नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। बीमा नियामक इरडा ने छोटी निजी कारों और कुछ निश्चित दोपहिया वाहनों के बीमा के लिए प्रीमियम कम करने का प्रस्ताव दिया है। वहीं गुड्स व्हिकल की कई श्रेणियों के लिए प्रीमियम को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इरडा ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए मोटर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कवर के लिए प्रीमियम दरों का मसौदा जारी किया है।

मसौदे में ई-रिक्शा के लिए प्रीमियम को 1,440 रुपये से बढ़ाकर 1,685 रुपये करने का प्रस्ताव है। 1,000 सीसी से कम क्षमता वाली कारों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम को 2,055 रुपये से घटाकर 1,850 रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। इससे ज्यादा क्षमता वाले इंजन की कारों के लिए प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्या होता है थर्ड पार्टी इंश्योरेंस

मोटर वाहन कानून के तहत थर्ड पार्टी बीमा का प्रावधान काफी पहले ही लागू किया गया है। इसे थर्ड पार्टी लायबिलिटी कवर के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट पता चलता है कि यह तीसरे पक्ष के बीमा से संबंधित है। जब मोटर वाहन से कोई दुर्घटना होती है तो कई बार इसमें बीमा कराने वाला व बीमा कंपनी के अलावा एक तीसरा पक्ष भी शामिल होता है, जो प्रभावित होता है। यह प्रावधान इसी तीसरे पक्ष यानी थर्ड पार्टी के दायित्वों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।

मोटर वाहन के लिए क्यों है जरूरी?

आपको बता दें यह पॉलिसी बीमा कराने वाले को नहीं, बल्कि जो तीसरा पक्ष दुर्घटना से प्रभावित होता है, उसे कवरेज देती है। कई बार ऐसा होता है मोटर वाहन चलाते समय किसी दुर्घटना में सामने वाले की मृत्यु होने या उसके घायल होने का पता चलता है और आपके पास उसके इलाज के लिए इतने पैसे नहीं होते। तो सरकार ने इस स्थिति में उस इंसान के लिए इस थर्ड पार्टी बीमा का प्रावधान रखा है, जिसे हर मोटर वाहन के लिए कानूनी तौर पर अनिवार्य कर दिया गया है। इस थर्ड पार्टी बीमा के तहत दुर्घटना में प्रभावित सामने वाले पक्ष को मुआवजा दिया जाएगा। इसलिए हर साधारण बीमा कंपनी को इस बारे में प्रावधान करना होता है।

भारत में जब वाहन खरीदा जाता है, उसी समय वाहन डीलर बीमा कवेरज की गणना करके कीमत में जोड़ देता है। इस बीमा कवरेज में थर्ड पार्टी कवरेज का हिसाब भी होता है। थर्ड पार्टी कवरेज कुल बीमा का एक छोटा सा हिस्सा होता है। थर्ड पार्टी कवरेज का प्रीमियम बीमा नियामक इरडा की तरफ से गठित शुल्क सलाहकार समिति के सुझावों के आधार पर तय किया जाता है। वैसे इस कवरेज में प्रभावित पक्ष के लिए मुआवजे का निर्धारण उसकी आमदनी को देखते हुए ही किया जाता है।

By Surbhi Jain