एगॉन रेलीगेयर लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीओओ यतीश श्रीवास्तव का मानना है कि भारत में पारंपरिक बीमा पॉलिसियों के प्रति बढ़ रहा भरोसा एक शुभ संकेत हैं। विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन के साथ बातचीत में वे बताते हैं कि अपनी सालाना आय का कम से कम दस गुणा ज्यादा का बीमा कवरेज लेना चाहिए।

-एक आम इंसान को कितना बीमा कवरेज चाहिए, इसके आकलन का सीधा तरीका क्या है?

बीमा कवरेज की जरुरत हर व्यक्ति के हिसाब से बदलता है। यह उम्र, आय व कई अन्य परिस्थितियों के हिसाब से भी परिवर्तित होता है। लेकिन मोटे तौर पर एक नियम है जिसकी सलाह हम अपने ग्राहकों को देते हैं। सालाना आमदनी का कम से कम दस गुणा ज्यादा राशि का बीमा कवरेज होना चाहिए। मसलन, अगर किसी व्यक्ति की मासिक आमदनी 25 हजार रुपये है तो इस हिसाब से उसकी सालाना आमदनी हुई तीन लाख रुपये।

तो इस व्यक्ति को कम से कम 30 लाख रुपये का बीमा कवरेज लेना ही चाहिए। लेकिन अगर उस व्यक्ति पर कोई अतिरिक्त कर्ज है मसलन होम लोन है या कोई अन्य बड़ा लोन है तो फिर उस राशि के लिए भी अलग से बीमा कवरेज होना चाहिए ताकि व्यक्ति के नहीं रहने पर उसके परिवार पर होम लोन चुकाने का बोझ नहीं आये।

-लेकिन 25 हजार रुपये कमाने वाले व्यक्ति के लिए 30 लाख रुपये के कवरेज का प्रीमियम ज्यादा नहीं होगा?

अगर सही उम्र में और सही बीमा पॉलिसी ली जाए तो प्रीमियम बहुत ज्यादा नहीं होगा। इस लिहाज से टर्म बीमा पॉलिसी सबसे बेहतरीन होती हैं। इन्हें लेने में झंझट कम होता है और इनका प्रीमियम बहुत ही कम होता है। एगॉन रेलीगेयर लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की टर्म बीमा पॉलिसी ग्राहक ऑनलाइन ले सकते हैं।

-कई ग्राहक मानते हैं कि टर्म बीमा पॉलिसी पैसे की बर्बादी है क्योंकि इसमें कोई रिटर्न नहीं मिलता?

यह गलत सोच है। ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि बीमा पॉलिसी वे रिटर्न के लिए नहीं खरीद रहे बल्कि उनके नहीं रहने पर उनके परिवार व आश्रितों को वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा और कोई पॉलिसी नहीं है जो एक करोड़ रुपये का बीमा कवरेज महज कुछ हजार रुपये में उपलब्ध करा दे। अच्छी बात यह है कि टर्म पॉलिसी को लेकर भारत में लोगों की मानसिकता बदल रही है। हमारी कंपनी ने वर्ष 2009 में आन लाइन टर्म नीति लांच की थी। आज हालात यह है कि यह पॉलिसी हमारी सबसे ज्यादा बिकने वाली पॉलिसियों में है। सरकार और नियामक एजेंसी के नए नियमों ने भी पारंपरिक बीमा उत्पादों के प्रति आम जनता के मन में विश्वास पैदा हुआ है।

-ग्राहकों के बीच गलत तरीके से बीमा पॉलिसियों न बेची जाए, इसे रोकने के लिए आपकी कंपनी क्या करती है?

इसके लिए बीमा पॉलिसी करने के हर स्तर पर हम ग्राहकों से पूछताछ करते हैं। एजेंट्स जब ग्राहकों के बारे में सूचना भेजते हैं तो हम सबसे पहले ग्राहक को फोन कर यह पूछते हैं कि क्या वह उक्त बीमा पॉलिसी के बारे में जानते हैं। अगर ग्राहक अनभिज्ञता जाहिर करते हैं तो हमारे प्रतिनिधि पॉलिसी के बारे में उसे पूरी जानकारी देते हैं। उसके बाद भी अगर ग्राहक संतुष्ट नहीं होता तो हम साफ तौर पर उसे बता देते हैं कि यह पॉलिसी उसके लिए नहीं है। या ग्राहक यह बताता है कि उसे कुछ और जानकारी दी गई थी तो हमारे प्रतिनिधि पॉलिसी को कनफर्म नहीं करते। इसके अलावा पॉलिसी हो जाने के बाद भी हम कुछ चयनित ग्राहकों से सैंपलिंग के तौर पर पूछताछ करते हैं। हमारी कोशिशों का नतीजा है कि गलत सूचना के आधार पर बीमा पॉलिसी बेचने की शिकायतें हमारी कंपनी में काफी तेजी से कम हुई है।

-कई जीवन बीमा कंपनियों ने हाल ही में गारंटीशुदा बीमा पॉलिसी लांच की है। कौन खरीद रहा है इन्हें?

गारंटीशुदा रिटर्न बीमा पॉलिसियों की भारत में बाजार है और यह तेजी से

बढ़ रहा है। हमारी कंपनी ने भी हाल ही में एगॉन रेलीगेयर गारंटीड ग्रोथ इंश्योरेंस प्लान नाम से इस तरह की पॉलिसी लांच की है। हम इसे मध्यम वर्ग के बीच खास तौर पर मार्केटिंग कर रहे हैं। बहुत बड़ा वर्ग है जो जीवन बीमा कवरेज तो चाहता है लेकिन साथ ही उसे सुनिश्चित रिटर्न भी चाहिए। इस पर रिटर्न तो इिक्वटी बाजार की तरह नहीं मिलेगा लेकिन बीमा पॉलिसी कुछ भी सुनिश्चित रिटर्न दे तो उससे उसकी पूछ ज्यादा बढ़ जाती है। जनवरी, 2014 में भी हमारी कंपनी चार-पांच नए बीमा उत्पाद पेश करेगी। ये सारी पॉलिसियां ईरडा के नए नियमों के मुताबिक होंगी। नए नियमों के मुताबिक हम कुछ यूलिप उत्पाद भी लांच करेंगे।

यतीश श्रीवास्तव

सीओओ, एगॉन रेलीगेयर लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

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