स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में तूफानी तेजी, 6 महीने में 21% से ज्यादा रिटर्न; निवेशकों के लिए क्या होगा सही कदम?
पिछले छह महीनों में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है, निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स ने 21.6% का ...और पढ़ें

स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में तूफानी तेजी, 6 महीने में 21% से ज्यादा रिटर्न; निवेशकों के लिए क्या होगा सही कदम?
HighLights
स्मॉलकैप इंडेक्स ने छह महीने में 21.6% का रिटर्न दिया।
कंपनियों की कमाई में वृद्धि ने बाजार की तेजी को बढ़ावा दिया।
उच्च वैल्यूएशन और वैश्विक खतरों पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए।
बिजनेस डेस्स, नई दिल्ली। पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार में छोटे शेयरों यानी स्मॉलकैप में जबरदस्त बहार देखने को मिली है। 4 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स ने पिछले छह महीनों में 21.6% का शानदार रिटर्न दिया है। इसके मुकाबले, मिडकैप इंडेक्स 11.1% और बड़े शेयरों वाला निफ्टी 100 इंडेक्स सिर्फ 0.4% ही आगे बढ़ पाया है। सिर्फ छह महीने ही नहीं, बल्कि पिछले एक, तीन और पांच साल के लंबे समय में भी स्मॉलकैप शेयरों ने बड़े शेयरों से बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में अब सवाल ये है कि ऐसे समय में निवेशक क्या करें? तो आइए आज इसके बारे में गहराई से जानते हैं।
क्या हालिया तेजी का फायदा हर शेयर को मिला है?
जब इस तेजी की गहराई में जाकर देखा गया, तो एक दिलचस्प बात सामने आई। पिछले छह महीनों की यह छलांग कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस इंडेक्स के करीब 42% शेयरों ने 20% से ज्यादा का मुनाफा दिया है।
लेकिन अगर नजर पिछले पूरे एक साल पर डालें, तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। पिछले 12 महीनों में 20% से ज्यादा रिटर्न देने वाले शेयर 20% से भी कम रहे और आधे से ज्यादा शेयरों का रिटर्न नेगेटिव में चला गया। इसका सीधा मतलब यह है कि जैसे-जैसे समय बढ़ता है, वैसे-वैसे सही और मजबूत शेयरों को चुनना (Stock Selection) सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है।
अलग-अलग इंडेक्स का कुल रिटर्न-
| Index | 6 month | 1 year | 2 years | 3 years | 5 years |
| Nifty Small Cap 250 TR | 21.60% | 10.20% | 0.60% | 15.50% | 16.30% |
| Nifty Mid Cap 100 TR | 11.10% | 11.40% | 3.60% | 16.80% | 17.60% |
| Nifty 100 TR (Large Cap) | 0.40% | -0.30% | -1.30% | 9.80% | 8.50% |
Source: UTI AMC Research (4 सितंबर 2026 के हिसाब से)
कंपनियों की कमाई में तेजी क्या हमेशा रहेगी?
इस तूफानी तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ कंपनियों की बढ़ी हुई कमाई यानी अर्निंग्स का है। दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितताओं के बावजूद, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में स्मॉलकैप कंपनियों का मुनाफा शानदार रहा है। इन कंपनियों का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 30% तक बढ़ा है, जिससे आने वाले सालों के लिए उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
हालांकि, इस मुनाफे में कुछ ऐसे फायदे भी शामिल रहे जो हमेशा नहीं टिकते, जैसे—जीएसटी दरों में कटौती, कमोडिटी की कीमतों से मिला इन्वेंट्री फायदा और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को हुआ लाभ। चूंकि इनमें से कई फायदे अस्थायी हैं, इसलिए आगे चलकर इसी रफ्तार से कमाई की उम्मीद रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। फिर भी, छोटी और मझोली कंपनियां लगातार बड़े शेयरों से बेहतर ग्रोथ दिखा रही हैं, क्योंकि वे ऐसे नए सेक्टरों में काम करती हैं जहां बड़ी कंपनियों की पहुंच कम है।
वैल्यूएशन पर गौर करना क्यों है जरूरी?
कमाई बढ़ने के साथ-साथ इन छोटे शेयरों के भाव यानी वैल्यूएशन भी काफी ऊपर भाग चुके हैं। हालांकि कुछ तेजी कंपनियों की असली तरक्की की वजह से है, लेकिन बहुत सारा हिस्सा इस उम्मीद पर टिका है कि भविष्य में भी सब कुछ ऐसा ही धमाकेदार चलता रहेगा। जब बाजार में उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो जरा सी भी निराशा होने पर शेयरों में तेज गिरावट का खतरा पैदा हो जाता है। यही वजह है कि सिर्फ आंख मूंदकर तेजी के पीछे भागने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल को देखना बेहद जरूरी है।
निफ्टी 250 के शेयरों में रिटर्न का हाल
| Return Range | Six month return | One year return |
| >100% | 2.00% | 4.00% |
| 50-100% | 14.00% | 10.00% |
| 20-50% | 26.00% | 15.00% |
| 0-20% | 31% | 21% |
| Negative return | 28% | 50% |
Source: यूटीआई एएमसी रिसर्च। रिटर्न 4 सितंबर 2026 तक
वैश्विक मोर्चे पर मंडरा रहे हैं बड़े खतरे
आज के समय में दुनिया भर के हालात काफी पेचीदा हैं। कई देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव जारी हैं, व्यापार के रास्ते बदल रहे हैं, और अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किया जा रहा भारी-भरकम खर्च ज्यादातर कर्ज के जरिए हो रहा है। इससे आगे चलकर आर्थिक मोर्चे पर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
इसके अलावा, कई देशों में सरकारी कर्ज बहुत ज्यादा है और महंगाई की वजह से बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इन तमाम वैश्विक खतरों के बावजूद अगर शेयर बाजार लगातार ऊपर चढ़ रहा है, तो इसका मतलब यह है कि कई बड़े खतरे अभी निवेशकों की नजरों से छिपे हुए हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
ऐसे माहौल में जोश में होश खोने से बिल्कुल बचना चाहिए। बाजार की इस चाल के बीच अपना पैसा सोच-समझकर अलग-अलग जगहों पर बांटना (Asset Allocation) और पूरी तरह अनुशासित रहना ही सबसे समझदारी भरा कदम है, ताकि किसी भी अचानक आने वाले झटके से खुद को बचाया जा सके।
Note: इस आर्टिकल के लेखक Nitin Jain, Vice President – Equity, UTI AMC हैं।
