नई दिल्ली (जेएनएन)। किसी भी व्यक्ति के जीवन में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बहुत महत्व रखती है। पॉलिसी प्रीमियम की राशि पॉलिसीधारक की सेहत, आदतें और व्यवसाय की प्रकृति पर निर्भर करती है। यही कारक इस राशि का बढ़ा या घटा सकते हैं। मसलन, सिगरेट या शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति का लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम ऐसा न करने वाले पॉलिसिधारक की तुलना में ज्यादा होगा।

जानिए ऐसे 5 कारण जो पॉलिसी धारक के प्रीमियम को घटा या बढ़ा सकते हैं। साथ इन छोटी छोटी बातों में ध्यान में रखकर लाइफ इंश्योरेंस संबंधी निर्णय ले सकते हैं।

1. सिगरेट और शराब का सेवन-
सिगरेट और शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक होता है। इसकी आदत से व्यक्ति के मृत्यु या बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। इंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसी धारक का प्रीमियम तय करने से पहले हमेशा इन आदतों के बारे में सवाल करती हैं। इनका सेवन न करने कि स्थिति में लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम कम होता है।

2. व्यवसाय की प्रकृति-
लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम व्यवसाय की प्रकृति पर भी निर्भर करता है। इंश्योरेंस कंपनियां अधिक जोखिम वाले व्यवसाय जैसे डाइविंग, बॉम्ब डिफ्यूसिंग यूनिट, फायर फाइटिंग आदि के व्यक्ति से ज्यादा प्रीमियम चार्ज करती हैं। साथ ही कुछ कंपनियां तो इस तरह के व्यवसाय से जुड़े लोगों को इंश्योरेंस कवर देने से मना कर देती हैं।

 

3. शारीरिक सेहत-
इंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसीधारक की शारीरिक स्थिति के हिसाब से प्रीमियम राशि तय करती हैं। हृदय रोग या डायबिटीज जैसी बीमारियों की स्थिति में प्रीमियम राशि अधिक होती है। यही कारण है कि पॉलिसी इश्यू होने से पहले हैल्थ स्टेटस की मांग की जाती है। अगर आवेदक की उम्र निश्चित सीमा से ज्यादा हो तो इंश्योरेंस कंपनियां हैल्थ चेकअप और बेसिक टेस्ट अनिवार्य कर देती हैं। वहीं, किसी व्यक्ति का वजन उसकी लंबाई और उम्र के अनुपात में ज्यादा है तो बीमा के लगने वाले प्रीमियम की राशि अधिक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मोटापे की बीमारी से ग्रस्त लोगों में हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रैशर आदि की संभावनाएं अधिक होती है।

4. पॉलिसी का कार्यकाल और बीमा राशि
जानकारी के लिए बता दें कि पॉलिसी की अवधि जितनी लंबी होती है प्रीमियम उतना ही कम होता है। इसलिए कम उम्र में पॉलिसी लेने पर प्रीमियम राशि कम होती है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि इंश्योरेंस कवरेज ज्यादा समय के लिए होता है। साथ ही इसके क्लेम के समय मिलने वाली बीमा राशि के ऊपर भी प्रीमियम निर्भर करता है। एक मुश्त राशि जितनी ज्यादा होगी बीमा प्रीमियम उतना ही ज्यादा होगा।

5. पेरेंटल हिस्ट्री
बीमा कंपनी आवेदक से पॉलिसी करवाते वक्त परिवार में पहले से चली आ रही बीमारियों (जैनेटिक बीमारी) के बारे में भी पूछताछ करती है। ऐसे में अगर आपके परिवार में ऐसी कोई बीमारी चली आ रही है तो कंपनी ऐसी पॉलिसी के लिए ज्यादा प्रीमियम राशि चार्ज करती है।

यह सभी कारक बीमाधारक के पॉलिसी प्रीमियम पर असर डालते हैं। पॉलिसी खरीदने से पहले अन्य कंपनियों की ओर से पेश की पॉलिसी से तुलना जरूर करनी चाहिए। साथ ही पॉलिसी खरीदते वक्त प्रीमियम को महत्वता न देकर पॉलिसी कवरेज, इंश्योरेंस कंपनी का साख, कस्टमर सर्विस और क्लेम सेटलमेंट अनुपात पर ध्यान दें।

Posted By: Surbhi Jain

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