अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बदलाव फिलहाल नहीं करने व उसकी संभावना को 2016 तक टालने के फैसले ने घरेलू बाजार समेत उभरते बाजारों में शुक्रवार को दम भर दिया। अभी तक इस मामले में अनिश्चितता बनी हुई थी। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका में घरेलू बाजार दस से बीस फीसद तक नीचे आ चुके हैं।

हमारा मानना है कि उभरते बाजारों ने अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि को स्वीकार कर लिया था। इसलिए अब इसके उलट फैसला आने के बाद इनमें यहां से 20-25 फीसद की बढ़ोतरी आना स्वाभाविक है। अब बाजार की नजरें चीन की तरफ से आने वाले आंकड़ों पर हैं, जहां सुस्ती के छा रहे बादलों से दुनिया भर के बाजार प्रभावित हो रहे हैं। फेडरल रिजर्व ने भी इन्हीं आंकड़ों के इंतजार में ब्याज दरों के फैसले को टाला हुआ था।

जहां तक भारतीय शेयर बाजारों का सवाल है हमारा मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले ने रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में कटौती का रास्ता खोला है। इसकी वजह से शुक्रवार को शुरू हुई तेजी की रफ्तार जारी रहेगी। हालांकि इस सप्ताह वायदा कारोबार की एक्सपायरी होने के चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।

जहां तक वैश्विक संकेतों का सवाल है मंगलवार को चीन से मैन्यूफैक्र्चंरग पीएमआइ के आंकड़े जारी होंगे। बुधवार को अमेरिका से मैन्यूफैक्र्चंरग पीएमआइ व कच्चे तेल के भंडार का आंकड़ा जारी होगा। इसी दिन यूरोजोन का कंपोजिट पीएमआइ जारी किया जाएगा। इसके अगले दिन अमेरिका से बेरोजगारी के दावे, नए घरों की बिक्री और कोर ड्यूरेबल गुड्स के आंकड़े आएंगे।

शुक्रवार का दिन अहम होगा क्योंकि इस दिन अमेरिका के तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी होंगे। इनके अलावा फेडरल रिजर्व की चेयरमैन जेनेट येलेन गुरुवार को मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में भाषण देंगी। बाजार की येलेन के भाषण पर भी निगाहें रहेंगी, क्योंकि वह इसमें आगे के लिए गाइडेंस दे सकती हैं। इनकों बाजार आगे के संकेतों के रूप में देखेगा।
संदीप पारवाल
एमडी
एसपीए
कैपिटल्स

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