नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से कैपिटल नॉर्म्स यानी अनिवार्य रूप से पूंजी रखने के नियमों में छटू देने के लिए बातचीत करेगी। सरकार बैजल III मानदंड़ों को अपनाने का सुझाव दे सकती है। यह जानकारी अंग्रेजी अखबार के मुताबिक है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार यह फैसला वित्त मंत्रालय की नीति आयोग और अन्य शेयरधारकों के साथ हुई चर्चा के बाद लिया गया है। इस फैसले से माना जा रहा है कि सरकारी बैंकों की 60,000 करोड़ रुपये की पूंजी मुक्त हो जाएगी जिसका इस्तेमाल कर्ज देने के लिए किया जा सकेगा। साथ ही ऐसा करने से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी, कमजोर बैंकों को ताकत और सरकार को अपनी तरफ से इन बैंकों को पूंजी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अधिकारी ने बताया है कि कैपिटल फ्री होने पर करीब 6 लाख करोड़ रुपये बिना किसी नये प्रवाधान के हासिल किये जा सकते हैं। मौजूदा समय में बैंकों को रिस्क वेटेड एसेट्स का 5.5 फीसद हिस्सा अलग से रखना पड़ता है। इसे मिनिमम कॉमन इक्विटी टियर 1 (सीईटी) रेशियो कहा जाता है। बैजल 3 नॉर्म्स के तहत इसकी सीमा घटकर 4.5 फीसद हो जाएगी।

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन ने बताया कि बैजल III नॉर्म्स को बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं हैं क्योंकि 70 फीसद भारतीय बैंकिंग प्रणाली सरकारी के अधीन है। इन्होंने यह भी बताया कि इन बैंकों  सरकारी गारंटी भी हासिल है। साथ ही इसके किसी असुरक्षा की अस्थिति में जमाकर्ता सरकार की ओर से बीमाकृत होता है।    

Posted By: Surbhi Jain

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