इरडा का बड़ा कदम: बैंक अब गुमराह कर नहीं बेच पाएंगे जीवन बीमा, ग्राहकों को मिलेगी राहत
भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बैंकों द्वारा जीवन बीमा की गलत बिक्री रोकने के लिए नया प्रस्ताव ...और पढ़ें

HighLights
इरडा ने जीवन बीमा की गलत बिक्री रोकने का प्रस्ताव दिया।
बैंक कर्मचारियों को ग्राहक की मंजूरी बिना बीमा बेचने पर रोक।
बीमा डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन 25% से घटाकर 10% करने की तैयारी।
राजीव कुमार, नई दिल्ली। अभी इंश्योरेंस बेचने वाले बैंक के कर्मचारी अपना टार्गेट पूरा करने के लिए ऐसे ग्राहकों को भी जीवन बीमा उत्पाद (लाइफ इंश्योरेंस) बेच देते हैं, जो दूसरे ही साल से उसका प्रीमियम देने में सक्षम नहीं होते हैं। प्रीमियम नहीं देने का नतीजा यह होता है कि लाइफ इंश्योरेंस बेकार हो जाता है और पहले साल दी गई रकम भी डूब जाती है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के नए प्रस्ताव में ग्राहक को बिना विस्तृत जानकारी दिए और उसकी मंजूरी के किसी भी बीमा उत्पाद को बेचने पर रोक लगाने की बात कही गई है।
इंश्योरेंस की मिस सेलिंग पर आरबीआइ के नियम के मुताबिक बैंक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। दरअसल, ग्रामीण और छोटे शहरों में कम-पढ़े लिखे लोगों के बैंक खाते खुलवाने या फिर लोन दिलाने के दौरान बैंक कर्मचारी उन्हें लाइफ इंश्योरेंस बेच देते हैं।
एसबीआइ, कोटक, एचडीएफसी और आइसीआइसीआइ जैसे कई बैंक अपनी बीमा कंपनी भी चलाते हैं। चूंकि इन हाउस प्रोडक्ट पर काफी अधिक मार्जिन होता है तो बैंक डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर अपने उत्पादों को बेचने का भी काम करता है। हालांकि, बीमा नियामक के नए प्रस्ताव के लागू होने पर बैंक इस प्रकार से इंश्योरेंस की मिस-सेलिंग (गुमराह करके बेचने का काम) नहीं कर पाएंगे।
इरडा ने पहले ही इंश्योरेंस बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। अभी लाइफ इंश्योरेंस बेचने पर डिस्ट्रीब्यूटर को पहले साल के कमीशन के तौर पर 25 प्रतिशत से अधिक का मिलता है। नए प्रस्ताव के मुताबिक अब यह 10 प्रतिशत तक हो सकता है।
सबसे अधिक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर प्रभावित होंगे इरडा के नए प्रस्ताव से सबसे अधिक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर प्रभावित होंगे। इंश्योरेंस बेचने वाली कंपनी के मार्जिन पर कोई प्रभाव नहीं नहीं पड़ेगा। एजेंट के कमीशन को पांच प्रतिशत तक कम किया गया है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन को आधे से भी कम करने का प्रस्ताव रखा गया है। डिस्ट्रीब्यूटर एक साथ कई कंपनियों के लिए काम करते हैं। इसलिए इरडा का मानना है कि उनकी कमाई पर इससे फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन ग्राहकों को निश्चित रूप से इंश्योरेंस की खरीदारी में राहत मिलेगी।
इरडा ने वर्ष 2047 तक देश के सभी नागरिकों को इंश्योरेंस के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंश्योरेंस की लागत को कम करना जरूरी है। इरडा का प्रस्ताव इस दिशा में उठाया गया कदम है और इससे ग्राहकों को फायदा होने के साथ ही इंश्योरेंस बेचने वाली कंपनियों को भी नुकसान नहीं होगा। हालांकि, डिस्ट्रीब्यूटर जरूर प्रभावित होंगे। -अल्पना सिंह, निदेशक (मार्केटिंग), इफको-टोक्यो जनरल इंश्योरेंस
बीमा उत्पाद का पूरा ब्रेकअप सार्वजनिक नहीं करती हैं इंश्योरेंस कंपनियां इरडा का मानना है कि इंश्योरेंस बेचने वाली कंपनियां अपने उत्पाद का पूरा ब्रेकअप सार्वजनिक नहीं करती हैं। अगर कोई ग्राहक अलग-अलग कंपनियों के एक ही प्रकार के उत्पाद की तुलना करना चाहता है तो उसे अपनी पूरी जानकारी देनी पड़ती है।
उत्पाद बेचने के दौरान डिस्ट्रीब्यूटर और एजेंट के कमीशन का कोई जिक्र नहीं होता है। इरडा ने इंश्योरेंस बिक्री के तरीके को पारदर्शी बनाने और ग्राहकों के लिए सस्ता बनाने के लिए नए नियम लाने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर सभी हितधारकों से 25 अक्टूबर तक परामर्श मांगा गया है।
