टर्म इंश्योरेंस पर कमीशन बढ़ाकर पहले वर्ष के प्रीमियम के 70 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव अब यह बात सच लगने लगी है कि भारत में बीमा कारोबार में ग्राहकों के साथ घोटाला है।

बीमा नियामक इरडा कभी भी निवेशकों के धन की हानि को रोकने के मामूली उपायों से अधिक कुछ नहीं करता। यही वजह है कि इरडा ने कुछ दिनों पहले नियमों का जो मसौदा जारी किया उस पर किसी को हैरानी नहीं हुई। इन नियमों में टर्म इंश्योरेंस पर कमीशन बढ़ाकर पहले वर्ष के प्रीमियम के 70 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव किया गया है।

कमीशन में यह वृद्धि इतनी अधिक है कि यह विचार ही चौंकाने वाला लगता है। जब किसी टर्म बीमा प्लान के लिए अधिक कमीशन का भुगतान होता है तो मैं यूलिप या परंपरागत प्लान पर कमीशन के भुगतान के संबंध में एतराज पर गौर नहीं कर पाता। यह सही है कि ज्यादा कमीशन होने पर एजेंट को फायदा होता है और उपभोक्ता की आय कम होती है।

लेकिन यह दलील टर्म इंश्योरेंस के संबंध में लागू नहीं होती। टर्म इंश्योरेंस कोई निवेश नहीं है। इसमें कोई रिटर्न भी नहीं मिलता। यह एक सेवा भर है। आप एक निश्चित राशि जमा करते हैं। उसके एवज में आपको एक

निश्चित बीमा सुरक्षा मिलती है। एजेंट ग्राहकों को किस प्लान में कम प्रीमियम और किस में अधिक सुरक्षा है,

यह समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

अगर उन्हें इसका फायदा होगा तो एजेंट कमीशन पर जोर देंगे। टर्म प्लान में कोई छुपा तथ्य नहीं है जैसा कि यूलिप और परंपरागत प्लान में होता है। इसलिए ग्राहकों को उनके अहित में फैसला लेने के लिए उकसाना मुश्किल है। वैसे भी एजेंटों को टर्म बीमा बेचने के लिए प्रोत्साहित करना वक्त की जरूरत है।

अगर कमीशन की नई संरचना से ग्राहक टर्म प्लान से दूर नहीं भागते हैं तो यह अच्छी बात है।

धीरेंद्र कुमार

Posted By: Babita Kashyap

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