटायर हो रहा है, उसे तो 25% पेंशन भी नहीं मिल रही।
दूसरी तरफ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का मुद्दा है। 2004 के बाद वाले कर्मचारियों के लिए आपने VRS बंद कर दिया, लेकिन ब्यूरोक्रेट्स आज भी VRS ले रहे हैं। अगर हम 20 साल बाद VRS लेना चाहें, तो हमसे कहा जाता है कि 60 साल की उम्र तक इंतजार करो। यह सीधा-सीधा शोषण और भेदभाव है। हम चुप नहीं बैठेंगे। जब तक VRS के दिन से पेंशन और हमारे कटे हुए पैसे की वापसी की गारंटी नहीं मिलती, हम विरोध करते रहेंगे।"
सवाल 8: आठवें वेतन आयोग का काम फिलहाल कहां तक पहुंचा है और इसकी रिपोर्ट लागू होने की क्या उम्मीद है?
मंजीत पटेल: पे कमीशन का काम अपने तीसरे और अंतिम पड़ाव पर है। देशभर में उनकी करीब 75% बैठकें पूरी हो चुकी हैं। अब केवल कुछ नॉर्थ-ईस्ट के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (अंडमान, लक्षद्वीप आदि) बचे हैं। सितंबर और अक्टूबर तक ये बैठकें खत्म हो जानी चाहिए। हमारी सरकार से और पे कमीशन से पुरजोर मांग है कि वे अपनी रिपोर्ट जनवरी-फरवरी 2025 तक सौंप दें। ताकि 1 फरवरी को जब देश का बजट पेश हो, तो वित्त मंत्री खुद अपने मुंह से कर्मचारियों के लिए नई सैलरी और लाभों का ऐलान कर सकें।
सवाल 9: क्या आठवें वेतन आयोग में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी?
मंजीत पटेल: 100 प्रतिशत। वेतन आयोग बनता ही चीजों को रिवाइज करने के लिए है। HRA, TA और अन्य सभी भत्ते महंगाई के हिसाब से रिवाइज होंगे और पहले से बहुत बेहतर होंगे। एक बात आम जनता को समझनी चाहिए कि वेतन आयोग में जो लोग नियम बना रहे हैं, वो खुद भी सरकारी कर्मचारी (ब्यूरोक्रेट्स) हैं। वे कोई ऐसा नियम नहीं बनाएंगे जिससे खुद उनका ही आर्थिक नुकसान हो जाए। इसलिए भत्तों में बढ़ोतरी तय और शानदार रहने वाली है।
सवाल 10: कर्मचारियों का 18 महीने का अटका हुआ डीए (DA) और अगला महंगाई भत्ता कब तक मिलने की उम्मीद है?
मंजीत पटेल: जहां तक नियमित महंगाई भत्ते (8th pay commission DA) की बात है, तो वह अमूमन सितंबर-अक्टूबर में बढ़ता है। लेकिन क्योंकि ओणम और रक्षाबंधन का त्योहार आ रहा है, तो हमारी मांग है कि सरकार इसे अगस्त में ही रिलीज कर दे।
रही बात कोविड काल के 18 महीने के रुके हुए DA एरियर की, तो वह मुद्दा संसद से लेकर हर जगह दफन हो चुका है। कुछ संगठन केवल अपना चंदा और नाम चलाने के लिए इसे जिंदा रखे हुए हैं। इसलिए हमने वेतन आयोग को एक व्यावहारिक सुझाव दिया है। हमने कहा है कि आपने एरियर नहीं दिया, कोई बात नहीं। आप उस रुके हुए एरियर का फायदा हमें 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर में जोड़कर दे दीजिए। यानी अगर फिटमेंट फैक्टर 3.83 देना है, तो उसे बढ़ाकर 3.93 कर दीजिए। इससे कर्मचारियों के पुराने नुकसान की भरपाई हो जाएगी।"
सवाल 11: आप शिक्षकों के लिए अनिवार्य TET (Teacher Eligibility Test) परीक्षा का विरोध क्यों कर रहे हैं?
मंजीत पटेल: आप खुद सोचिए, एक शिक्षक जिसने पिछले 20 सालों तक मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ के उन जंगलों और जनजातीय इलाकों में अपनी सेवाएं दीं, जहां स्कूलों के ताले खोलने वाला कोई नहीं था। उसने 1500-2000 रुपये महीने की पगार पर अपनी पूरी जवानी खपा दी और उसके पढ़ाए बच्चे आज आईएएस, आईपीएस और डॉक्टर बन गए। आज जब उस शिक्षक के रिटायरमेंट में 5 साल बचे हैं और उसे रेगुलर किया गया है, तो सरकार कह रही है कि नौकरी बचाने के लिए TET पास करो। यह कैसा न्याय है? अगर वो शिक्षक अयोग्य था, तो उसके पढ़ाए बच्चे योग्य कैसे बन गए? सरकार को यह नियम तुरंत वापस लेना होगा।
सवाल 12: छह सितंबर को दिल्ली में जो महापंचायत बुलाई गई है, उसका मुख्य एजेंडा क्या है और शिव गोपाल मिश्रा जैसे नेताओं के दावों पर आपकी क्या राय है?
मंजीत पटेल: जो नेता रिटायर हो चुके हैं और कह रहे हैं कि कर्मचारियों की सारी मांगें पूरी हो चुकी हैं, उन्हें वर्तमान कर्मचारियों का दर्द कैसे पता होगा? "जाके पांव न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई।" मांगें पूरी हुई हैं या नहीं, यह एक रिटायर व्यक्ति नहीं, बल्कि आज का संघर्षरत कर्मचारी तय करेगा।
इसीलिए 6 सितंबर को नई दिल्ली में हमने कर्मचारी नेताओं की महापंचायत बुलाई है। इसमें देशभर से 250 से 300 बड़े कर्मचारी नेता हिस्सा ले रहे हैं। सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाली इस पंचायत में ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली, वेतन विसंगतियों को दूर करने, अनिवार्य TET को हटाने और 8वें वेतन आयोग को लेकर एक मजबूत और साझा रणनीति तैयार की जाएगी। हम सरकार के सामने ठोस आंकड़ों और तर्कों के साथ अपनी बात रखेंगे।"
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