नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। आमतौर पर देखा जाता है कि लोग जब 45-50 साल के हो जाते हैं, तब अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करते हैं। जितनी देर से आप रिटायरमेंट प्लानिंग शुरु करेंगे, आपके जीवन के अंतिम सालों में आपको उतनी ही आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि हमें 20 या 30 साल की उम्र से ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए। इससे हमारी वृद्धावस्था का समय तो समृद्ध बनेगा ही, साथ ही यह आधुनिक जीवन शैली को देखते हुए बहुत आवश्यक भी हो गया है।

रिटायरमेंट प्लानिंग के 2 पार्ट होते हैं। पहला होता है, रिटायरमेंट के बाद के खर्चों का आंकलन करना और दूसरा होता है, उस राशि को इकट्ठा करने की प्लानिंग करना। आइए आपको बताते हैं कि आप किस तरह अपने रिटायरमेंट फंड की गणना कर सकते हैं।

सबसे पहले अपनी विभिन्न आवश्यक्ताओं पर हो रहे मौजूदा खर्चों की गणना शुरू करें। अब इसमें से उन आवश्यकताओं को घटा दें जो, रिटायरमेंट के बाद नहीं रहने वाली हैं, जैसे- बच्चों की शिक्षा पर होने वाले खर्च आदि। इसके साथ ही उन आवश्यकताओं को खर्च में शामिल करें जो रिटायमेंट के बाद आपको महसूस होंगी, जैसे- चिकित्सा, ट्रैवलिंग आदि पर खर्च। अब रिटायरमेंट के बाद की महंगाई दर के हिसाब से खर्चों की गणना कर लें। यहां बता दें कि सामान्यतया महंगाई दर प्रति वर्ष करीब 5 फीसद मानी जाती है। अब इस महंगाई दर के हिसाब से रिटायरमेंट के बाद के प्रत्येक साल के लिए सभी खर्चों की गणना करें।

जब आप अपने रिटायरमेंट के बाद के जीवन के हर एक साल के अनुमानित खर्चे की गणना कर लें, तो अब इसमें से निवेश आदि से प्राप्त होने वाले अनुमानित रिटर्न को घटा दें। अब आपको आपके रिटायरमेंट के लिए आवश्यक फंड का अनुमान हो जाएगा। जब आपके पास रिटायरमेंट के लिए आवश्यक फंड, इस फंड को जुटाने के लिए उपलब्ध समय और उपलब्ध रिसोर्सेज की जानकारी होगी, तो आप इस राशि तक पहुंचने के लिए आवश्यक मासिक निवेश की गणना भी कर लें।

Posted By: Pawan Jayaswal

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप