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MSME क्रेडिट ₹47.4 लाख करोड़ के पार! मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे तेज बढ़त, इन शहरों में सबसे अधिक कर्ज

Published: Mon, 21 Sep 2026 06:02 PM (IST)

देश में MSME क्षेत्र का क्रेडिट पोर्टफोलियो जून 2026 तक 12.5% की वृद्धि के साथ 47.4 लाख करोड़ रुपये पर ...और पढ़ें

MSMEx क्रेडिट तेजी से बढ़ा

MSMEx क्रेडिट तेजी से बढ़ा

HighLights

  1. MSME क्रेडिट पोर्टफोलियो जून 2026 तक 47.4 लाख करोड़ पहुंचा।

  2. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 17.4% की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई।

  3. MSME कर्ज अब प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों में केंद्रित हो रहा है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में MSME क्षेत्र को मिलने वाला कर्ज तेजी से बढ़ रहा है और इसका बड़ा हिस्सा अब चुनिंदा औद्योगिक और कारोबारी हब में सिमटता जा रहा है। CRIF High Mark की ताजा रिपोर्ट “MSMEx Spotlight – Cluster and Industrial Activity Analysis” के अनुसार, जून 2026 तक MSME क्रेडिट पोर्टफोलियो 12.5 फीसदी की सालाना वृद्धि के साथ 47.4 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, MSME क्षेत्र में सबसे तेज बढ़ोतरी छोटे और मध्यम कारोबारों के क्रेडिट में दर्ज की गई। छोटे कारोबारों के पोर्टफोलियो में 20.3% और मीडियम कारोबारों में 21.3% की वृद्धि हुई। हालांकि माइक्रो यूनिट्स की बढ़ोतरी अपेक्षाकृत धीमी रही, लेकिन कुल सक्रिय लोन खातों में उनकी हिस्सेदारी अब भी 84.4 फीसदी है। इससे साफ है कि देश में सबसे ज्यादा MSME यूनिट्स अभी भी माइक्रो कैटेगरी में हैं और इस क्षेत्र में कर्ज विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग सेक्टर में बढ़ा क्रेडिट

रिपोर्ट बताती है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर MSME कर्ज बढ़ोतरी का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है। जून 2026 में इस क्षेत्र के पोर्टफोलियो में 17.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं ट्रेडिंग सेक्टर में 12.7% की बढ़ोतरी हुई। सर्विस सेक्टर लगभग स्थिर रहा और इसमें सिर्फ 0.2 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली।

मैन्युफैक्चरिंग के भीतर इंजीनियरिंग और मशीनरी सबसे बड़ा सेगमेंट बनकर उभरा है। इसके बाद एग्रो प्रोडक्ट्स और फॉरेस्ट्री, केमिकल्स, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल सेक्टर का स्थान रहा। ट्रेडिंग सेक्टर में रिटेल और होलसेल ट्रेड सबसे खास एक्टिविटी बनी हुई हैं।

इन क्षेत्रों का क्रेडिट सबसे अधिक

रिपोर्ट से पता चलता है कि MSME कर्ज अब तेजी से बड़े औद्योगिक क्लस्टरों में केंद्रित हो रहा है। इंजीनियरिंग और मशीनरी क्षेत्र में ऐसे जिलों की संख्या, जहां इस सेक्टर का कर्ज 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है, तीन साल में 24 से बढ़कर 47 हो गई है। अब इस सेक्टर के कुल कर्ज का 63.5 फीसदी हिस्सा इन्हीं बड़े क्लस्टरों से आता है।

केमिकल सेक्टर में भी कर्ज का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा केंद्रों में केंद्रित है। इस सेक्टर के कुल क्रेडिट का 53.1 फीसदी हिस्सा 24 बड़े क्लस्टरों से आता है। अहमदाबाद और मुंबई इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।

वहीं टेक्सटाइल उद्योग में तस्वीर अलग है। यह सेक्टर अभी भी अपने पारंपरिक केंद्रों पर निर्भर है। कुल टेक्सटाइल क्रेडिट का 60.8 फीसदी हिस्सा सिर्फ 15 क्लस्टरों से आता है और अकेले सूरत की हिस्सेदारी 19.4 फीसदी है।

ट्रेडिंग सेक्टर में भी क्लस्टर आधारित विस्तार तेजी से बढ़ा है। होलसेल ट्रेड में बड़े क्रेडिट वाले जिलों की संख्या तीन साल में 54 से बढ़कर 119 हो गई है। अब इस सेक्टर के कुल कर्ज का 71.7 फीसदी हिस्सा इन्हीं जिलों में केंद्रित है। रिटेल ट्रेड में भी ऐसे जिलों की संख्या 143 से बढ़कर 189 हो गई है और उनका हिस्सा 75.1 फीसदी तक पहुंच गया है।

किन क्षेत्रों में लिया सबसे अधिक कर्ज?

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सूरत, अहमदाबाद, तिरुप्पुर और राजकोट जैसे प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों में प्राइवेट बैंक सबसे बड़े कर्जदाता बने हुए हैं। वहीं केमिकल जैसे कुछ क्षेत्रों में NBFCs की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

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CRIF High Mark का कहना है कि MSME कर्ज का नक्शा तेजी से बदल रहा है और क्रेडिट का फ्लो स्थापित औद्योगिक और कारोबारी हब की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में जिला और उद्योग स्तर के आंकड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कर्ज की मांग, जोखिम और नए अवसरों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकते हैं।