नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अमेरिका 50 अरब डॉलर मूल्य की चीन की उन आयातित वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाएगा जो अहम औद्योगिक तकनीक पर आधारित हैं। कारोबारी रिश्तों में तनाव खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच समझौता होने और एक-दूसरे के खिलाफ ट्रेड वार न छेड़ने की घोषणा के कुछ दिनों बाद व्हाइट हाउस ने यह कदम उठाया है।

चीन और अमेरिका ने टेड वार टालने के लिए 20 मई को समझौता किया था। इसके अनुसार चीन ने अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में काफी इजाफा करने के लिए सहमति जताई थी ताकि अमेरिका के साथ 375 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में कमी लाई जा सके।

व्हाइट हाउस की ओर से मंगलवार को जारी बयान के अनुसार अमेरिका 50 अरब डॉलर की चीन की वस्तुओं पर 25 फीसद का भारी भरकम शुल्क लगाएगा। मेड इन चायना 2025 प्रोग्राम के तहत आने वाली वस्तुएं इस शुल्क के दायरे में आएंगी। व्हाइट हाउस का मानना है कि चीन के प्रोग्राम से अमेरिका और पूरी दुनिया की कंपनियों को नुकसान होगा।

शुल्क के दायरे में आने वाली चीन की वस्तुओं की सूची 15 जून तक जारी की जाएगी। इसके बाद शुल्क लगा दिया जाएगा। पिछले 22 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए थे, उनके तहत उठाए जाने वाले तीन उपायों में से एक के तहत यह शुल्क लगाने की घोषणा की गई है। बयान के अनुसार अमेरिका घरेलू तकनीक और बौद्धिक संपदा को बचाने के लिए कई कदम उठाएगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की एक रिपोर्ट के बाद शुल्क की घोषणा की गई है। हो रही गड़बड़ियों की बात कही गई थी।

Posted By: Surbhi Jain

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