नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक को कुछ प्रशासनिक जरूरतों के चलते 5 जून की जगह 4 जून को होना निर्धारित किया है। साथ ही इस दो दिवसीय एमपीसी बैठक की अवधि को बढ़ाकर तीन दिवसीय कर दिया गया है। आपको बता दें कि छह सदस्यीय एमपीसी बैठक का नेतृव आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल करते हैं। इस बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव पर फैसला लिया जाता है।

21 मार्च, 2018 को केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2019 के लिए मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक की अनुसूची का एलान किया था। आरबीआई ने अपने बयान में कहा, “कुछ प्रशासनिक अनिवार्यताओं के चलते वित्त वर्ष 2019 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक 4 जून से 6 जून तक होगी। यह पहले पांच और छह जून को होनी थी।” साथ ही यह भी कहा कि वर्ष 2018-19 के लिए अन्य सभी एमपीसी बैठकों की तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा। आपको याद दिला दें कि इस वित्त वर्ष की पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति बैठक 4 और 5 अप्रैल को हुई थी। इस दौरान पैनल ने ब्याज दरें बरकरार रखी थी।

कैसी रही थी पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति बैठक

वित्त वर्ष 2018-19 की पहली क्रेडिट पॉलिसी (द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा) उम्मीद के मुताबिक रही थी। इस बैठक में एमपीसी ने कोई बदलाव नहीं किया। रेपो रेट को 6 फीसद पर और रिवर्स रेपो 5.75 फीसद पर ही बरकरार रखा गया। वहीं रिजर्व बैंक ने सीआरआर को भी 4 फीसद पर बरकरार रखा। दरें बरकरार रखने का प्रस्ताव 5-1 से पास हुआ था। सिर्फ मिशेल डी पात्रा ने 25 बीपीएस के इजाफे के पक्ष में वोट किया था।

इस बैठक में FY19 की पहली छमाही में महंगाई दर घटने का अनुमान लगाया गया। वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में महंगाई अनुमान को 5.1-5.6 फीसद से घटाकर 4.7-5.1 फीसद कर दिया गया। वहीं वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में (अक्टूबर-मार्च) में महंगाई अनुमान 4.4 फीसद रखा गया है। एसएलआर 19.5 फीसद पर बरकरार रखा है।

Posted By: Praveen Dwivedi