नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। आजकल कंपनियों ने लोन प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। कईं आकर्षक स्कीम्स होने के कारण ग्राहक को लोन चुकाना बेहद सरल प्रतीत होता है। फिर भी होम लोन जैसे लंबी अवधि के लोन के लिए यह इतना आसान भी नहीं होता है। ग्राहक की मृत्यु जैसी विकट परिस्थिति में तो लोन का भार परिवार पर आ जाता हैं और मुसीबतें बढ़ने लगती हैं। ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए ही बैंक ग्राहक से होम लोन के साथ में बीमा कवर लेने का आग्रह करते हैं। वैसे होम लोन के साथ बीमा कवर लेना पूरी तरह ग्राहक की इच्‍छा पर निर्भर करता है लेकिन, होम लोन के साथ बीमा कवर लेना एक अच्छी बात है।

क्यों लें बीमा कवर

अपना घर हर परिवार का सपना होता है लेकिन, होम लोन के साथ एक बड़ी देनदारी भी बन जाती है। अगर लोन चुकने से पहले ही लोन लेने वाले की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे में कर्ज का बोझ पूरे परिवार पर आ जाता है। अगर परिवार में अन्य कोई कमाने वाला नहीं हो तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। वहीं बीमा कवर होने की स्थिति में यह बोझ परिवार पर नहीं पड़ता है। होम लोन की सुरक्षा के लिए ली जाने वाली बीमा पॉलिसी व्यक्ति को मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में बकाया होम लोन चुकाने में मदद करती है। इसके तहत आपका बकाया होम लोन बीमा कंपनी चुकाती है। यहां बता दें कि, आत्महत्या के मामले में इस बीमा का लाभ नहीं मिलता है।

थोड़ी बढ़ जाएगी ईएमआई की राशि

होम लोन के साथ बीमा कवर लेने पर ग्राहक को कोई अग्रिम भुगतान नहीं करना होता है लेकिन उसकी ईएमआई थोड़ी सी बढ़ जाती है। माना लीजिए कि, आपने 15 साल के लिए 30 लाख का होम लोन लिया है और आपको उसके लिए बीमा कवर चाहिए। ऐसे में आपका सालाना प्रीमियम लगभग 3,200 रुपये बनेगा जिससे आपकी ईएमआई थोड़ी बढ़ जाएगी लेकिन, इससे आप पर कोई खास भार नहीं पड़ेगा।

नहीं मिलेगा टैक्स छूट का लाभ

होम लोन के बीमा कवर पर जो प्रीमियम चुकाया जाएगा उस पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स में छूट का लाभ नहीं मिलता है। धारा 80 सी के तहत टैक्स छूट तब ही मिलती है जब आप स्वयं कोई टर्म इंश्योरेंस प्लान ले रहे हों। यहां देखने वाली बात यह है कि, प्रीमियम की राशि बहुत कम होती है जिससे आपका नुकसान बहुत कम होने वाला है।

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Posted By: Pawan Jayaswal