संक्रमण के बिना तेजी से फैलने वाले रोगों में कैंसर सबसे अधिक जानलेवा बीमारी है। भारत में भी अब इसका विस्तार तेजी से हो रहा है। हर साल कैंसर के करीब 11 लाख नए मामले देश में जुड़ते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी बड़ी संख्या में लोग कैंसर से पीडि़त हैं।

इस बीमारी का इलाज न केवल लंबा चलता है, बल्कि काफी महंगा भी है। एक औसत

मध्यवर्गीय परिवार के लिए कैंसर का इलाज किसी के भी जीवन भर की बचत को साफ कर सकता है। इसमें भी यदि कैंसर का शिकार परिवार का मुखिया और आमदनी का मुख्य स्नोत हो जाए तो परिवार के कर्ज में डूबने की नौबत आ जाती है। सबसे बुरी बात यह है कि कैंसर भी करीब सौ प्रकार का होता है और यह शरीर के किस भाग में पांव जमा ले, इसका भी अंदाजा नहीं होता। इस महीने चार तारीख को पूरी दुनिया विश्व कैंसर दिवस

के तौर पर मनाएगी। इसलिए जरूरी है कि लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता फैले और इससे कैसे लड़ा जाए इस बारे में लोगों को बताया जाए। कैंसर के वित्तीय दुष्प्रभावों से बचने के लिए जरूरी है कि लोगों के पास क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी हो और उसमें सामान्य स्वास्थ्य बीमा के लाभ अतिरिक्त हों।

इन पॉलिसियों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगने के बाद एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था होती है। बीमारी पता लगने के बाद भले ही मरीज का इलाज शुरू न हुआ हो या मरीज अस्पताल में दाखिल न हुआ हो, बीमा कंपनी इन पॉलिसियों में एकमुश्त राशि का भुगतान कर देती हैं। इस राशि का इस्तेमाल मरीज का परिवार अपनी सहूलियत से कर सकता है। मेडिकल बिलों के भुगतान, रोजाना के खर्चों और अस्पताल के अन्य खर्चों व व्हीलचेयर वगैरह पर इस राशि का खर्च किया जा सकता है। जरूरत पडऩे पर इस राशि का इस्तेमाल आय के विकल्प के रूप में भी किया जा सकता है।

क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी को हमेशा सामान्य हेल्थ प्लान के साथ ऐड ऑन के तौर पर लेना समझदारी होता है। वैसे सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के अलावा एक अतिरिक्त पॉलिसी के तौर पर भी इसे लिया जा सकता

है। अगर क्रिटिकल इलनेस को राइडर के तौर पर लिया जाता है तो इसके तहत मिलने वाले लाभ मुख्य पॉलिसी की बीमित राशि के मुताबिक सीमित होते हैं। इसलिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च को देखते हुए ऐसी पॉलिसी को अलग से लेने में ही ज्यादा समझदारी है। हालांकि इस तरह की पॉलिसी में प्रीमियम हमेशा अधिक होता है।

कैंसर की विभीषिका को देखते हुए बीमा कंपनियां आजकल कैंसर के लिए विशेष क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी उपलब्ध करा रही हैं। इस तरह की पॉलिसियों में कैंसर के इलाज में होने वाले हर तरह के खर्चों को शामिल किया जाता है। सामान्य क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी में एक बार क्लेम लेने के बाद इससे बाहर निकलना पड़ता है।

स्नेहिल गंभीर

सीओओ, अवीवा लाइफ इंश्योरेंस

Posted By: Babita Kashyap

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