देश में बीमा उद्योग को उदार बनाने व उसमें निजी कंपनियों के प्रवेश के बाद यह शब्द अब काफी कॉमन हो गया है। इसके तहत इंश्योरेंस कंपनियों व बैंकों के बीच एक तरह का समझौता होता है। इसमें बैंक अपनी शाखाओं के जरिये इंश्योरेंस कंपनियों के उत्पादों की बिक्री करते हैं।

बैंकों के पास खाताधारकों के रूप में ग्राहकों का एक बड़ा आधार होता है। लिहाजा बीमा कंपनियों को अपने एजेंट नेटवर्क का बहुत अधिक विस्तार नहीं करना पड़ता। सरकार के नियमों के मुताबिक, कोई भी बैंक एक ही बीमा कंपनी के उत्पाद बेच सकता है।

संबंधित अन्य सामग्री पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस