नई दिल्ली। इंश्योरेंस ऐसा निवेश टूल है जो आपके न रहने के बाद भी परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। ऐसे में टर्म इंश्योरेंस एक बेहतर विकल्प है। बढ़ी उम्र के साथ साथ इसे खरीदने की लागत भी बढ़ती जाती है। इसलिए कम उम्र में इसे खरीदना समझादारी भरा कदम होता है। इसे खरीदते वक्त ऐसी कंपनी का चयन करें जिसकी क्लेम सेटलमेंट रेश्यो सबसे अधिक हो। ज्यादा क्लेम सेटलमेंट रेश्यो का मतलब यह होता है कि कंपनी का रिकॉर्ड पॉलिसीहोल्डर के पक्ष में है। इसे खरीदते समय सुनिश्चित करें कि अपनी ओर से सभी जानकारी सही दें। गलत जानकारी देने पर आपके परिवार को आपके बाद क्लेम लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

एक बात का जरूर ध्यान दें कि यदि मेडिकल टेस्ट करवाने के बाद बीमा कंपनी आपके इंश्योरेंस के प्रीमियम की राशि बढ़ा देती है तो इस स्थिति में इंश्योरेंस खरीदने का इरादा न बदलें क्योंकि ऐसे में आपका टर्म इंश्योरेंस लेना ज्यादा जरूरी हो जाता है। टर्म इंश्योरेंस के लिए बाजार में तमाम कंपनियां उपलब्ध हैं, जो अलग अलग तरह के फीचर्स के साथ इसे ऑफर करती हैं। आपको बता दें कि इसे खरीदने में आपकी मदद कंपनी के एक्जिक्युटिव और वित्तीय सलाहकार कर सकते हैं।

क्या होता है टर्म इंश्योरेंश?

जीवन बीमा लेने का सबसे सरल तरीका टर्म इंश्योरेंश होता है। इसमें बीमा लेने वाला व्यक्ति एक निश्चित समय तक एक से प्रीमियम का भुगतान करता है। यदि निश्चित अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो सम एश्यो र्ड या एक मुश्त राशि के बराबर की रकम उसके परिवार को दे दी जाती है।

उदाहरण से समझिए

यदि 15 साल की समय अवधि के लिए 55 लाख रुपए का टर्म इंश्योरेंस खरीदा है और इसके लिए आप हर साल 4 हजार रुपए प्रीमियम के तौर पर भुगतान करते हैं तो आपको अगले 15 वर्षों तक इस 4 हजार रुपए की राशि का भुगतान बीमा कंपनी को करना है। यदि इस दौरान आपकी मृत्यु हो जाती है तो आपके परिवार को यह 55 लाख रुपए की राशि दे दी जाएगी। लेकिन अगर 15 वर्षों तक आप स्वस्थ रहते हैं तो भुगतान किए गए प्रीमियम के बदले में आपको कुछ भी नहीं मिलेगा।

क्यों जरूरी होता है टर्म इंश्योरेंस?

टर्म इंश्योरेंस परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने के बाद भी परिवार को वित्तीय संकट से सुरक्षित रखता है। घर का मुखिया परिवार में आय का मुख्य स्रोत होता है उसकी मृत्यु या गंभीर बीमारी से उसके अक्षम हो जाने के बाद अक्सर परिवार में अन्य सदस्यों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर पर्याप्त राशि का टर्म इंश्योरेंस लिया गया है परिवार की आर्थिक सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है साथ ही उन्हें नियमित आय का सहारा रहता है। टर्म इंश्योरेंस के अंतर्गत गंभीर बीमारी, अक्समात मृत्यु, स्थायी बीमारी जैसी चीजें आती हैं। कई कंपनियां परिवार के सदस्यों को टर्म इंश्योरेंस में नियमित आय का भी विकल्प देती हैं।

कितना टर्म इंश्योरेंस लेना चाहिए?

वित्तीय सलाहकार बलवंत जैन कहते हैं कि जो व्यक्ति परिवार में इनकम का मुख्य स्रोत है उसे अपने मौजूदा दायित्व और भविष्य के लक्ष्यों के अनुरूप ही टर्म इंश्योरेंस लेना चाहिए। मोटे तौर पर अंदाजा लगाने के लिए व्यषक्ति को अपनी सालाना आय के 15 गुना के बराबर अपने टर्म इंश्योरेंस की राशि रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए 5 लाख रुपए की सालाना पैकेज वाले व्यक्ति को करीब 75 लाख रुपए का टर्म इंश्योरेंस लेना चाहिए। टर्म इंस्योरेंस का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इसका प्रीमियम बहुत ही सस्ता होता है, जो कि आमतौर पर सभी के बजट में आसानी से आ जाता है। मसलन, 50 लाख का जीवन बीमा एक 25 साल के व्यक्ति को मात्र 4 हजार रुपए प्रति वर्ष के प्रीमियम पर आसानी से मिल जाता है और 35 से 40 की वर्ष की उम्र में भी यह बीमा औसत 10,000 रुपए में मिल जाता है।

Posted By: Surbhi Jain

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