बच्चे के सपने पूरे करने के लिए अभिभावकों के लिए बचत के अलावा सक्रिय निवेश करना और एक बड़ा कोष तैयार करना भी आवश्यक हो गया है। अच्छी खबर यह है कि बाजार में ऐसे अनेक वित्तीय उपकरण मौजूद हैं, जो इस मकसद को पूरा करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

-बाप बनने से बढ़कर कोई खुशी नहीं होती, मगर यह जिम्मेदारियां भी साथ लेकर आती है। जब आपके घर में औलाद आती है तो यह बात आप पर भी लागू होती है। परिवार में यह सुंदर बढ़ोतरी जहां ईश्वर का आशीर्वाद है, वहीं आपका कर्तव्य बनता है कि अपने बच्चे को सुरक्षित भविष्य का तोहफा प्रदान करें। उन हालात में तो यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, अगर कहीं आप बच्चे की देखभाल के लिए न हों।

अवीवा की ओर से कराए गए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण से पता चला है कि ज्यादातर अभिाभावक अपने बच्चे की शिक्षा को सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। इसके लिए बचत की कोशिश करते हैं। मगर सर्वे से यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि ज्यादातर अभिभावकों को शिक्षा की बढ़ती लागत का अंदाजा नहीं है। इसके अलावा यह भी मालूम हुआ है कि भारतीय युवा वर्ग के सपने काफी बड़े हैं। वे करियर के अपरंपरागत क्षेत्रों में हाथ आजमाना चाहते हैं जैसे स्पोट्र्स, फाइन आट्र्स वगैरह।

इसलिए अपने बच्चे के सपने पूरे करने के लिए अभिभावकों के लिए बचत के अलावा सक्रिय निवेश करना और एक बड़ा कोष तैयार करना भी आवश्यक हो गया है। अच्छी खबर यह है कि बाजार में ऐसे अनेक वित्तीय उपकरण मौजूद हैं जो इस मकसद को पूरा करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

देश-विदेश में प्रोफेशनल कोर्स करने के इच्छुक छात्रों के बीच एजूकेशन लोन काफी लोकप्रिय हैं। इस प्रकार के लोन का चलन काफी समय से है। इनके लिए दीर्घकालिक प्लानिंग की आवश्यकता नहीं होती और कई बैंक एजूकेशन लोन प्रदान करते हैं। इनमें ट्यूशन फीस से लेकर हास्टल या पीजी में रहने तक का खर्च तक कवर होता है। लोन की वापसी का क्रम आमतौर छात्र का कोर्स पूरा होने के 12-18 महीनों के बाद शुरू होता है, ताकि छात्र को नौकरी तलाशने के लिए पर्याप्त समय मिल जाए।

इसका नकारात्मक पक्ष भी है। ये लोन चुनिंदा ख्यात विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए ही मिलते हैं, जिनका प्लेसमेंट का रिकार्ड अच्छा होता है। यह चीज उन छात्रों के लिए समस्या बन सकती है जो किसी नामी कॉलेज या संस्थान से पढ़ाई कर अपरंपरागत पेशों में जाना चाहते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कारक भी हैं, जैसे कि परिवार की आय का स्तर, उपलब्ध संपत्तियां, प्रतिष्ठित गारंटर जिन पर लोन की राशि तय करते वक्त बैंक विचार करते हैं। फिर लोन की वापसी छात्र के ऊपर अतिरिक्त बोझ डालती है।

मगर यदि आप 10-15 वर्ष की दीर्घकालिक प्लानिंग करते हैं तो आपको शिक्षा के भारी-भरकम खर्च से निपटने में आसानी हो सकती है। लंबी अवधि तक निवेश और बचत करने से बड़ा कोष तैयार होता है जो वक्त आने पर बच्चे के सपने पूरे करने के काम आता है।

इस समय ऐसे कई वित्तीय इंस्ट्रूमेंट उपलब्ध हैं, जिनमें निवेश कर आप बच्चे की शिक्षा के लिए बचत कर सकते हैं जैसे म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, इंश्योरेंस प्लान वगैरह। म्यूचुअल फंड इस अवधारणा पर काम करते हैं कि आप मेच्योरिटी तक जीवित रहेंगे और नियमित रूप से निवेश करते रहेंगे। दुर्भाग्य से यदि ऐसा नहीं हुआ और अचानक मृत्यु या किसी गंभीर बीमारी के कारण बच्चे के अभिभावक किस्त भरने में नाकाम रहे तो तब क्या होगा? इसका उपाय भी है।

ऐसी स्थिति में म्यूचुअल फंड या एफडी में नामित को उस तारीख तक जमा किया गया पूरा पैसा प्राप्त हो सकता है। मगर मेच्योरिटी की राशि प्राप्त नहीं होगी। इसके अलावा इन उपकरणों में 18 या 21 वर्ष पूरा होने से पहले बच्चे के अंतरिम खर्चों को पूरा करने के लिए नियमित आमदनी का कोई प्रावधान नहीं होता।

यहीं पर बीमा योजनाएं काम आती हैं। चाइल्ड प्लान के जरिये आप बच्चे की शिक्षा के लिए जरूरत के वक्त पर्याप्त फंड हासिल कर सकते हैं। खास बात यह है कि पॉलिसीधारक की असमय मृत्यु, विकलांगता अथवा गंभीर बीमारी की स्थिति में इसमें पालिसी रद नहीं होती। क्योंकि ऐसे में भविष्य की बाकी सभी किस्तों का (एकमुश्त) भुगतान बीमा कंपनी खुद करती है। इतना ही नहीं, बच्चे के 18 वर्ष का होने तक नियमित आमदनी के जरिये स्कूल की फीस जैसे अंतरिम खर्च अदा करने का प्रावधान भी चाइल्ड प्लान में होता है।

इस तरह की योजनाओं में निवेश से आपको मन की शांति के अलावा इस बात का भरोसा मिलता है कि आप रहें या न रहें, आपके बच्चे के सपने हर हाल में पूरे होंगे। हालांकि, इसके लिए इन योजनाओं में जल्द से जल्द निवेश शुरू करने की सलाह दी जाती है। जल्दी निवेश शुरू करने से यह सुनिश्चित होता है कि आपको उतने ही प्रीमियम पर ज्यादा राशि प्राप्त होगी। (तालिका देखें)

सर्वे के अनुसार भारत के 77 फीसद अभिभावक शिक्षा पर बढ़ते खर्च से चिंतित हैं। यद्यपि पचास फीसद अभिभावकों ने बच्चे के तीन वर्ष का होने से पहले उसकी पढ़ाई के लिए बचत प्रारंभ कर दी थी। इसके बावजूद 47 फीसद का मानना था कि उन्हें और पहले बचत शुरू करनी चाहिए थी। अच्छी शिक्षा एक ऐसी संपत्ति है जिसे कोई छीन नहीं सकता। यह ऐसा निवेश है जिसकी कीमत कभी नहीं गिरती। इसलिए बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए जितनी जल्दी हो सके निवेश शुरू कर दीजिए।

अभिभावक की आयुः बच्चे की आयु : उत्पाद की अवधि : बीमित राशि : प्रीमियम: अनुमानित रिटर्न

35 : 1 : 20 : 10,04,000: 50,000: 22,51,528

35: 5 : 16 : 8,40,000 : 50,000 : 15,09,439

(रिटर्न 10 फीसद वृद्धि दर के अनुसार)

महेश मिश्रा
सीडीओ,अवीवा लाइफ इंश्योरेंस

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