नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। लंबे अंतराल के बाद बीमा उद्योग तेज वृद्धि की राह पर है। जीवन बीमा की तरफ लोगों का रुझान अब बढ़ रहा है। ऐसे में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने घरेलू बाजार में अपने विस्तार को रफ्तार देने की ठानी है। इसके लिए कंपनी अगले चार-पांच साल विभिन्न बिंदुओं पर फोकस करेगी, जिसमें अन्य कंपनियों के अधिग्रहण की रणनीति भी शामिल है। कंपनी के सीएफओ प्रशांत त्रिपाठी ने दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख नितिन प्रधान से बातचीत में अपनी योजना का ब्यौरा दिया।

ऐसा लग रहा है कि जीवन बीमा के मूल तत्व को अब लोग समझ रहे हैं और इसका असर इंडस्ट्री की ग्रोथ में भी दिख रहा है? आपका क्या मानना है?

बिल्कुल, जीवन बीमा के प्रति लोगों की अवधारणा बदली है। अब लोग जीवन बीमा में जोखिम कवर करने के महत्व को समझ रहे हैं और इसी उद्देश्य से पॉलिसी भी ले रहे हैं। लोगों की इसी समझ ने बीते दो साल में जीवन बीमा उद्योग को अच्छी ग्रोथ भी प्रदान की है। इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते वित्त वर्ष मात्र तीन कंपनियों की ग्रोथ में ही गिरावट आई। जबकि उद्योग ने 21 फीसद की दर से वृद्धि दर्ज की। जबकि तीन साल पहले इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट मात्र आठ फीसद थी।

इसकी वजह क्या रही?
देखिए, लोगों में जीवन बीमा के प्रति रुझान में बदलाव की बात तो मैंने की। इसके अलावा बीमा नियामक इरडा के नए दिशानिर्देशों और उनका अनुपालन कर कंपनियों की तरफ से पेश किये गये नए बीमा उत्पाद तेज ग्रोथ की एक बड़ी वजह रहे। किसी वक्त बदनाम रहे यूलिप प्लान में भी बदलाव आया है और ये भी इंडस्ट्री को बढ़त दिलाने में मददगार रहे हैं। इन सब बातों ने लोगों का निजी कंपनियों में भरोसा बढ़ाया है। मैक्स लाइफ की ही बात करें तो हम भी 2016-17 में इंडस्ट्री की रफ्तार से तेज वृद्धि प्राप्त करने में सफल रहे।

लेकिन चालू वित्त वर्ष में मैक्स की रफ्तार कुछ धीमी दिखती है। इसकी वजह?
देखिए, आप भी जानते हैं कि पिछले साल मैक्स और एचडीएफसी लाइफ में विलय की बातचीत चली। हालांकि अब वह सब खत्म हो चुका है, लेकिन इसका असर बिजनेस पर हुआ है, लेकिन यही वजह है कि पहली छमाही में हमारी वृद्धि दर उद्योग से कुछ कम रही है। फिर भी हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में हम अपनी पुरानी रफ्तार फिर कायम कर लेंगे।

मैक्स की क्या रणनीति रहेगी अपनी तेज रफ्तार ग्रोथ रेट फिर से पाने की?
लाइफ इंश्योरेंस के हमारे बिजनेस में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसकी वजह से हमारी ग्रोथ कम हुई है। बिजनेस के तरीकों के मामले में हम वहीं हैं जहां एक साल पहले थे। अलबत्ता हमने अगले चार-पांच वर्ष के लिए रणनीति बनाई है जिस पर फोकस कर हम अपनी ग्रोथ को और तेज कर सकेंगे।

इसके लिए हमारा फोकस पांच-छह बिंदुओं पर रहेगा। इसमें पहला है हमारा अपना बिक्री चैनल, जिसे हम पहले की भांति लगातार मजबूत कर रहे हैं। अपने एजेंटों की संख्या बढ़ानी है और उनके जरिये बाजार में अपनी पैठ बढ़ानी है। दूसरा, अपने सहयोगियों के साथ बिजनेस का विस्तार और नए सहयोगियों की तलाश। इसमें हम बैंकश्योरेंस के साथ-साथ अन्य विकल्पों पर भी काम कर रहे हैं। तीसरा है कंपनियों के अधिग्रहण और विलय का रास्ता।

भविष्य में हम कुछ कंपनियों का अधिग्रहण भी कर सकते हैं। इसका और अधिक ब्यौरा फिलहाल मेरे लिए देना संभव नहीं है। चौथे, हम डिजिटल बिजनेस पर फोकस कर रहे हैं। इसका हम अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहते हैं क्योंकि आज के वक्त में ग्राहक पहले इंटरनेट पर रिसर्च करता है फिर अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक कंपनी का चयन करता है। हमारे कुल ग्राहकों में 20 फीसदी अभी भी इसी चैनल से आते हैं। इसके अलावा हमारी योजना प्रोटेक्शन बिजनेस पर फोकस करने की भी है और रिटायरमेंट प्लान, राइडर के साथ हैल्थ प्लान आदि लाने की है। मैक्स बूपा के रूप में हम पहले से ही स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसलिए इस क्षेत्र की विशेषज्ञता को लेकर हमें कोई दिक्कत नहीं है।

विस्तार की इस रणनीति पर कंपनी कितना निवेश करेगी?
जैसा हमने बताया कि न केवल हम प्वाइंट ऑफ सेल बढ़ाना चाहते हैं, बल्कि बाजार में अपनी पैठ भी और गहरी करना चाहते हैं। इसके लिए कई बिंदुओं पर कंपनी काम कर रही है। जहां तक निवेश का सवाल है कंपनी की योजना अगले दो वर्ष में 300-400 करोड़ रुपये खर्च करने की है। करीब 150-200 करोड़ रुपये प्रति वर्ष।

यूलिप को लेकर काफी आशंकाएं रही हैं? आपके कुल बिजनेस में यूलिप प्लान की कितनी भागीदारी है?
पहले तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि जिन यूलिप प्लान को लेकर दिक्कत आई थी, वे अब नहीं है। इरडा के दिशानिर्देशों के बाद यूलिप प्लान अब अधिक बेहतर हैं। हालांकि हमारा फोकस आज भी टर्म प्लान पर अधिक है। यूलिप का योगदान हमारे बिजनेस में 30-35 ही है। हां, यह अवश्य है कि इंडस्ट्री की ग्रोथ में यूलिप प्लान की भूमिका काफी अहम है।

Posted By: Surbhi Jain

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